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by-Ravindra Sikarwar

काठमांडू: नेपाल में चल रहे युवा-नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शनों ने प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली के इस्तीफे के बाद एक बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा कर दिया है। यह घटनाक्रम न केवल नेपाल की आंतरिक राजनीति के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि भारत-नेपाल संबंधों के लिए भी इसके संभावित निहितार्थों को लेकर भारत में करीब से नजर रखी जा रही है।

विरोध प्रदर्शन और प्रधानमंत्री का इस्तीफा:
हाल के हफ्तों में, नेपाल के विभिन्न शहरों में हजारों युवा सड़कों पर उतर आए थे। इन प्रदर्शनों का मुख्य कारण सरकार के खिलाफ बढ़ता असंतोष, भ्रष्टाचार के आरोप और आर्थिक कुप्रबंधन था। युवाओं का मानना था कि सरकार उनकी आकांक्षाओं को पूरा करने में विफल रही है। सोशल मीडिया पर शुरू हुए इन अभियानों ने जल्द ही देशव्यापी आंदोलन का रूप ले लिया।

यह आंदोलन इतना तेज और व्यापक था कि सरकार पर भारी दबाव बन गया। बढ़ते जनाक्रोश और अपनी ही पार्टी के भीतर से मिल रहे विरोध के बाद, प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली को आखिरकार पद से इस्तीफा देना पड़ा। उनके इस्तीफे को एक तरह से युवाओं की जीत और नेपाल की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत माना जा रहा है।

भारत पर संभावित प्रभाव:
भारत, नेपाल का एक महत्वपूर्ण पड़ोसी होने के नाते, इस पूरे घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रख रहा है। नेपाल में किसी भी तरह की राजनीतिक अस्थिरता का सीधा असर भारत-नेपाल संबंधों पर पड़ सकता है।

  1. कूटनीतिक संबंध: ओली सरकार के कार्यकाल में भारत के साथ संबंध कई बार तनावपूर्ण रहे थे, खासकर सीमा विवाद को लेकर। एक नई सरकार के गठन से इन संबंधों में सुधार या और भी जटिलता आने की संभावना है। भारत उम्मीद कर रहा है कि नई नेपाली सरकार के साथ द्विपक्षीय बातचीत और सहयोग के नए रास्ते खुलेंगे।
  2. सीमा सुरक्षा: नेपाल में अस्थिरता से सीमा पार गतिविधियों, जैसे तस्करी और घुसपैठ, में वृद्धि हो सकती है। भारत की सुरक्षा एजेंसियां इस पहलू पर विशेष ध्यान दे रही हैं।
  3. विकास परियोजनाएं: भारत नेपाल में कई बुनियादी ढांचा और विकास परियोजनाओं में निवेश कर रहा है। राजनीतिक बदलाव से इन परियोजनाओं की गति और भविष्य पर असर पड़ सकता है। नई सरकार की प्राथमिकताएं क्या होंगी, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

फिलहाल, नेपाल में एक अंतरिम सरकार का गठन किया गया है, और राजनीतिक दल अगली सरकार बनाने के लिए बातचीत कर रहे हैं। भारत और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय यह जानने के लिए उत्सुक हैं कि नेपाल का अगला नेतृत्व कौन संभालेगा और उसके भारत के साथ संबंधों की दिशा क्या होगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या युवा आंदोलन देश में एक स्थायी राजनीतिक बदलाव ला पाएगा।

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