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by-Ravindra Sikarwar

नई दिल्ली: संसद के मॉनसून सत्र के दौरान आज एक बार फिर भारी हंगामे और विरोध प्रदर्शनों के चलते लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही बाधित हुई। विपक्षी दलों के सांसदों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर नारेबाजी की, जिसके कारण सदन की कार्यवाही को कई बार स्थगित करना पड़ा और अंततः दिन भर के लिए स्थगित कर दिया गया।

लोकसभा में हंगामा:
सुबह 11 बजे लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसद अपनी सीटों से उठकर वेल में आ गए। वे हाथों में तख्तियां लिए हुए थे और मणिपुर हिंसा, महंगाई और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर तत्काल चर्चा की मांग कर रहे थे। अध्यक्ष ओम बिरला ने सांसदों से अपनी सीटों पर वापस जाने और प्रश्नकाल चलने देने का आग्रह किया, लेकिन उनकी अपील का कोई असर नहीं हुआ।

लगातार हो रहे हंगामे के बीच अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही को दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया। जब कार्यवाही फिर से शुरू हुई, तो स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। विपक्षी सांसदों ने सरकार के खिलाफ नारे लगाना जारी रखा, जिसके बाद अध्यक्ष ने सदन को पूरे दिन के लिए स्थगित करने की घोषणा की।

राज्यसभा में भी यही हाल:
राज्यसभा में भी सुबह से ही तनाव का माहौल था। विपक्षी नेता सदन में चर्चा के लिए नियम 267 के तहत नोटिस दे रहे थे, जिसमें सभी पूर्व निर्धारित कार्यों को रोककर मणिपुर की स्थिति पर तत्काल बहस की मांग की गई थी। सभापति जगदीप धनखड़ ने इन नोटिसों को स्वीकार नहीं किया, जिसके बाद विपक्षी सांसद विरोध में खड़े हो गए।

सांसदों ने ‘मणिपुर, मणिपुर’ और ‘हमें न्याय चाहिए’ जैसे नारे लगाए। हंगामे को देखते हुए, सभापति ने पहले सदन को 12 बजे तक के लिए स्थगित किया। जब कार्यवाही दोबारा शुरू हुई, तो भी स्थिति शांत नहीं हुई। सभापति ने बार-बार सांसदों से शांति बनाए रखने और सदन की गरिमा बनाए रखने की अपील की, लेकिन उनका आग्रह व्यर्थ रहा। अंततः, उन्होंने सदन को दिन भर के लिए स्थगित कर दिया।

दोनों सदनों में जारी इस गतिरोध से यह स्पष्ट है कि सरकार और विपक्ष के बीच महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति नहीं बन पा रही है, जिसका सीधा असर संसद के कामकाज पर पड़ रहा है।