Report by: Avinash Srivastwa
Sasaram : बिहार के रोहतास जिले के सासाराम से आधी आबादी के सम्मान और सामर्थ्य की एक प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है। यहाँ के स्थानीय सहकारिता बैंक (Cooperative Bank) को अब पूरी तरह से महिलाओं द्वारा संचालित ‘पिंक ब्रांच’ घोषित कर दिया गया है। यह न केवल जिले के लिए बल्कि पूरे राज्य के बैंकिंग क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।
Sasaram प्रबंधक से लेकर कैशियर तक, सभी कमान महिलाओं के हाथ
सासाराम के इस कोऑपरेटिव बैंक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि अब यहाँ चपरासी से लेकर, क्लर्क, कैशियर और शाखा प्रबंधक तक की सभी जिम्मेदारियाँ केवल महिला कर्मी ही संभाल रही हैं। पहली बार किसी पूरी शाखा का संचालन महिलाओं के हाथों में सौंपे जाने से बैंक कर्मियों और स्थानीय लोगों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। प्रशासन का मानना है कि महिलाओं के हाथों में कमान होने से बैंक की कार्यप्रणाली में अधिक पारदर्शिता और संवेदनशीलता आएगी।
Sasaram ‘पिंक ब्रांच’ से महिला ग्राहकों को मिलेगी विशेष सहूलियत
इस बैंक को ‘पिंक ब्रांच’ के रूप में विकसित करने का मुख्य उद्देश्य महिला ग्राहकों को बैंकिंग सेवाओं से जोड़ना और उन्हें सहज वातावरण प्रदान करना है। अक्सर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की महिलाएं पुरुष प्रधान कार्यालयों में अपनी बात रखने में झिझक महसूस करती हैं। अब इस शाखा में आने वाली महिलाओं को किसी भी काम के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। वे बेझिझक अपनी आर्थिक समस्याओं और बैंकिंग जरूरतों को साझा कर सकेंगी।
Sasaram शाखा प्रबंधक दुर्गेश कुमारी का अनुभव और उत्साह
सासाराम की इस विशेष महिला प्रधान शाखा की कमान शाखा प्रबंधक दुर्गेश कुमारी संभाल रही हैं। उन्होंने इस पहल पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि एक साथ इतनी महिलाओं का मिलकर बैंक चलाना एक सुखद अनुभव है। दुर्गेश कुमारी के अनुसार, “इस तरह के माहौल में काम करना गौरव की बात है। हम यहाँ आने वाली हर महिला को बेहतर सेवा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं ताकि उन्हें किसी भी कागजी कार्यवाही में कोई परेशानी न हो।”
Sasaram आत्मनिर्भर बिहार की दिशा में एक बड़ा कदम
बिहार सरकार और सहकारिता विभाग की इस पहल को आत्मनिर्भर बिहार के विजन से जोड़कर देखा जा रहा है। सासाराम का यह प्रयोग सफल होने पर आने वाले समय में अन्य जिलों में भी इसी तरह की ‘पिंक ब्रांच’ खोली जा सकती हैं। इससे न केवल कार्यस्थलों पर लैंगिक समानता (Gender Equality) को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) में महिलाओं की भागीदारी भी कई गुना बढ़ जाएगी।
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