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by-Ravindra Sikarwar

काबुल: पाकिस्तान ने 17 अक्टूबर 2025 की रात को अफगानिस्तान के पक्तिका प्रांत में हवाई हमले किए, जिसमें कम से कम 10 नागरिकों की मौत हो गई, जिसमें दो बच्चे और तीन अफगान क्रिकेटर शामिल हैं। यह हमला उस समय हुआ जब दोनों देशों ने 48 घंटे के संघर्ष विराम को दोहा वार्ता के समापन तक बढ़ाने पर सहमति जताई थी। तालिबान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि पाकिस्तान ने युद्धविराम तोड़ दिया है और अफगानिस्तान इसका जवाब देगा। इस घटना ने दोनों पड़ोसी देशों के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है, जो पहले से ही सीमा पर झड़पों से जूझ रहे हैं।

इस संघर्ष की पृष्ठभूमि लंबे समय से चली आ रही है। पाकिस्तान का आरोप है कि अफगानिस्तान टीटीपी (तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान) जैसे उग्रवादी समूहों को शरण दे रहा है, जो पाकिस्तान में हमले कर रहे हैं। काबुल इन आरोपों से इनकार करता है। 2025 में यह संघर्ष 9 अक्टूबर को शुरू हुआ, जब पाकिस्तान ने काबुल, खोस्त, जलालाबाद और पक्तिका में हवाई हमले किए, जिनमें टीटीपी के दो वरिष्ठ सदस्य मारे गए। टीटीपी नेता नूर वाली मेहसूद हमले में बाल-बाल बच गए। इसके जवाब में तालिबान ने 11 अक्टूबर को पाकिस्तानी सैन्य चौकियों पर हमला किया और एकतरफा युद्धविराम की घोषणा की, जिसे पाकिस्तान ने अस्वीकार कर दिया।

12 अक्टूबर को पाकिस्तानी ड्रोन हमलों में कंधार और हेलमंद में 19 तालिबान लड़ाके मारे गए, जिसमें कमांडर हाजी नुसरत भी शामिल थे। तालिबान ने दावा किया कि उन्होंने 58 पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया और 25 चौकियां कब्जे में लीं। पाकिस्तान ने इसका खंडन करते हुए कहा कि उसने 21 अफगान चौकियां कब्जे में लीं। 14-15 अक्टूबर को कुर्रम के पास झड़पें हुईं, जिसमें दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर हमले का आरोप लगाया। 15 अक्टूबर को स्पिन बोल्डक में हमलों में 12 अफगान नागरिक मारे गए और 100 से अधिक घायल हुए। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, 16 अक्टूबर तक 37 नागरिक मारे गए और 425 घायल हुए।

15 अक्टूबर को दोनों पक्षों ने 48 घंटे का युद्धविराम घोषित किया, जिसे 17 अक्टूबर को दोहा वार्ता तक बढ़ाया गया। लेकिन कुछ ही घंटों बाद, पाकिस्तान ने पक्तिका के अरगुन और बर्मल जिलों में हमले किए, जिसमें कई घर नष्ट हो गए। एक प्रांतीय अस्पताल अधिकारी ने बताया कि हमलों में 10 नागरिक मारे गए और 12 घायल हुए। मारे गए लोगों में उरगुन जिले के तीन क्रिकेटर थे, जो एक दोस्ताना मैच खेलकर लौट रहे थे। अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड (एसीबी) ने इसे बड़ा नुकसान बताया और पाकिस्तान व श्रीलंका के साथ त्रिकोणीय श्रृंखला से हटने की घोषणा की।

तालिबान प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा कि अगर पाकिस्तान हमला करेगा तो अफगानिस्तान को अपना बचाव करने का पूरा हक है। पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ ने काबुल को “भारत का प्रॉक्सी” बताया और कहा कि अब राजनयिक अपील नहीं की जाएगी, बल्कि आतंकवाद के स्रोत को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। पाकिस्तानी विदेश कार्यालय के प्रवक्ता शफकत अली खान ने कहा कि पाकिस्तान को अफगानिस्तान से आतंकवादी तत्वों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की उम्मीद है। 17 अक्टूबर को उत्तर वजीरिस्तान में पाकिस्तानी सैन्य शिविर पर हमले में सात सैनिक मारे गए, जिसकी जिम्मेदारी टीटीपी ने ली।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाओं में ईरान, सऊदी अरब, कतर और रूस ने संयम बरतने की अपील की। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मध्यस्थता की पेशकश की। भारत ने अफगानिस्तान की संप्रभुता का समर्थन किया और पाकिस्तान पर आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। संयुक्त राष्ट्र ने दोनों पक्षों से स्थायी शांति की मांग की।

स्पिन बोल्डक के निवासियों ने युद्धविराम के दौरान सामान्य जीवन की वापसी की बात कही, लेकिन हिंसा की वापसी से डर जताया। अफगान क्रिकेटर राशिद खान, फजलहक फारूकी और मोहम्मद नबी ने हमलों की निंदा की और इसे अफगान क्रिकेट परिवार के लिए बड़ा झटका बताया। यह घटना दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों को और बिगाड़ सकती है, जहां सीमा पर तनाव लगातार बढ़ रहा है।

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