by-Ravindra Sikarwar
नई दिल्ली: भारत सरकार ने हवाई यातायात की सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से मुंबई के आसपास के हवाई क्षेत्र में संभावित जीपीएस सिग्नल हस्तक्षेप या नुकसान की आशंका जताते हुए एक महत्वपूर्ण नोटिस टू एयरमेन (नोटाम) जारी किया है। यह अलर्ट 13 नवंबर से 17 नवंबर 2025 तक प्रभावी रहेगा और विशेष रूप से मुंबई फ्लाइट इंफॉर्मेशन रीजन (एफआईआर) के भीतर एल639 और पी574 नामक दो प्रमुख हवाई यातायात सेवा (एटीएस) मार्गों पर लागू होगा। यह कदम हाल ही में दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (आईजीआईए) के आसपास दर्ज की गई समान घटनाओं के बाद उठाया गया है, जहां जीपीएस सिग्नल में बाधा का सामना करना पड़ा था। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने विमान चालकों, एयरलाइनों और हवाई यातायात नियंत्रकों को इस खतरे से अवगत कराते हुए सतर्क रहने का निर्देश दिया है।
नोटाम के पीछे का संदर्भ और कारण:
नोटाम एक आधिकारिक सूचना प्रणाली है, जो हवाई अड्डों, सेवाओं, प्रक्रियाओं या खतरों में किसी भी बदलाव या स्थापना के बारे में तत्काल जानकारी प्रदान करती है। एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) के अनुसार, यह सूचना हवाई संचालन से जुड़े सभी कर्मियों के लिए आवश्यक होती है। इस विशेष नोटाम को जारी करने का मुख्य कारण जीपीएस नेविगेशन सिस्टम में संभावित व्यवधान है, जो सैटेलाइट-आधारित नेविगेशन को प्रभावित कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह हस्तक्षेप जियो-स्पूफिंग (भौगोलिक धोखाधड़ी) या साइबर हमलों के रूप में हो सकता है, जो हाल के वर्षों में वैश्विक स्तर पर बढ़ रहा है।
यह चेतावनी दिल्ली में हुई घटनाओं से प्रेरित है। दिल्ली के व्यस्ततम हवाई अड्डे आईजीआईए पर, जहां प्रतिदिन 1,500 से अधिक उड़ानें संचालित होती हैं, कई जीपीएस हस्तक्षेप के मामले सामने आए थे। इन घटनाओं ने पायलटों को पारंपरिक नेविगेशन विधियों पर निर्भर रहने के लिए मजबूर किया। 11 नवंबर 2025 को डीजीसीए ने एक आदेश जारी कर एयरलाइनों, पायलटों और एटीसी को जीपीएस स्पूफिंग या हस्तक्षेप की घटनाओं की रिपोर्ट 10 मिनट के अंदर अनिवार्य कर दी थी। इसी श्रृंखला में, मुंबई के लिए नोटाम जारी किया गया, जो देश के व्यस्त हवाई क्षेत्रों में सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक सतर्क कदम है। जियो-इंटेलिजेंस विशेषज्ञ डेमियन साइमन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी साझा करते हुए कहा, “भारत ने मुंबई के पास हवाई यातायात मार्गों पर जीपीएस हस्तक्षेप/नुकसान की चेतावनी वाले नोटाम जारी किया है, जो दिल्ली के आसपास की समान रिपोर्टों के बाद आया है।”
प्रभावित क्षेत्र और संभावित जोखिम:
मुंबई फ्लाइट इंफॉर्मेशन रीजन (एफआईआर) भारत के पश्चिमी तट पर एक विस्तृत हवाई क्षेत्र है, जो चत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (सीएसएमआईए) को कवर करता है। यह क्षेत्र एल639 (यूरोप से एशिया की ओर जाने वाले मार्ग) और पी574 (दक्षिण-पूर्व एशिया से जुड़ने वाले) जैसे व्यस्त एटीएस रूट्स से होकर गुजरता है। इन मार्गों पर उड़ान भरने वाले विमानों को जीपीएस सिग्नल में कमी या विकृति का सामना करना पड़ सकता है, जिससे नेविगेशन में गड़बड़ी हो सकती है।
संभावित जोखिमों में शामिल हैं:
- नेविगेशन त्रुटियां: जीपीएस सिग्नल खोने से पायलटों को वैकल्पिक सिस्टम जैसे वीओआर (व्हरी फ्रीक्वेंसी ओम्नीडायरेक्शनल रेंज) या आईएलएस (इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम) का उपयोग करना पड़ सकता है।
- उड़ान विलंब: हवाई यातायात में वृद्धि के कारण, विशेष रूप से पीक घंटों में, देरी की आशंका है। हाल ही में दिल्ली में इसी तरह की गड़बड़ी से उड़ानें प्रभावित हुई थीं।
- सुरक्षा खतरे: साइबर हमलों से प्रेरित हस्तक्षेप विमानों की दिशा भटकाने या टकराव का जोखिम पैदा कर सकता है।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अरब सागर के ऊपर, पाकिस्तान के निकट उड़ानों के लिए भी समान जोखिम हो सकता है, जैसा कि हाल के एक वीडियो रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है।
डीजीसीए के उपाय और पायलटों के लिए निर्देश:
डीजीसीए ने जीपीएस हस्तक्षेप से निपटने के लिए एक वास्तविक समय निगरानी प्रणाली स्थापित करने की शुरुआत की है, जो किसी भी घटना का तुरंत पता लगाने और प्रतिक्रिया देने में सक्षम होगी। पायलटों को निम्नलिखित सलाह दी गई है:
- उड़ान से पहले नोटाम की जांच अनिवार्य रूप से करें।
- जीपीएस सिग्नल में किसी भी असामान्य व्यवहार का तुरंत रिपोर्ट करें।
- बैकअप नेविगेशन उपकरणों का उपयोग करें और ऊंचाई, गति तथा दिशा पर अतिरिक्त सतर्कता बरतें।
- यदि सिग्नल हानि हो, तो तत्काल एटीसी से संपर्क करें।
इसके अलावा, एयरलाइनों को अपने चालक दल को विशेष प्रशिक्षण प्रदान करने का निर्देश दिया गया है। मुंबई हवाई अड्डा प्रशासन ने भी यात्रियों को संभावित देरी की जानकारी दी है और वैकल्पिक योजनाओं की सलाह दी है।
व्यापक संदर्भ: वैश्विक और राष्ट्रीय चुनौतियां
यह नोटाम भारत की बढ़ती साइबर सुरक्षा चिंताओं को दर्शाता है। हाल ही में 30 अक्टूबर से 10 नवंबर 2025 तक एक अन्य नोटाम जारी किया गया था, जो त्रिशूल अभ्यास (एक त्रि-सेवा सैन्य व्यायाम) से पहले था। विशेषज्ञों का कहना है कि जीपीएस हस्तक्षेप अक्सर सैन्य या दुश्मन गतिविधियों से जुड़ा होता है, लेकिन सिविल उड्डयन पर इसका असर न्यूनतम रखने के लिए सतर्कता जरूरी है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, यूक्रेन-रूस संघर्ष के दौरान इसी तरह के हस्तक्षेप देखे गए थे, जो भारत के लिए एक सबक है।
यात्रियों और हितधारकों के लिए सुझाव:
यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे उड़ान से पहले एयरलाइन ऐप्स या एएआई वेबसाइट पर अपडेट जांचें। यदि मुंबई से या उसके आसपास उड़ान है, तो अतिरिक्त समय रखें। अधिक जानकारी के लिए डीजीसीए हेल्पलाइन या आधिकारिक पोर्टल aim-india.aai.aero/notam-summaries पर जाएं।
यह नोटाम जारी होना हवाई सुरक्षा के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है, लेकिन साथ ही साइबर खतरों के बढ़ते खतरे की याद दिलाता है। अधिकारी पूरे सतर्कता के साथ स्थिति पर नजर रखे हुए हैं, ताकि यात्री सुरक्षित यात्रा कर सकें।
