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Raipur : नगर निगम की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। भीषण जल संकट के इस दौर में संकल्प सोसायटी फेस-2 के निवासियों को पीने के पानी के लिए तरसना पड़ रहा है, और जो पानी निगम द्वारा टैंकरों के माध्यम से भेजा जा रहा है, वह बेहद दूषित और बदबूदार है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि टैंकरों से आ रहा पानी इतना मटमैला है कि वह निथारने के बाद भी इस्तेमाल के लायक नहीं है।

स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़: पिछली त्रासदियों से भी नहीं सीखा सबक

Raipur सोसायटी के निवासियों में नाराजगी की सबसे बड़ी वजह यह है कि इसी कॉलोनी ने पिछले वर्ष दूषित पानी के कारण एक भयावह दौर देखा था। बीते साल यहाँ दूषित जल आपूर्ति की वजह से पीलिया और डायरिया का प्रकोप फैला था, जिसकी चपेट में आने से एक मासूम बच्चे सहित दो लोगों की जान चली गई थी।

इतनी बड़ी मानवीय क्षति के बावजूद, निगम प्रशासन के सिस्टम में कोई सुधार नजर नहीं आ रहा है। रहवासियों का कहना है कि प्रशासन उनके स्वास्थ्य और जीवन के साथ खिलवाड़ कर रहा है, और बार-बार शिकायत के बावजूद स्थायी समाधान के बजाय केवल खानापूर्ति की जा रही है।

कमिश्नर के बयान ने आग में डाला घी

Raipur हालात बेकाबू होते देख और लोगों के बढ़ते गुस्से के कारण जोन कमिश्नर राकेश शर्मा को देर रात मौके पर पहुँचना पड़ा। हालांकि, उनके रवैये ने लोगों की नाराजगी को और बढ़ा दिया। आरोप है कि कमिश्नर ने इस गंभीर समस्या को “मामूली तकनीकी गलती” करार दिया। जहाँ लोग अपने बच्चों और परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंतित थे, वहीं अधिकारी का इसे सामान्य घटना बताना संवेदनहीनता की पराकाष्ठा मानी जा रही है।

वर्तमान स्थिति और स्थानीय मांग

Raipur वर्तमान में पूरी सोसायटी में भारी तनाव का माहौल है। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि तुरंत साफ पेयजल की व्यवस्था नहीं की गई, तो वे नगर निगम मुख्यालय का घेराव करेंगे। स्थानीय लोगों की मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:

  • टैंकरों के बजाय पाइपलाइन के माध्यम से शुद्ध पेयजल की बहाली।
  • जल स्रोतों और स्टोरेज टैंकों की तत्काल सफाई और क्लोरिनेशन।
  • लापरवाही बरतने वाले संबंधित अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई।

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