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by-Ravindra Sikarwar

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने बांधवगढ़ ‘दर्शन यात्रा’ को लेकर राज्य सरकार को कड़ी चेतावनी दी है। एनजीटी ने मध्य प्रदेश के अधिकारियों को बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के मुख्य क्षेत्र (कोर एरिया) में हर साल होने वाली ‘दर्शन यात्रा’ की अनुमति देने के लिए फटकार लगाई है। एनजीटी ने आगाह किया है कि इस तरह के बड़े आयोजन संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसके साथ ही, उसने राज्य सरकार को इन आयोजनों को विनियमित करने के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) को अंतिम रूप देने का निर्देश दिया है।

एनजीटी की चिंताएं:
एनजीटी की पीठ ने कहा कि यह यात्रा, जिसमें हजारों की संख्या में लोग शामिल होते हैं, बाघों और अन्य वन्यजीवों के आवास के लिए गंभीर खतरा है। पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि कोर एरिया में इस तरह की गतिविधियों की अनुमति देना वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 का उल्लंघन है। एनजीटी ने विशेष रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर चिंता व्यक्त की:

  • जैव विविधता पर खतरा: बड़े वाहनों का प्रवेश और शोरगुल वन्यजीवों को परेशान करता है, जिससे उनके व्यवहार और प्रजनन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
  • प्रदूषण: यात्रा के दौरान प्लास्टिक, भोजन के अवशेष और अन्य कचरा वन्यजीवों के लिए खतरा पैदा करता है और पर्यावरण को प्रदूषित करता है।
  • अवैध गतिविधियां: बड़े समूहों की आड़ में अवैध शिकार या अन्य गैर-कानूनी गतिविधियां हो सकती हैं।

पृष्ठभूमि: क्या है ‘दर्शन यात्रा’?
यह ‘दर्शन यात्रा’ हर साल महाशिवरात्रि के पर्व पर आयोजित होती है, जिसमें भक्त बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के अंदर स्थित एक प्राचीन शिव मंदिर में पूजा करने के लिए आते हैं। यह मंदिर सदियों पुराना है और स्थानीय लोगों में इसकी गहरी आस्था है। इसी आस्था के कारण, बड़ी संख्या में लोग पैदल और वाहनों से कोर एरिया से होकर गुजरते हैं।

आगे का रास्ता:
एनजीटी ने मध्य प्रदेश सरकार को एक सख्त एसओपी तैयार करने का आदेश दिया है, जिसमें निम्नलिखित बिंदुओं को शामिल किया जाना चाहिए:

  • यात्रियों की संख्या को सीमित करना: यात्रा में भाग लेने वाले लोगों की संख्या पर सख्त सीमा लगाई जाए।
  • वाहन प्रतिबंध: कोर एरिया में वाहनों के प्रवेश पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया जाए।
  • मार्ग परिवर्तन: यात्रा के लिए एक वैकल्पिक मार्ग निर्धारित किया जाए, जो कोर एरिया के बाहर से होकर गुजरे।
  • सफाई और निगरानी: यात्रा के दौरान और उसके बाद सफाई सुनिश्चित करने के लिए सख्त उपाय किए जाएं।

एनजीटी ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि राज्य सरकार इन निर्देशों का पालन करने में विफल रहती है, तो वह सख्त कार्रवाई करेगी। यह फैसला पर्यावरण संरक्षण और धार्मिक आस्था के बीच संतुलन बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।