MP and UPMP and UP
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Report by: Ravindra Singh

MP and UP : मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने वाराणसी प्रवास के दौरान उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश के बीच सांस्कृतिक और प्रशासनिक संबंधों को एक नई ऊंचाई दी है। “विरासत के साथ विकास” के मंत्र को दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि दोनों राज्य सुशासन और धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में एक साझा संस्कृति विकसित कर रहे हैं। बाबा विश्वनाथ की नगरी में डॉ. यादव ने न केवल दर्शन-पूजन किया, बल्कि भविष्य के बड़े आयोजनों के लिए दोनों राज्यों के बीच समन्वय का रोडमैप भी तैयार किया।

काशी-महाकाल के बीच ‘डिजिटल संगम’: सुविधाओं के लिए होगा MOU

MP and UP मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्री काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर के भ्रमण के दौरान एक महत्वपूर्ण निर्णय की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बाबा विश्वनाथ (वाराणसी) और बाबा महाकाल (उज्जैन) के धामों के बीच व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए एक एमओयू (MOU) किया जा रहा है।

  • उद्देश्य: इस समझौते का मुख्य लक्ष्य दोनों ज्योतिर्लिंगों के दर्शनार्थियों को सुगम और विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
  • सूचनाओं का आदान-प्रदान: दोनों मंदिर ट्रस्ट आपस में सूचनाओं और प्रबंधन की तकनीकों को साझा करेंगे।
  • श्रद्धांजलि: भ्रमण के दौरान मुख्यमंत्री ने परिसर में स्थित लोकमाता अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया।

सिंहस्थ-2028 के लिए काशी मॉडल से प्रबंधन की सीख

MP and UP उज्जैन में होने वाले आगामी सिंहस्थ-2028 की तैयारियों को लेकर मुख्यमंत्री ने काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट के साथ उच्च स्तरीय बैठक की। इस बैठक में प्रेजेंटेशन के माध्यम से तीर्थयात्री प्रबंधन के आधुनिक तौर-तरीकों को समझा गया:

  1. स्मार्ट मैनेजमेंट: मोबाइल ऐप आधारित टोकन सिस्टम और रियल टाइम सीसीटीवी मॉनिटरिंग।
  2. भीड़ नियंत्रण: जोन-बेस्ड क्राउड कंट्रोल और सुरक्षा प्रोटोकॉल की एसओपी (SOP) का बारीकी से अध्ययन।
  3. स्वच्छता: काशी कॉरिडोर में लागू स्वच्छता के आधुनिक मॉडल को उज्जैन में भी अपनाने पर चर्चा हुई। डॉ. यादव ने स्पष्ट किया कि प्रयागराज कुंभ और काशी के अनुभवों का लाभ उठाकर उज्जैन में श्रद्धालुओं के लिए दूरगामी और सुगम योजनाएं तैयार की जा रही हैं।

वाराणसी में ‘सम्राट विक्रमादित्य’ महानाट्य का भव्य मंचन

MP and UP सांस्कृतिक आदान-प्रदान की कड़ी में उज्जैन के चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य की गौरव गाथा अब काशी की धरती पर गूंजेगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि आगामी 3 से 5 अप्रैल तक वाराणसी में एक विशाल महानाट्य का आयोजन किया जा रहा है।

  • भव्यता: इस मंचन में सैकड़ों कलाकार हिस्सा लेंगे। जीवंत प्रदर्शन के लिए इसमें हाथी, घोड़े और ऊंटों का भी उपयोग किया जाएगा।
  • उद्देश्य: सम्राट विक्रमादित्य के सुशासन और न्यायप्रियता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना।
  • सहयोग: इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने केन-बेतवा लिंक परियोजना का उल्लेख करते हुए बताया कि कैसे यह योजना दोनों राज्यों के किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण का मार्ग प्रशस्त कर रही है।

इस महत्वपूर्ण भ्रमण के दौरान उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री श्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’ और श्री राकेश सचान सहित मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।

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