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RSS History: रतलाम में संघ कार्य की ऐतिहासिक शुरुआत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का कार्य रतलाम नगर में वर्ष 1942 में आरंभ हुआ। उस समय देश स्वतंत्रता संग्राम के दौर से गुजर रहा था और समाज में वैचारिक चेतना का उदय हो रहा था। धार निवासी हीरालाल शर्मा, जिन्हें बाचा साहब के नाम से जाना जाता था, ने रतलाम में संघ की पहली शाखा प्रारंभ की। जुलाई 1942 में स्टेशन रोड स्थित वर्तमान महाराष्ट्र समाज भवन के परिसर में यह पहली शाखा लगी। इस शाखा के प्रथम मुख्य शिक्षक श्री मुकुंद चौक थे। यहीं से रतलाम में संघ कार्य की नींव पड़ी, जिसने आगे चलकर सामाजिक संगठन और राष्ट्रवादी विचारधारा को मजबूती प्रदान की।

RSS History: समाज में व्यापक प्रभाव और जनसहभागिता

संघ के कार्यक्रमों का प्रभाव रतलाम के सामाजिक जीवन में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा था। एक अवसर पर आयोजित संघ कार्यक्रम के कारण बैंक, शासकीय कार्यालयों और औद्योगिक इकाइयों में आधे दिन का अवकाश घोषित करना पड़ा। कॉलेजों में विद्यार्थियों की उपस्थिति नगण्य रही और शहर का प्रमुख उद्योग सज्जन मिल भी अस्थायी रूप से बंद रहा। यद्यपि प्रशासन ने अंतिम समय में कार्यक्रम की अनुमति निरस्त कर दी थी, लेकिन जनभावना और व्यापक सहभागिता को देखते हुए बाद में अनुमति बहाल की गई। इस कार्यक्रम में लगभग तीस हजार नागरिकों की उपस्थिति रही। तत्कालीन प्रांत प्रचारक एकनाथ रानडे ने इस अवसर पर बौद्धिक उद्बोधन के माध्यम से संघ के विचारों से नागरिकों को परिचित कराया।

RSS History: संगठन विस्तार और कुशाभाऊ ठाकरे की भूमिका

रतलाम में संघ कार्य को सुदृढ़ करने में अनेक समर्पित स्वयंसेवकों का योगदान रहा। भारतीय जनता पार्टी के पितृ पुरुष कहे जाने वाले कुशाभाऊ ठाकरे रतलाम के प्रथम जिला प्रचारक बने। उनके नेतृत्व में जिले भर में संघ की शाखाओं का तेजी से विस्तार हुआ और ग्रामीण क्षेत्रों तक संगठन पहुंचा। वर्ष 1947 तक रतलाम जिले में 25 से अधिक स्थानों पर शाखाएं स्थापित हो चुकी थीं। इसी व्यापक विस्तार के कारण 1947 में संघ का भव्य प्रकट कार्यक्रम आयोजित किया गया।

1947 का प्रकट कार्यक्रम और सामाजिक परिस्थितियां

20 जनवरी 1947 को रतलाम के लोकेन्द्र सिनेमा के सामने स्थित मैदान में संघ का प्रकट कार्यक्रम आयोजित हुआ। कार्यक्रम की तैयारी के लिए स्वयंसेवकों ने लगभग एक सप्ताह तक मैदान में डेरा डालकर व्यवस्थाएं कीं। यह वह समय था जब देश विभाजन की पीड़ा से गुजर रहा था और पाकिस्तान से आए हिंदू शरणार्थी रतलाम सहित आसपास के क्षेत्रों में बस रहे थे। ऐसे वातावरण में राष्ट्र और संस्कृति के प्रति चेतना अत्यंत प्रबल थी, जिसके कारण कार्यक्रम में हजारों नागरिकों ने सहभागिता की।

प्रारंभिक स्वयंसेवक और संगठनात्मक आधार

रतलाम में संघ कार्य को आगे बढ़ाने वाले प्रारंभिक स्वयंसेवकों में हजारीलाल लोड़ा, चांदमल वाडोदिया, कृष्णस्वरूप जौहरी, ओंकारलाल सेठ, रतनलाल विरोदिया, घनश्याम व्यास, रामचंद्र व्यास, हरस्वरूप दवे, रामप्रसाद मेहता, माणिकलाल गोयल, सूरजमल जैन सहित अनेक नाम उल्लेखनीय हैं। वर्ष 1951 तक हजारीलाल लोड़ा नगर कार्यवाह रहे, इसके बाद 1951 से 1958 तक धन्त्रयाम व्यास ने नगर कार्यवाह और बाद में जिला कार्यवाह के रूप में संगठन को दिशा दी। इन समर्पित कार्यकर्ताओं के प्रयासों से रतलाम संघ कार्य का एक मजबूत और वैचारिक रूप से स्पष्ट केंद्र बना।

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