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by-Ravindra Sikarwar

नई दिल्ली: भारत और रूस के बीच मजबूत रक्षा संबंधों को और गहरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, रूस ने भारत को अपने उन्नत एसयू-57 स्टेल्थ फाइटर जेट के स्थानीय उत्पादन का प्रस्ताव दिया है। यह प्रस्ताव ‘मेक इन इंडिया’ पहल के अनुरूप है, जिसमें प्रत्येक जेट की कीमत लगभग 35 मिलियन अमेरिकी डॉलर रखी गई है और पूर्ण तकनीकी हस्तांतरण शामिल है। इस प्रस्ताव से भारत की स्वदेशी एयरोस्पेस क्षमताओं को मजबूती मिलने की उम्मीद है, जो देश की रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है।

एसयू-57, जिसे नाटो कोडनेम ‘फेलन’ के नाम से भी जाना जाता है, रूस का पांचवीं पीढ़ी का स्टेल्थ फाइटर जेट है। यह जेट उन्नत स्टेल्थ तकनीक, सुपरक्रूज क्षमता (बिना आफ्टरबर्नर के सुपरसोनिक गति), उन्नत एवियोनिक्स सिस्टम, सक्रिय फेज्ड ऐरे रडार और लंबी दूरी की मिसाइलों से लैस है। इसकी डिजाइन में कम रडार क्रॉस-सेक्शन का ध्यान रखा गया है, जो इसे दुश्मन के रडार से बचाने में मदद करता है। एसयू-57 की अधिकतम गति मैक 2 से अधिक है और यह 3,500 किलोमीटर की रेंज के साथ विभिन्न प्रकार के हथियारों को ले जाने में सक्षम है। रूस ने इस जेट को 2019 में सेवा में शामिल किया था और अब तक इसका निर्यात संस्करण एसयू-57ई विकसित किया गया है।

यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी वायुसेना को मजबूत करने के लिए उन्नत लड़ाकू विमानों की तलाश कर रहा है। भारतीय वायुसेना वर्तमान में राफेल, एसयू-30एमकेआई और तेजस जैसे विमानों पर निर्भर है, लेकिन पांचवीं पीढ़ी के फाइटर की कमी महसूस हो रही है। भारत का अपना एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एएमसीए) कार्यक्रम अभी विकास के शुरुआती चरण में है और इसमें देरी की संभावना है। ऐसे में रूस का प्रस्ताव भारत को तत्काल क्षमता बढ़ाने का अवसर प्रदान कर सकता है। प्रस्ताव के तहत, रूस हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के साथ मिलकर भारत में एसयू-57 का उत्पादन शुरू करने की योजना बना रहा है। इसमें पूर्ण स्रोत कोड और तकनीकी हस्तांतरण शामिल है, जो भारत को भविष्य में जेट को अपग्रेड करने और स्वदेशी रूप से संशोधित करने की स्वतंत्रता देगा।

रूस ने यह प्रस्ताव जून 2025 में पहली बार पेश किया था, जब यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन ने एसयू-57ई के लिए पूर्ण स्रोत कोड की पेशकश की थी। मार्च 2025 में तकनीकी हस्तांतरण के नवीनीकृत प्रस्ताव के बाद, सितंबर में दोनों देशों ने भारत में उत्पादन शुरू करने के लिए आवश्यक निवेश का मूल्यांकन किया। यदि यह सौदा सफल होता है, तो भारत को पहले बैच में रूस से तैयार जेट मिल सकते हैं, उसके बाद एचएएल में सीमित स्थानीय उत्पादन शुरू होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सौदा भारत को अमेरिकी एफ-35 जैसे प्रतिद्वंद्वी जेटों के मुकाबले मजबूत स्थिति प्रदान करेगा।

भारत-रूस रक्षा सहयोग का इतिहास लंबा है। दोनों देशों ने पहले एसयू-30एमकेआई फाइटर जेट के सह-उत्पादन में सफलता हासिल की है, जो भारतीय वायुसेना की रीढ़ है। यह नया प्रस्ताव इसी परंपरा को आगे बढ़ाएगा। हालांकि, चुनौतियां भी हैं, जैसे कि तकनीकी एकीकरण, लागत प्रबंधन और भू-राजनीतिक दबाव। अमेरिका जैसे देश भारत को रूसी हथियारों की खरीद पर सतर्क कर चुके हैं, लेकिन भारत अपनी रक्षा जरूरतों को प्राथमिकता दे रहा है।

इस प्रस्ताव को भारत में सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है, क्योंकि यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को बढ़ावा देगा। रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, चर्चाएं उन्नत चरण में हैं और जल्द ही अंतिम निर्णय लिया जा सकता है। यदि सौदा होता है, तो यह भारत की एयरोस्पेस उद्योग को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा, स्थानीय रोजगार सृजन करेगा और रक्षा निर्यात की संभावनाओं को बढ़ाएगा।