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Report by: Avinash Srivastwa

Rohtas : बिहार के रोहतास जिले में पिछले 15 दिनों से आतंक का पर्याय बना जंगली हाथी आखिरकार जिंदगी की जंग हार गया। शनिवार शाम सोन नदी के इंद्रपुरी डैम के गहरे पानी में फंसने के बाद वन विभाग ने उसे सुरक्षित बाहर तो निकाल लिया था, लेकिन कुछ ही घंटों बाद औरंगाबाद के मेंह चौक के पास हाथी ने दम तोड़ दिया। इस घटना के बाद जहाँ ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है, वहीं वन्यजीव प्रेमियों में भारी शोक व्याप्त है।

15 दिनों का उत्पात और ग्रामीणों में दहशत

Rohtas यह जंगली हाथी पिछले दो सप्ताह से रोहतास के पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों में लगातार विचरण कर रहा था। इस दौरान उसने भारी तबाही मचाई थी:

  • जान-माल का नुकसान: हाथी ने दर्जनों मवेशियों को मार डाला और कई ग्रामीणों के घरों (झोपड़ियों) को ध्वस्त कर दिया था।
  • फसलों की बर्बादी: खेतों में खड़ी फसलों को रौंदकर हाथी ने किसानों को भारी आर्थिक चोट पहुँचाई।
  • रातों की नींद उड़ी: हाथी के हमले के डर से कई गांवों के लोग रात-रात भर जागकर पहरा देने को मजबूर थे। स्थानीय प्रशासन और वन विभाग उसे जंगल की ओर खदेड़ने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन सफलता नहीं मिल पा रही थी।

रेस्क्यू ऑपरेशन और मौत का घटनाक्रम

Rohtas शनिवार को घूमते हुए हाथी अचानक इंद्रपुरी बराज के गहरे पानी में जा गिरा और वहां फंस गया। जलस्तर और हाथी के वजन के कारण वह खुद बाहर निकलने में असमर्थ था।

  • बचाव कार्य: सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम भारी मशीनों और विशेषज्ञों के साथ मौके पर पहुँची। घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद हाथी को पानी से बाहर निकाला गया।
  • अंतिम समय: रेस्क्यू के बाद हाथी को सुरक्षित स्थान पर ले जाने की प्रक्रिया शुरू हुई। बताया जा रहा है कि अत्यधिक थकान, लंबे समय तक पानी में रहने और संभवतः आंतरिक चोटों के कारण उसकी स्थिति बिगड़ती चली गई और रास्ते में ही उसकी मृत्यु हो गई।

वन विभाग की भूमिका पर उठते सवाल

Rohtas हाथी की मौत ने वन विभाग के प्रबंधन को कटघरे में खड़ा कर दिया है। वन्यजीव विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि 15 दिनों से उत्पात मचा रहे हाथी को समय रहते सही तरीके से ट्रanquilize (बेहोश) कर सुरक्षित जंगल में छोड़ दिया जाता, तो शायद यह नौबत नहीं आती।

लंबे समय तक पानी में फंसे रहने से हाथी को ‘हाइपोथर्मिया’ या अत्यधिक मानसिक तनाव (Shock) हो सकता है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सटीक कारणों का खुलासा हो पाएगा। फिलहाल विभाग ने शव को कब्जे में लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है।

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