
भोपाल/नई दिल्ली: देश के बाघ अभयारण्यों के बफर जोन में इंसानों पर वन्यजीवों के बढ़ते हमलों को देखते हुए, सरकार ने इस समस्या से निपटने के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना शुरू की है। इसके तहत, नौ चिन्हित बाघ अभयारण्यों के बफर क्षेत्रों में 145 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाएं चलाई जाएंगी। इन विकास कार्यों का मुख्य उद्देश्य मानव और वन्यजीवों के बीच संघर्ष को कम करना है।
यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब देश में बाघों की संख्या में उत्साहजनक वृद्धि दर्ज की गई है। पिछले चार वर्षों में, इन नौ बाघ अभयारण्यों में बाघों की आबादी 526 से बढ़कर 785 हो गई है। बाघों की बढ़ती संख्या के साथ, उनके रिहायशी इलाकों और मानव बस्तियों के बीच टकराव की संभावना भी बढ़ गई है।
परियोजना के मुख्य पहलू:
इस 145 करोड़ रुपये की विकास परियोजना में निम्नलिखित प्रमुख कार्य शामिल होंगे:
- सुरक्षा उपायों को मजबूत करना: बफर जोन में गश्त बढ़ाना, आधुनिक निगरानी तकनीक (जैसे थर्मल कैमरे, ड्रोन) का उपयोग करना और वन कर्मियों को बेहतर प्रशिक्षण और उपकरण उपलब्ध कराना।
- वन्यजीवों के लिए पर्यावास सुधार: बफर जोन में वन्यजीवों के लिए पानी के स्रोत विकसित करना, चारे की उपलब्धता बढ़ाना और उनके प्राकृतिक रास्तों को सुरक्षित करना ताकि वे भोजन और पानी की तलाश में मानव बस्तियों की ओर न आएं।
- स्थानीय समुदायों के साथ सहयोग: बफर जोन के आसपास रहने वाले स्थानीय समुदायों को वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों में शामिल करना, उन्हें जागरूकता कार्यक्रम चलाना और उन्हें आजीविका के वैकल्पिक साधन उपलब्ध कराना ताकि वे वन संसाधनों पर अपनी निर्भरता कम कर सकें।
- त्वरित प्रतिक्रिया दल: मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं पर तुरंत प्रतिक्रिया करने के लिए प्रशिक्षित और सुसज्जित त्वरित प्रतिक्रिया दलों का गठन करना।
- बाड़ और अन्य अवरोधक: संवेदनशील क्षेत्रों में मानव बस्तियों और वन्यजीवों के आवासों के बीच प्राकृतिक या कृत्रिम अवरोधक (जैसे बायोफेंसिंग) लगाना ताकि वन्यजीव गलती से मानव क्षेत्रों में प्रवेश न कर सकें।
- जागरूकता और शिक्षा: स्थानीय समुदायों के बीच वन्यजीव संरक्षण के महत्व और मानव-वन्यजीव संघर्ष से बचाव के उपायों के बारे में जागरूकता बढ़ाना।
चिन्हित बाघ अभयारण्य:
हालांकि इस खबर में विशेष रूप से उन नौ बाघ अभयारण्यों का उल्लेख नहीं किया गया है जहां यह परियोजना लागू की जाएगी, यह स्पष्ट है कि ये वे क्षेत्र हैं जहां बाघों की आबादी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं सामने आई हैं।
विशेषज्ञों की राय:
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि यह एक स्वागत योग्य कदम है। उनका कहना है कि बाघों की बढ़ती आबादी को बनाए रखने के लिए मानव-वन्यजीव संघर्ष को प्रभावी ढंग से संबोधित करना आवश्यक है। स्थानीय समुदायों को विश्वास में लेना और उन्हें संरक्षण प्रयासों में भागीदार बनाना इस परियोजना की सफलता के लिए महत्वपूर्ण होगा।
आगे की राह:
यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इन विकास कार्यों को जमीनी स्तर पर कैसे लागू किया जाता है और ये मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने में कितने प्रभावी साबित होते हैं। सरकार को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि इन परियोजनाओं के लिए आवंटित धन का सदुपयोग हो और निर्धारित समय सीमा के भीतर कार्य पूरे हों।
यह पहल न केवल वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद करेगी बल्कि बफर जोन में रहने वाले लोगों की सुरक्षा और आजीविका को भी सुरक्षित करेगी।
