Report by: Ravindra Singh
Sakti : छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में खनिज संपदा की सरेआम लूट मची हुई है। जिले के खम्हरिया और छितापडरिया जैसे प्रमुख क्षेत्रों में डोलोमाइट पत्थर का अवैध परिवहन बिना किसी डर के जारी है। इस काले कारोबार के चलते न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुँच रहा है, बल्कि शासन को मिलने वाले भारी-भरकम राजस्व की भी चोरी की जा रही है। स्थानीय ग्रामीणों की शिकायतों के बावजूद यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है।
बिना रॉयल्टी धड़ल्ले से दौड़ रहे हाइवा: माफियाओं के हौसले बुलंद
Sakti के इस बेल्ट में लगभग 12 से 14 डोलोमाइट खदानें संचालित हैं। नियमों के अनुसार, हर पत्थर के टुकड़े के परिवहन पर शासन को रॉयल्टी देना अनिवार्य है। लेकिन वास्तविकता इसके उलट है।
- अवैध ढुलाई: जांच में सामने आया है कि कई खदान संचालक बिना पिट पास या वैध रॉयल्टी पर्ची के ही पत्थरों की ढुलाई कर रहे हैं।
- क्रशरों का नेटवर्क: भारी-भरकम हाइवा वाहनों के जरिए यह पत्थर सीधे स्थानीय क्रशरों—जैसे एम आर एस (MRS), बंटी क्रेशर और अन्य इकाइयों तक पहुँचाया जा रहा है। यह पूरा नेटवर्क इतने सुनियोजित तरीके से काम कर रहा है कि जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
राजस्व की हानि और धूल का गुबार
Sakti अवैध परिवहन के कारण क्षेत्र की सड़कें जर्जर हो रही हैं और ओवरलोडेड वाहनों से उड़ने वाली धूल ने स्थानीय लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। जानकारों का मानना है कि यदि इस अवैध ढुलाई पर लगाम नहीं कसी गई, तो शासन को मिलने वाला सालाना राजस्व करोड़ों में कम हो सकता है। माफियाओं द्वारा सरकारी तंत्र की मिलीभगत से नियमों को ठेंगे पर रखना अब आम बात हो गई है।
खनिज विभाग का आश्वासन: जांच के घेरे में क्रेशर संचालक
Sakti मामले की गंभीरता को देखते हुए जब खनिज विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया गया, तो उन्होंने हमेशा की तरह रटा-रटाया जवाब दिया। अधिकारियों का कहना है कि:
- उन्हें अवैध परिवहन की कुछ सूचनाएं मिली हैं और मामले की आंतरिक जांच की जा रही है।
- दोषी पाए जाने वाले खदान और क्रेशर संचालकों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और उनके लाइसेंस रद्द करने तक की सिफारिश की जा सकती है।
हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित रह जाती है। अब देखना यह है कि क्या जिला प्रशासन इन रसूखदार माफियाओं पर नकेल कस पाता है या यह अवैध कारोबार ऐसे ही फलता-फूलता रहेगा।
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