by-Ravindra Sikarwar
केंद्र सरकार ने 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th Central Pay Commission) के लिए टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) यानी दायरे और कार्यक्षेत्र की आधिकारिक रूपरेखा को हाल ही में मंजूरी प्रदान कर दी है। यह आयोग संभवतः 1 जनवरी 2026 से प्रभावी होगा और केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के वेतन, भत्तों तथा सेवा शर्तों में संशोधन की सिफारिशें करेगा। हालांकि, इसकी घोषणा ने पेंशनभोगी समुदाय में गहरी नाराजगी पैदा कर दी है, क्योंकि ToR में स्पष्ट रूप से पेंशनर्स को बाहर रखा गया है। आइए इस पूरे मामले को विस्तार से समझते हैं।
ToR की मुख्य बातें और समयसीमा:
- मंजूरी की स्थिति: कैबिनेट सचिवालय के तहत कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने ToR को अंतिम रूप दिया है। यह दस्तावेज आयोग के गठन से पहले की औपचारिक प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसमें आयोग को क्या जांचना है, किन मुद्दों पर ध्यान देना है और किन क्षेत्रों को कवर करना है, यह निर्धारित किया जाता है।
- लागू होने की तारीख: परंपरागत रूप से वेतन आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी से लागू होती हैं। 7वां वेतन आयोग 1 जनवरी 2016 से प्रभावी हुआ था, इसलिए 8वें आयोग के लिए भी 1 जनवरी 2026 की तारीख प्रस्तावित है।
- कवरेज: ToR के अनुसार, आयोग मुख्य रूप से वर्तमान में सेवा दे रहे लगभग 50 लाख केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों (सिविलियन और कुछ रक्षा कर्मी) के लिए वेतन संरचना, महंगाई भत्ता (DA), हाउस रेंट अलाउंस (HRA), ट्रैवल अलाउंस (TA) और अन्य भत्तों की समीक्षा करेगा।
- बजट प्रभाव: अनुमान है कि नई सिफारिशों से सरकारी खजाने पर सालाना 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा, जो अर्थव्यवस्था की सेहत पर निर्भर करेगा।
पेंशनभोगियों को बाहर रखने का विवाद:
- कितने प्रभावित?: देश में करीब 69 लाख केंद्रीय पेंशनभोगी (रिटायर्ड कर्मचारी और परिवार पेंशन प्राप्तकर्ता) हैं। ToR में इनके लिए कोई प्रावधान नहीं है, जिससे पेंशन संशोधन की कोई उम्मीद नहीं बची।
- पेंशनर्स की मांग: नेशनल काउंसिल ऑफ ज्वाइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (JCM), भारतीय पेंशनर्स मंच और अन्य संगठनों ने तुरंत विरोध जताया है। उनका कहना है कि वेतन और पेंशन एक-दूसरे से जुड़े हैं – जैसे DA वेतन के साथ बढ़ता है, वैसे ही DR (Dearness Relief) पेंशन के साथ। यदि कर्मचारियों का वेतन बढ़ेगा, तो पेंशनर्स को स्वतः फायदा मिलना चाहिए।
- पिछले उदाहरण: 7वें वेतन आयोग में भी पेंशनर्स को शामिल किया गया था, और ‘वन रैंक वन पेंशन’ (OROP) जैसी योजनाएँ अलग से लागू हुईं। लेकिन इस बार ToR में पेंशन को अलग रखने से लगता है कि सरकार पेंशन संशोधन को अलग कमीशन या नीति के तहत देखेगी।
- संभावित कारण: सरकारी सूत्रों के अनुसार, पेंशनर्स की संख्या और बजट बोझ को देखते हुए इसे अलग रखा गया है। साथ ही, OROP-2 और अन्य पेंशन सुधार पहले से चल रहे हैं।
आयोग गठन और आगे की प्रक्रिया:
- गठन अभी बाकी: ToR मंजूर होने के बावजूद आयोग का औपचारिक गठन नहीं हुआ है। आमतौर पर एक सेवानिवृत्त जज या वरिष्ठ IAS अधिकारी को चेयरमैन बनाया जाता है, साथ में 2-3 सदस्य।
- समयसीमा: आयोग को 18-24 महीनों में रिपोर्ट सौंपनी होती है। यानी 2027-28 तक सिफारिशें आ सकती हैं, और लागू होने में और देरी हो सकती है।
- JCM की भूमिका: स्टाफ साइड (कर्मचारी संघ) ToR में बदलाव की मांग कर रही है। यदि दबाव बढ़ा, तो पेंशनर्स को शामिल करने पर पुनर्विचार हो सकता है।
- राज्य सरकारें: कई राज्य (जैसे राजस्थान, उत्तर प्रदेश) केंद्रीय आयोग की सिफारिशों को अपनाते हैं, इसलिए इसका असर राज्य कर्मचारियों और पेंशनर्स पर भी पड़ेगा।
कर्मचारियों और पेंशनर्स की प्रतिक्रिया:
- कर्मचारी खुश, लेकिन सतर्क: 50 लाख कर्मचारियों में उत्साह है, लेकिन फिटमेंट फैक्टर (वर्तमान में 2.57, अपेक्षा 3.0 या अधिक) और DA मर्जर जैसे मुद्दों पर अभी अनिश्चितता है।
- पेंशनर्स का आंदोलन: सोशल मीडिया और X (पूर्व ट्विटर) पर #IncludePensionersIn8thCPC ट्रेंड कर रहा है। कई पूर्व सैनिक और सिविल पेंशनर्स ने प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र लिखा है।
- विशेषज्ञ राय: अर्थशास्त्री कहते हैं कि पेंशनर्स को बाहर रखना अल्पकालिक बजट बचत दे सकता है, लेकिन दीर्घकाल में असंतोष बढ़ाएगा।
निष्कर्ष और भविष्य:
8वें वेतन आयोग का ToR मंजूर होना एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन पेंशनभोगियों को बाहर रखने से यह आधा-अधूरा लग रहा है। सरकार ने अभी तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं दिया कि पेंशन संशोधन कब और कैसे होगा। यदि JCM की मांगें मान ली गईं, तो ToR में संशोधन संभव है।
पेंशनर्स और कर्मचारी दोनों को सलाह है कि DoPT की वेबसाइट और आधिकारिक गजट नोटिफिकेशन पर नजर रखें। यह मामला अभी विकसित हो रहा है – जैसे ही आयोग गठित होगा या ToR में बदलाव आएगा, नई जानकारी सामने आएगी।
यह मुद्दा न केवल आर्थिक है, बल्कि लाखों परिवारों की आजीविका से जुड़ा है।
