by-Ravindra Sikarwar
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत के विभिन्न मुद्दों पर दिए गए बयान सुर्खियां बटोर रहे हैं। उन्होंने हाल ही में यह स्पष्ट किया है कि उन्होंने कभी यह नहीं कहा कि उन्हें या किसी और को 75 साल की उम्र में सेवानिवृत्त हो जाना चाहिए। यह बयान उन अटकलों के जवाब में आया है जो पिछले कुछ समय से चल रही थीं।
सेवानिवृत्ति पर मोहन भागवत का स्पष्टीकरण:
मोहन भागवत ने अपने एक कार्यक्रम में बोलते हुए साफ किया कि उनके 75 वर्ष की उम्र में सेवानिवृत्ति की बात केवल अफवाह है। उन्होंने कहा कि उन्होंने न तो खुद के लिए और न ही संघ के किसी अन्य पदाधिकारी के लिए ऐसी कोई आयु सीमा निर्धारित की है। उन्होंने कहा, “मैंने कभी नहीं कहा कि मैं 75 साल का हो जाऊंगा तो रिटायर हो जाऊंगा।” इस टिप्पणी ने उन सभी चर्चाओं पर विराम लगा दिया, जिनमें कहा जा रहा था कि आरएसएस में भी बीजेपी की तरह 75 साल की उम्र में नेताओं को सक्रिय भूमिका से हटाया जा सकता है।
अन्य मुद्दों पर टिप्पणियां:
भागवत ने सेवानिवृत्ति के अलावा कई अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर भी अपनी राय रखी है, जैसे:
- हिंदुत्व और भारत: भागवत ने अक्सर कहा है कि भारत एक हिंदू राष्ट्र है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि यह किसी अन्य धर्म के खिलाफ है। उनके अनुसार, हिंदुत्व एक जीवन शैली है जो सभी को साथ लेकर चलती है।
- आरक्षण: उन्होंने आरक्षण पर अपनी राय देते हुए कहा है कि जब तक समाज में भेदभाव मौजूद है, तब तक आरक्षण जारी रहना चाहिए। हालांकि, उनका मानना है कि इसका सही मूल्यांकन होना चाहिए और जो योग्य हैं उन्हें इसका लाभ मिलना चाहिए।
- समाज में सद्भाव: भागवत ने हमेशा समाज में सद्भाव और भाईचारे पर जोर दिया है। उन्होंने मुसलमानों और अन्य अल्पसंख्यकों से संवाद करने की बात कही है और उन्हें भारतीय समाज का अभिन्न अंग बताया है।
मोहन भागवत के ये बयान महत्वपूर्ण हैं क्योंकि आरएसएस देश में सामाजिक और राजनीतिक एजेंडे को आकार देने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उनके स्पष्टीकरणों और टिप्पणियों से संघ की भविष्य की दिशा और सोच का संकेत मिलता है।
