
मुख्य बातें:
- सफलतापूर्वक अभियान: बीजापुर के कर्रेगुट्टा पहाड़ पर सुरक्षाबलों ने एक बड़े नक्सल विरोधी अभियान (“मिशन संकल्प”) में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है।
- भारी क्षति: इस अभियान में अब तक 19 माओवादियों के शव बरामद किए गए हैं, जिनमें 11 महिलाएं शामिल हैं।
- बड़े नेता मारे गए: ढेर हुए नक्सलियों में दक्षिण ज़ोनल कमेटी मेंबर काकुरी पंडन्ना जगन और डिवीजनल कमेटी मेंबर वागा पोडियामी रमेश जैसे बड़े चेहरे शामिल हैं।
- संयुक्त कार्रवाई: डीआरजी, कोबरा, सीआरपीएफ और एसटीएफ़ के जवानों ने संयुक्त रूप से इस ऑपरेशन को अंजाम दिया।
- बड़ा ऑपरेशन: यह नक्सलियों के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा ऑपरेशन बताया जा रहा है, जिसमें 5 हजार से ज्यादा जवान शामिल थे।
- लगातार कार्रवाई: सुरक्षाबलों द्वारा पिछले 15 दिनों से इस क्षेत्र में नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन चलाया जा रहा था।
विस्तृत समाचार:
- कर्रेगुट्टा में बड़ा नक्सल विरोधी अभियान:
बीजापुर जिले के कर्रेगुट्टा पहाड़ी क्षेत्र में सुरक्षाबलों ने “मिशन संकल्प” के तहत एक व्यापक नक्सल विरोधी अभियान चलाया। यह अभियान पिछले लगभग पंद्रह दिनों से जारी था और इसका उद्देश्य इस दुर्गम क्षेत्र में सक्रिय माओवादियों को निशाना बनाना था। सुरक्षाबलों की इस कार्रवाई को नक्सलियों के खिलाफ एक बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है।
- 19 माओवादियों के शव बरामद, महिलाओं की संख्या अधिक:
अभियान के दौरान सुरक्षाबलों को भारी सफलता मिली है। अब तक घटनास्थल से कुल 19 माओवादियों के शव बरामद किए जा चुके हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि मारे गए नक्सलियों में 11 महिलाएं शामिल हैं, जबकि 8 पुरुष हैं। यह नक्सलियों के कैडर में महिलाओं की महत्वपूर्ण उपस्थिति को दर्शाता है।
- मारे गए बड़े नक्सली नेता:
सुरक्षाबलों ने मारे गए नक्सलियों में से कुछ की पहचान कर ली है। इनमें दो बड़े और महत्वपूर्ण नेता शामिल हैं:
- काकुरी पंडन्ना जगन: यह दक्षिण ज़ोनल कमेटी का मेंबर और गालिकोंडा एरिया कमेटी का प्रभारी था। इसका मारा जाना माओवादी संगठन के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
- वागा पोडियामी रमेश: यह डिवीजनल कमेटी का मेंबर और कालिमेला एरिया कमेटी का प्रभारी था। इसकी भी संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका थी।
अन्य मारे गए नक्सलियों की पहचान अभी प्रक्रियाधीन है।
- संयुक्त सुरक्षाबलों की कार्रवाई:
इस सफल ऑपरेशन को अंजाम देने में विभिन्न सुरक्षा बलों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। डीआरजी (डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड), कोबरा बटालियन (कमांडो बटालियन फॉर रेसोल्यूट एक्शन), सीआरपीएफ (केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल) और एसटीएफ़ (स्पेशल टास्क फोर्स) के बहादुर जवानों ने संयुक्त रूप से इस अभियान में हिस्सा लिया और नक्सलियों को उनके गढ़ में मुंहतोड़ जवाब दिया।
- उच्च अधिकारियों द्वारा निगरानी:
छत्तीसगढ़ के एडीजी नक्सल ऑप्श विवेकानंद सिन्हा, सीआरपीएफ आईजी राकेश अग्रवाल और बस्तर आईजी पी. सुंदरराज लगातार इस ऑपरेशन की निगरानी कर रहे थे। उनकी कुशल रणनीति और मार्गदर्शन के कारण ही सुरक्षाबलों को इतनी बड़ी सफलता मिल पाई है।
- हताहतों की संख्या बढ़ने की आशंका:
सुरक्षाबलों का मानना है कि मुठभेड़ में मारे गए नक्सलियों की संख्या अभी और बढ़ सकती है, क्योंकि अभी भी इलाके में तलाशी अभियान जारी है। घने जंगल और पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण शवों को ढूंढने में समय लग सकता है।
- नक्सलियों की कायराना हरकत और शहीद जवान:
गौरतलब है कि इस नक्सल विरोधी अभियान के बीच, नक्सलियों ने कायराना हरकत करते हुए आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) से हमला किया था, जिसमें तीन पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे। इसके बावजूद, सुरक्षाबलों का हौसला कम नहीं हुआ और उन्होंने नक्सलियों के खिलाफ अपना अभियान जारी रखा।
- नक्सलियों के खिलाफ सबसे बड़ा ऑपरेशन:
यह ऑपरेशन बीजापुर जिले में नक्सलियों के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा ऑपरेशन बताया जा रहा है। लगभग 5 हजार से ज्यादा जवानों ने कर्रेगुट्टा की पहाड़ियों को घेर रखा था और लगातार कार्रवाई कर रहे थे। इस बड़े पैमाने पर कार्रवाई से नक्सलियों के नेटवर्क को भारी नुकसान पहुंचने की उम्मीद है।
सुरक्षाबलों की इस बड़ी सफलता से क्षेत्र में शांति स्थापित करने के प्रयासों को बल मिलेगा। हालांकि, नक्सलियों की मौजूदगी अभी भी एक चुनौती बनी हुई है और सुरक्षाबलों को इस क्षेत्र में लगातार सतर्क रहने की आवश्यकता है।
