Report by: Ravindra Singh
Pilibhit : उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले के पूरनपुर तहसील में शुक्रवार को उस वक्त भारी गहमागहमी देखने को मिली, जब संयुक्त किसान संगठनों के बैनर तले सैकड़ों किसान पुलिस क्षेत्राधिकारी (सीओ) कार्यालय के बाहर जमा हो गए। प्रशासन की वादाखिलाफी और गेहूं खरीद में हो रही देरी से नाराज किसानों ने न केवल कार्यालय का घेराव किया, बल्कि वहीं अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए। किसानों का आरोप है कि प्रशासन समस्याओं का समाधान करने के बजाय उन पर फर्जी मुकदमे लादकर उनकी आवाज दबाने की कोशिश कर रहा है।

Pilibhit 10 दिन बाद भी गेहूं खरीद ठप: क्रय केंद्रों पर पसरा सन्नाटा
किसानों के गुस्से की सबसे बड़ी वजह गेहूं की सरकारी खरीद शुरू न होना है। किसान नेताओं ने बताया कि शासन के आदेशानुसार 31 मार्च से ही क्रय केंद्रों पर खरीद प्रक्रिया शुरू हो जानी चाहिए थी। लेकिन आज 10 अप्रैल बीत जाने के बाद भी मंडियों में तौल का काम शुरू नहीं हो सका है। किसानों का कहना है कि उनकी फसल पककर तैयार है, लेकिन प्रशासनिक सुस्ती और ‘फार्मर रजिस्ट्री’ जैसे नए एवं पेचीदा नियमों के कारण वे अपनी उपज बेचने के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।

Pilibhit दमनकारी नीतियों के खिलाफ ‘गिरफ्तारी’ की मांग
आंदोलनकारी किसानों ने पुलिस और स्थानीय प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। किसानों का कहना है कि जब भी वे अपनी वाजिब मांगों को लेकर आवाज उठाते हैं, तो प्रशासन संवाद करने के बजाय किसान नेताओं पर फर्जी मुकदमे दर्ज कर देता है। पुलिस द्वारा गिरफ्तारी का भय दिखाकर आंदोलन को कुचलने की कोशिश की जा रही है। इसी के विरोध में बड़ी संख्या में किसान पदाधिकारियों ने “गिरफ्तारी दो” की मांग के साथ सीओ कार्यालय के गेट पर दरी बिछा दी और वहीं डट गए।

Pilibhit सुरक्षा का कड़ा घेरा: बड़े अधिकारियों से वार्ता पर अड़े किसान
प्रदर्शन की उग्रता को देखते हुए पूरनपुर तहसील परिसर और सीओ कार्यालय के आसपास सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम किए गए हैं। स्थिति को संभालने के लिए कई थानों की फोर्स तैनात की गई है। स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने किसानों को समझाने की कोशिश की, लेकिन किसान संगठनों ने दो टूक शब्दों में कह दिया है कि वे छोटे अधिकारियों से बात नहीं करेंगे। उनकी मांग है कि जिलाधिकारी (DM) और पुलिस अधीक्षक (SP) खुद मौके पर आएं और गेहूं खरीद की तत्काल शुरुआत एवं दर्ज मुकदमों की वापसी पर ठोस लिखित आश्वासन दें।
Pilibhit किसान संगठनों की चेतावनी: पीछे नहीं हटेंगे कदम
संयुक्त किसान संगठनों का कहना है कि जब तक उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं होता, तब तक यह घेराव और प्रदर्शन जारी रहेगा। किसानों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने तानाशाही रवैया नहीं छोड़ा, तो इस आंदोलन को और भी उग्र रूप दिया जाएगा और पूरे जनपद में चक्का जाम किया जाएगा। खबर लिखे जाने तक किसानों का धरना जारी था और वे अपनी मांगों को लेकर अडिग थे।
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