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New Delhi : पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और ईरान के साथ जारी संघर्ष के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर एक सकारात्मक खबर सामने आई है। खाड़ी क्षेत्र में असुरक्षा को देखते हुए दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यातक सऊदी अरब ने भारत को कच्चे तेल की आपूर्ति के लिए पारंपरिक ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) के बजाय लाल सागर (Red Sea) मार्ग का उपयोग करना शुरू कर दिया है।

यह रणनीतिक बदलाव ऐसे समय में किया गया है जब ईरान समर्थित हमलों के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

होर्मुज स्ट्रेट पर गहराता खतरा और भारत की चिंता

New Delhi आमतौर पर दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। भारत के लिए भी अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने का यह सबसे प्रमुख समुद्री मार्ग रहा है। हालांकि, हाल के दिनों में मध्य पूर्व में जारी मिसाइल और ड्रोन हमलों ने इस संकरे समुद्री रास्ते को जहाजों के लिए बेहद असुरक्षित बना दिया है। यदि यह मार्ग पूरी तरह बाधित होता है, तो भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल और आपूर्ति में कमी का बड़ा जोखिम पैदा हो सकता है।

लाल सागर मार्ग: वैकल्पिक सप्लाई चेन की शुरुआत

New Delhi शिपिंग ट्रैकिंग डेटा (Kpler) के अनुसार, सऊदी अरब के यानबू (Yanbu) बंदरगाह से कई तेल टैंकर भारत के लिए रवाना हो चुके हैं। वर्तमान में लगभग 60 लाख बैरल तेल से लदे चार बड़े टैंकर भारतीय तटों की ओर बढ़ रहे हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि मार्च महीने के अंत तक इस मार्ग से करीब 1 करोड़ बैरल अतिरिक्त तेल भारत पहुंचेगा।

यह सप्लाई सऊदी अरब की उस 1200 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन के जरिए संभव हो पा रही है जो देश के पूर्वी तेल क्षेत्रों को लाल सागर के तट पर स्थित यानबू पोर्ट से जोड़ती है। यह वैकल्पिक मार्ग होर्मुज स्ट्रेट की किसी भी संभावित नाकाबंदी की स्थिति में भारत के लिए ‘लाइफलाइन’ साबित हो सकता है।

चुनौतियाँ और सीमित क्षमता का जोखिम

New Delhi हालांकि लाल सागर का मार्ग एक बड़ी राहत लेकर आया है, लेकिन यह पूरी तरह जोखिम मुक्त नहीं है। इस मार्ग की अपनी सीमाएं और खतरे हैं:

  • सीमित पाइपलाइन क्षमता: यानबू तक जाने वाली पाइपलाइन की क्षमता इतनी अधिक नहीं है कि वह होर्मुज मार्ग से होने वाले पूरे तेल निर्यात की जगह ले सके। इसलिए, यह केवल एक आंशिक समाधान ही प्रदान करता है।
  • हूती विद्रोहियों का डर: लाल सागर मार्ग ‘बाब अल-मंदाब’ जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है, जहाँ यमन के ईरान समर्थक हूती विद्रोही सक्रिय हैं। इजरायल-हमास संघर्ष के दौरान हूतियों ने इस क्षेत्र में कई व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाया है।
  • महंगा परिवहन: सुरक्षा कारणों से यदि जहाजों को अपना रास्ता बदलना पड़ता है या अतिरिक्त सुरक्षा लेनी पड़ती है, तो इससे माल ढुलाई की लागत बढ़ जाती है, जिसका सीधा असर तेल की कीमतों पर पड़ सकता है।

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