Report by: Rishav Kumar
Nawada : बिहार के नवादा जिले में अवैध चिकित्सा केंद्रों का मकड़जाल अब मासूमों की जान का दुश्मन बनने लगा है। ताज़ा मामला रोह प्रखंड के सिऊर रोड का है, जहाँ एक निजी स्कूल के परिसर में चोरी-छिपे संचालित हो रहे नर्सिंग होम में प्रसव के दौरान जच्चा और बच्चा दोनों की मौत हो गई। इस हृदयविदारक घटना के बाद मृतक के परिजनों में भारी आक्रोश व्याप्त है, वहीं आरोपी संचालक और कर्मचारी फरार बताए जा रहे हैं।
Nawada स्कूल में ‘मौत’ का क्लिनिक: लापरवाही की हद
जानकारी के अनुसार, मृतक महिला की पहचान कादिरगंज थाना क्षेत्र के मायाबीघा गांव निवासी पवन यादव की पत्नी प्रीति देवी के रूप में हुई है। परिजनों ने बताया कि प्रसव पीड़ा होने पर उन्हें सिऊर रोड स्थित इस नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया था।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यह तथाकथित नर्सिंग होम एक निजी स्कूल के परिसर में चलाया जा रहा था। यहाँ न तो प्रशिक्षित डॉक्टर मौजूद थे और न ही आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए कोई जीवन रक्षक उपकरण। ऑपरेशन या प्रसव के दौरान हुई गंभीर लापरवाही के कारण प्रीति देवी और उनके नवजात शिशु ने दम तोड़ दिया।
Nawada परिजनों का हंगामा और पुलिस की कार्रवाई
जच्चा-बच्चा की मौत की खबर मिलते ही परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की।
- पुलिसिया जांच: सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुँची और आक्रोशित लोगों को शांत कराया। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
- जांच के बिंदु: पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि एक स्कूल परिसर के भीतर चिकित्सा सुविधा संचालित करने की अनुमति किसने दी और इस अवैध धंधे का मुख्य संचालक कौन है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए हर पहलू पर छानबीन शुरू कर दी है।
Nawada में अवैध नर्सिंग होम का फलता-फूलता कारोबार
यह घटना जिले में कुकुरमुत्ते की तरह उगे अवैध नर्सिंग होम और बिना लाइसेंस के चल रहे अल्ट्रासाउंड केंद्रों की हकीकत बयां करती है।
- प्रशासनिक उदासीनता: स्थानीय लोगों का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की नाक के नीचे ऐसे दर्जनों केंद्र चल रहे हैं। बिना वैध लाइसेंस और डिग्री के ये झोलाछाप डॉक्टर लोगों के जीवन से खिलवाड़ कर रहे हैं, लेकिन उन पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं होती।
- उठते सवाल: क्या स्वास्थ्य विभाग को स्कूल परिसर में चल रहे इस अवैध नर्सिंग होम की भनक नहीं थी? या फिर किसी मिलीभगत के तहत इन पर कार्रवाई करने से बचा जा रहा है?
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