by-Ravindra Sikarwar
नई दिल्ली: कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने एक बार फिर चुनाव आयोग पर हमला करते हुए कहा है कि अगर ‘इंडिया’ गठबंधन केंद्र में सरकार बनाता है, तो वह “वोट चोरी” में शामिल मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे। उनका यह बयान चुनाव आयोग द्वारा उनके आरोपों को निराधार बताने और उनसे हलफनामा या माफी मांगने के बाद आया है।
बिहार में ‘वोट अधिकार यात्रा’ के दौरान दिया बयान:
राहुल गांधी ने यह टिप्पणी बिहार के सासाराम में अपनी ‘वोट अधिकार यात्रा’ के दौरान एक जनसभा में की। उन्होंने कहा कि “पूरे देश में चुनाव चोरी हो रही है।” उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में मतदाता सूची के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) का उद्देश्य भी वोटों की चोरी करना है।
उन्होंने मंच से चुनाव आयोग को सीधे संबोधित करते हुए कहा, “मैं चुनाव आयोग से कहना चाहता हूं कि अभी मोदी जी की सरकार है, लेकिन एक बात समझ लीजिए, एक दिन ऐसा आएगा जब बिहार और दिल्ली में ‘इंडिया’ गठबंधन की सरकार होगी, तब हम आप तीनों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे। आपने पूरे देश से वोट चुराए हैं।”
चुनाव आयोग ने आरोपों का किया खंडन:
राहुल गांधी के इन आरोपों के जवाब में, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने राहुल गांधी के आरोपों को “निराधार” और “गुमराह करने वाला” बताया। CEC ने कहा कि “वोट चोरी” जैसे शब्दों का इस्तेमाल संविधान का अपमान है और यह लाखों चुनाव अधिकारियों की ईमानदारी पर सीधा हमला है।
चुनाव आयोग ने राहुल गांधी से अपने आरोपों के समर्थन में सात दिनों के भीतर हलफनामा दाखिल करने या देश से माफी मांगने को कहा है। आयोग ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची में कोई भी त्रुटि दावों और आपत्तियों के दौरान बताई जा सकती है, और यह प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी है। आयोग ने यह भी कहा कि हर मतदाता को वोट डालने का केवल एक ही अधिकार होता है, भले ही उसका नाम गलती से मतदाता सूची में दो बार शामिल हो।
बीजेपी का पलटवार:
राहुल गांधी के इस बयान पर बीजेपी ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि राहुल गांधी अपनी हार के लिए ईवीएम और चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराते रहे हैं। उन्होंने कहा कि “जो लोग चारा-चोरी के लिए जमानत पर बाहर हैं, वे राहुल गांधी के मंच से ‘चोरी-चोरी’ चिल्ला रहे हैं।” उन्होंने कहा कि विपक्ष का काम सिर्फ हंगामा करना और संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाना है।
