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by-Ravindra Sikarwar

मध्य प्रदेश: भिंड जिले के लहार विधानसभा क्षेत्र में बहुजन समाज पार्टी (BSP) के कार्यकर्ताओं ने पूना पैक्ट धिक्कार दिवस मनाया। इस अवसर पर BSP के राज्य समन्वयक दिलीप बौद्ध मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम में दलित समुदाय के अधिकारों और सामाजिक न्याय की मांग को प्रमुखता से उठाया गया, साथ ही 1932 के पूना पैक्ट की आलोचना की गई, जिसे दलित समुदाय के लिए ऐतिहासिक रूप से नुकसानदायक माना जाता है। यह प्रदर्शन सामाजिक समानता और दलित सशक्तीकरण के लिए BSP की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

पूना पैक्ट का ऐतिहासिक संदर्भ:
पूना पैक्ट 24 सितंबर 1932 को महात्मा गांधी और डॉ. बी. आर. अंबेडकर के बीच यरवदा जेल, पुणे में हस्ताक्षरित एक समझौता था। यह समझौता ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रस्तावित “कम्युनल अवार्ड” का जवाब था, जिसमें दलितों (तब “अनुसूचित जाति” कहे जाते थे) के लिए अलग निर्वाचक मंडल की व्यवस्था की गई थी। डॉ. अंबेडकर ने दलितों के लिए राजनीतिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए अलग निर्वाचक मंडल का समर्थन किया था, लेकिन गांधी ने इसका विरोध किया और आमरण अनशन शुरू कर दिया। इसके परिणामस्वरूप पूना पैक्ट हुआ, जिसमें अलग निर्वाचक मंडल की जगह संयुक्त निर्वाचक मंडल के साथ दलितों के लिए आरक्षित सीटों की व्यवस्था की गई।

BSP और कई दलित संगठन इस समझौते को दलित समुदाय के लिए नुकसानदायक मानते हैं, क्योंकि उनका विश्वास है कि इससे दलितों का स्वतंत्र राजनीतिक प्रतिनिधित्व कमजोर हुआ। पूना पैक्ट धिक्कार दिवस हर साल इस समझौते की आलोचना और दलित अधिकारों के लिए जागरूकता बढ़ाने के लिए मनाया जाता है।

लहार में BSP का प्रदर्शन:
लहार विधानसभा क्षेत्र में आयोजित इस कार्यक्रम में सैकड़ों BSP कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने हिस्सा लिया। दिलीप बौद्ध ने अपने संबोधन में पूना पैक्ट के ऐतिहासिक प्रभावों पर प्रकाश डाला और कहा कि यह समझौता दलित समुदाय के लिए एक “ऐतिहासिक अन्याय” था। उन्होंने जोर देकर कहा कि BSP डॉ. अंबेडकर के सिद्धांतों पर चलते हुए दलितों और अन्य वंचित समुदायों के लिए समानता और सम्मान की लड़ाई जारी रखेगी।

कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की और दलित सशक्तीकरण के लिए एकजुट होने का आह्वान किया। उन्होंने सामाजिक और आर्थिक असमानताओं को दूर करने के लिए सरकार से नीतिगत बदलावों की मांग की। प्रदर्शन के दौरान डॉ. अंबेडकर की तस्वीरों और बैनरों का उपयोग किया गया, जिसमें उनके विचारों और सामाजिक न्याय के संदेश को प्रमुखता दी गई।

दिलीप बौद्ध का संदेश:
राज्य समन्वयक दिलीप बौद्ध ने अपने भाषण में कहा, “पूना पैक्ट ने दलित समुदाय की स्वतंत्र आवाज को दबाने का काम किया। आज भी हमें सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक स्तर पर भेदभाव का सामना करना पड़ता है। BSP का लक्ष्य है कि हर वंचित व्यक्ति को उसका हक मिले और समाज में समानता स्थापित हो।” उन्होंने युवाओं से शिक्षा और संगठन के माध्यम से अपने अधिकारों के लिए लड़ने का आह्वान किया।

सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव:
यह प्रदर्शन मध्य प्रदेश में BSP की सक्रियता को दर्शाता है, खासकर भिंड जैसे क्षेत्रों में, जहां दलित समुदाय की आबादी महत्वपूर्ण है। लहार और आसपास के क्षेत्रों में दलित और अन्य पिछड़े समुदायों के बीच सामाजिक जागरूकता बढ़ाने में इस तरह के आयोजन महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह प्रदर्शन स्थानीय स्तर पर सामाजिक तनाव को भी उजागर करता है, क्योंकि पूना पैक्ट जैसे ऐतिहासिक मुद्दे आज भी समुदायों में चर्चा का विषय हैं।

BSP कार्यकर्ताओं ने यह भी मांग की कि सरकार दलित समुदाय के लिए शिक्षा, रोजगार, और राजनीतिक प्रतिनिधित्व में अधिक अवसर प्रदान करे। उन्होंने डॉ. अंबेडकर द्वारा प्रस्तावित मूल विचारों, जैसे कि अलग निर्वाचक मंडल, को फिर से विचार करने की आवश्यकता पर बल दिया।

स्थानीय समुदाय की प्रतिक्रिया:
लहार के स्थानीय निवासियों ने इस प्रदर्शन का समर्थन किया और इसे सामाजिक न्याय की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया। एक स्थानीय कार्यकर्ता, रमेश कुमार ने कहा, “यह आयोजन हमें अपने इतिहास को समझने और अपने अधिकारों के लिए लड़ने की प्रेरणा देता है। हम चाहते हैं कि हमारी भावी पीढ़ियां शिक्षित और सशक्त हों।” कुछ लोगों ने यह भी बताया कि इस तरह के आयोजन समुदाय में एकता को बढ़ावा देते हैं और युवाओं को सामाजिक मुद्दों पर जागरूक करते हैं।

निष्कर्ष:
भिंड के लहार में BSP द्वारा आयोजित पूना पैक्ट धिक्कार दिवस का प्रदर्शन दलित समुदाय के लिए सामाजिक और राजनीतिक जागरूकता का एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ। दिलीप बौद्ध के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने पूना पैक्ट की ऐतिहासिक आलोचना के साथ-साथ वर्तमान में दलित समुदाय के सामने आने वाली चुनौतियों पर प्रकाश डाला। यह आयोजन BSP की सक्रियता और डॉ. अंबेडकर के सिद्धांतों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह प्रदर्शन मध्य प्रदेश में सामाजिक समानता और न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।