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By: Ravindra Sikarwar

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने हाल ही में एक साक्षात्कार में भारत की सांस्कृतिक और भाषाई विविधता की खुलकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का एक अनोखा उदाहरण है जहां सैकड़ों भाषाएं, अलग-अलग धर्म, जातियां और परंपराएं होने के बावजूद लोग एक राष्ट्र के रूप में मजबूती से जुड़े हुए हैं। पुतिन ने खास तौर पर यह बात कही कि “भारत में सभी लोग हिंदी नहीं बोलते, बहुत से लोग अंग्रेजी भी नहीं जानते, लेकिन फिर भी वे एक देश के रूप में एकजुट हैं। यह अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है।”

यह बयान पुतिन ने रूस के सरकारी चैनल ‘रॉसिया-1’ को दिए इंटरव्यू में दिया। जब उनसे पूछा गया कि रूस और भारत के रिश्तों की मजबूती का राज क्या है, तो उन्होंने कहा, “भारत और रूस दोनों ही बहु-सांस्कृतिक, बहु-जातीय और बहु-धार्मिक देश हैं। हम दोनों ही जानते हैं कि विविधता को कैसे संभाला जाता है। भारत ने दिखाया है कि अलग-अलग भाषाएं बोलने वाले लोग भी एक झंडे के नीचे गर्व से खड़े हो सकते हैं।”

पुतिन ने यह भी बताया कि भारत में 22 आधिकारिक भाषाएं हैं और सैकड़ों बोलियां प्रचलित हैं। उन्होंने हंसते हुए कहा, “मैंने सुना है कि भारत में एक ही राज्य में कई बार पड़ोसी गांव के लोग एक-दूसरे की बोली भी नहीं समझते। लेकिन फिर भी भारतीय अपने आपको पहले भारतीय मानते हैं। यह बात दुनिया के बहुत से देशों के लिए सबक है जो अपनी छोटी-सी विविधता से ही घबरा जाते हैं।”

रूसी राष्ट्रपति ने भारत की संघीय व्यवस्था की भी प्रशंसा की। उनका कहना था कि भारत ने राज्यों को इतनी स्वायत्तता दी है कि हर राज्य अपनी भाषा, अपनी संस्कृति और अपनी पहचान को जीवित रख सकता है, फिर भी राष्ट्रीय एकता पर कोई आंच नहीं आती। उन्होंने तमिलनाडु, बंगाल, पंजाब और केरल जैसे राज्यों का उदाहरण देते हुए कहा कि ये राज्य अपनी क्षेत्रीय भाषाओं में गर्व करते हैं, लेकिन जब देश की बात आती है तो सब एक साथ खड़े हो जाते हैं।

पुतिन ने 2014 के क्राइमिया संकट का जिक्र करते हुए कहा कि उस वक्त भी भारत ने रूस की स्थिति को समझा क्योंकि भारत खुद जानता है कि कभी-कभी क्षेत्रीय भावनाओं और राष्ट्रीय हितों के बीच संतुलन बनाना पड़ता है। उन्होंने कहा, “भारत ने कभी हम पर पश्चिमी देशों की तरह दबाव नहीं डाला। उसने हमारी स्थिति को समझा और अपना स्वतंत्र रुख रखा। यह दोस्ती की असली मिसाल है।”

इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी खूब चर्चा हुई। कई भारतीय यूजर्स ने पुतिन को धन्यवाद कहा और लिखा कि एक विदेशी राष्ट्राध्यक्ष ने हमारी विविधता की जो तारीफ की, वह हम खुद कभी-कभी भूल जाते हैं। कुछ लोगों ने लिखा कि जब हम आपस में भाषा के नाम पर लड़ते हैं, तब एक रूसी नेता हमें हमारी ताकत याद दिला रहा है।

दरअसल, भारत में भाषाई विवाद कोई नई बात नहीं है। हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने की पुरानी मांग से लेकर आजकल की ‘हिंदी थोपने’ वाली बहस तक, कई बार क्षेत्रीय भावनाएं उबाल पर आ जाती हैं। लेकिन पुतिन का यह बयान एक आईना है कि दुनिया भारत को किस नजर से देखती है – एक ऐसे देश के रूप में जो अपनी विविधता को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाता है, न कि कमजोरी।

विशेषज्ञों का भी मानना है कि पुतिन ने जिस ‘विविधता में एकता’ की बात की, वह भारत की विदेश नीति की भी बुनियाद है। यही कारण है कि भारत रूस के साथ पुराने रिश्ते भी निभाता है और अमेरिका-यूरोप के साथ नए समीकरण भी बनाता है। यह लचीलापन और संतुलन ही भारत को वैश्विक मंच पर अलग पहचान देता है।

पुतिन के इस बयान ने एक बार फिर साबित कर दिया कि भारत और रूस के बीच रिश्ते सिर्फ हथियारों या तेल-गैस के व्यापार तक सीमित नहीं हैं। यह दो सभ्यताओं का वह जुड़ाव है जो एक-दूसरे की आत्मा को समझता है। रूसी राष्ट्रपति की यह टिप्पणी न सिर्फ कूटनीतिक थी, बल्कि दिल से निकली हुई लगती है। शायद यही कारण है कि यह भारत के लाखों लोगों के दिल तक पहुंच गई।

आज जब दुनिया के कई देश जातीयता, भाषा और धर्म के नाम पर बंट रहे हैं, पुतिन का यह बयान भारत के लिए एक गर्व का क्षण है। यह याद दिलाता है कि हमारी विविधता हमारी कमजोरी नहीं, हमारी सबसे बड़ी शक्ति है। जैसे पुतिन ने कहा – “सब हिंदी नहीं बोलते, लेकिन सब भारतीय हैं।” यही तो भारत की असली पहचान है।