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Report by: Ravindra Singh

Morena : शहर के हृदय स्थल एमएस रोड पर शनिवार को नगर निगम की घोर लापरवाही के कारण एक बड़ा हादसा हो गया। नेहरू पार्क के समीप जल विभाग द्वारा की जा रही खुदाई के दौरान इंडियन ऑयल की गैस पाइपलाइन फट गई, जिससे भीषण आग लग गई। इस घटना ने न केवल क्षेत्र में अफरा-तफरी मचा दी, बल्कि एक नाश्ता सेंटर को पूरी तरह अपनी चपेट में ले लिया, जिसमें तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।

Morena चेतावनी को नजरअंदाज करना पड़ा भारी

घटना की जड़ में नगर निगम के कर्मचारियों की हठधर्मिता और सुरक्षा मानकों की अनदेखी रही। प्रत्यक्षदर्शियों और इंडियन ऑयल कंपनी के कर्मचारियों के अनुसार, जब जेसीबी मशीन से क्षतिग्रस्त पानी की पाइपलाइन की मरम्मत के लिए खुदाई शुरू की गई, तभी निगम की टीम को स्पष्ट रूप से आगाह किया गया था कि ठीक नीचे मुख्य गैस पाइपलाइन गुजर रही है। अधिकारियों और कर्मचारियों ने इस तकनीकी चेतावनी को अनसुना कर दिया और खुदाई जारी रखी, जिसके परिणामस्वरूप गैस पाइपलाइन में जोरदार धमाका हुआ।

Morena 10 फीट ऊंची लपटें और दुकान में मची तबाही

धमाका इतना शक्तिशाली था कि पाइपलाइन फटते ही आग की लपटें करीब 10 फीट ऊपर तक उठने लगीं। खुदाई स्थल के ठीक सामने स्थित ‘माँ पीताम्बरा नाश्ता सेंटर’ पल भर में आग के गोले में तब्दील हो गया। हादसे के वक्त दुकान में काम कर रहे संचालक विमल गुप्ता, पारस गुप्ता और कर्मचारी लाला खान अचानक भड़की आग की चपेट में आकर झुलस गए। घायलों को तत्काल अस्पताल पहुँचाया गया है, जहाँ उनका उपचार जारी है। दुकान के भीतर रखा सारा कीमती सामान और फर्नीचर कुछ ही मिनटों में जलकर खाक हो गया।

Morena पुलिस की सक्रियता और फायर ब्रिगेड का रेस्क्यू ऑपरेशन

आग की भयावहता को देखते हुए तत्काल पुलिस और फायर ब्रिगेड को सूचित किया गया। एएसपी सहित कोतवाली पुलिस बल ने मौके पर मोर्चा संभाला और संभावित खतरे को देखते हुए व्यस्त एमएस रोड के यातायात को दोनों तरफ से बंद कर डायवर्ट कर दिया। फायर ब्रिगेड की कई गाड़ियों ने करीब 30 मिनट तक मशक्कत करने के बाद आग पर पूरी तरह नियंत्रण पाया। यदि आग पास की अन्य इमारतों तक फैलती, तो स्थिति और भी विनाशकारी हो सकती थी।

Morena लाखों का नुकसान और मुआवजे की मांग

पीड़ित दुकानदार विमल गुप्ता के अनुसार, इस अग्निकांड में उनका करीब 80 हजार रुपये से अधिक का सामान जल गया है, जिससे उनके परिवार के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। स्थानीय निवासियों और व्यापारियों में नगर निगम के खिलाफ भारी आक्रोश है। पीड़ित परिवार ने प्रशासन से दोषी कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई करने और हुए आर्थिक नुकसान के लिए उचित मुआवजे की गुहार लगाई है। फिलहाल, पुलिस और प्रशासन मामले की विस्तृत जांच कर रहे हैं।

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