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By: Ravindra Sikarwar

मुरैना: शादी की चमक-धमक और हंसी-खुशी का माहौल उस वक्त मातम में बदल गया, जब बारात में खेल रहे एक 12 साल के बच्चे का पैर फिसला और वह तेज बहाव वाली कैनाल नहर में जा गिरा। मासूम की चीखें कुछ पलों के लिए ही गूंजीं, फिर पानी का तेज रेला उसे बहा ले गया। घंटों की मशक्कत के बाद भी बच्चे का कोई पता नहीं चला और बढ़ते अंधेरे के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन रोकना पड़ा। परिजन बदहवास नहर किनारे बैठे रोते बिलखते रह गए।

हादसा मुरैना जिले के चिन्नौनी थाना क्षेत्र के कोलूडांडा गांव में सोमवार दोपहर करीब 2 बजे हुआ। गांव में एक स्थानीय परिवार की लड़की की शादी थी। बारात ग्वालियर क्षेत्र से आई थी। बारातियों में शामिल 12 वर्षीय आर्यन पुत्र मुकेश जाटव (निवासी ग्वालियर के पास एक गांव) अपने छोटे भाई-बहनों और रिश्तेदारों के बच्चों के साथ शादी घर के बाहर खेल रहा था। नहर गांव से महज 100-150 मीटर दूर बह रही थी। बच्चे नहर के किनारे बने पुलिए पर चढ़कर खेल रहे थे। अचानक आर्यन का संतुलन बिगड़ा और वह सीधे 15-20 फीट गहरी नहर में जा गिरा।

नहर में इस समय सिंचाई के लिए भरपूर पानी छोड़ा हुआ है और बहाव बेहद तेज है। साथी बच्चों ने शोर मचाया तो शादी घर से लोग दौड़े। कुछ युवकों ने नहर में छलांग लगाकर बच्चे को बचाने की कोशिश की, लेकिन तेज धारा के आगे कोई भी ज्यादा दूर तक नहीं तैर सका। देखते-ही-देखते आर्यन पानी की लहरों में गायब हो गया।

सूचना मिलते ही चिन्नौनी पुलिस और डायल-112 की टीम मौके पर पहुंची। मुरैना से एसडीआरएफ की टीम को बुलाया गया। दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक करीब तीन घंटे तक लगातार सर्च ऑपरेशन चला। गोताखोरों ने नहर में कई बार डुबकी लगाई, रस्सियां बांधीं, जाल डाले, लेकिन बच्चे का कोई सुराग नहीं मिला। नहर का पानी बेहद गंदा और कीचड़ से भरा होने के कारण विजिबिलिटी न के बराबर थी।

ग्रामीणों ने बताया कि नहर में कई जगह गहरे गड्ढे हैं और बहाव इतना तेज है कि कई बार तो पशु भी बह जाते हैं। शाम छह बजते-बजते सूरज डूबने लगा और चारों तरफ अंधेरा छा गया। मजबूरन एसडीआरएफ टीम को ऑपरेशन रोकना पड़ा। टीम ने परिजनों को आश्वासन दिया कि मंगलवार सुबह सूरज निकलते ही फिर से बड़े स्तर पर सर्च शुरू किया जाएगा।

शादी घर का माहौल पूरी तरह पसरा हुआ है। दुल्हन के पिता रामेश्वर जाटव ने बताया, “बारात हमारे रिश्तेदारों की थी। बच्चा बहुत प्यारा था, सबके साथ हंसता-खेलता था। किसी ने सोचा भी नहीं था कि ऐसा हादसा हो जाएगा।” मृतक बच्चे के पिता मुकेश जाटव सदमे में हैं। वे बार-बार नहर की तरफ देखकर चीख रहे थे, “मेरा बेटा लौटा दो… बस एक बार लौटा दो।”

पुलिस ने मर्ग कायम कर लिया है। चिन्नौनी थाना प्रभारी ने बताया कि मंगलवार सुबह से फिर से एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और स्थानीय गोताखोरों की मदद से बड़े पैमाने पर तलाश अभियान चलाया जाएगा। आसपास के कई किलोमीटर तक नहर के दोनों किनारों पर भी निगरानी रखी जा रही है, कहीं शव बहकर किनारे पर न आ जाए।

इस घटना ने एक बार फिर शादी-ब्याह में बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अक्सर गांवों में नहर, तालाब या खेतों के पास शादी समारोह होते हैं और बच्चे लापरवाही में ऐसे खतरनाक स्थानों पर चले जाते हैं। ग्रामीणों की मांग है कि नहर के खतरनाक मोड़ों पर जाली या चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं।

फिलहाल कोलूडांडा गांव में शादी की शहनाइयां थम गई हैं। जहां कल तक नाच-गाना हो रहा था, वहां आज सिर्फ रोने-धोने की आवाजें गूंज रही हैं। एक मासूम की जिंदगी नहर की धारा में समा गई और परिजन बस इंतजार कर रहे हैं कि सुबह हो और उनका लाल किसी तरह वापस लौट आए।