By: Ravindra Sikarwar
मध्य प्रदेश में नशे की तस्करी का एक बड़ा अंतरराज्यीय नेटवर्क बेनकाब होता जा रहा है। उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में कुछ दिन पहले पकड़े गए ड्रग माफिया गिरोह के बाद अब यह मामला सीधे मध्य प्रदेश सरकार के एक राज्यमंत्री के परिवार तक पहुँच गया है। पहले राज्यमंत्री के बहनोई की गिरफ्तारी ने सनसनी फैला दी थी, और अब उनके सगे भाई अनिल बागरी को सतना पुलिस ने 46 किलो से अधिक गांजा के साथ रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस का दावा है कि दोनों मामले आपस में जुड़े हुए हैं और एक ही बड़े ड्रग्स सिंडिकेट का हिस्सा हैं।
सोमवार देर रात सतना जिले के रामपुर बाघेलान क्षेत्र में उस समय हड़कंप मच गया जब थाना प्रभारी संदीप चतुर्वेदी के नेतृत्व में पुलिस टीम ने हाईवे पर नाकाबंदी की और एक लग्जरी कार को रोका। गाड़ी की तलाशी लेते ही पुलिस वाले दंग रह गए। कार के अंदर विशेष रूप से बनाए गए गुप्त खानों में 46 किलोग्राम उच्च क्वालिटी का गांजा भरा हुआ था। कार का नंबर MH 49 BB 9699 था, जो महाराष्ट्र की रजिस्टर्ड बताई जा रही है।
पुलिस के अनुसार, अनिल बागरी अपने एक साथी के साथ यह खेप कहीं डिलीवरी करने जा रहे थे। मुखबिर की सूचना पर पहले से तैयार पुलिस टीम ने जैसे ही गाड़ी को रोका, दोनों आरोपी घबरा गए। तलाशी में गांजे की भारी मात्रा मिलते ही उन्हें मौके पर गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ के बाद दोनों को मंगलवार को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
सूत्रों का कहना है कि अनिल बागरी प्रदेश के कद्दावर नेता और वर्तमान राज्यमंत्री के सगे भाई हैं। कुछ दिन पहले उत्तर प्रदेश के बांदा पुलिस ने जिस अंतरराज्यीय ड्रग्स गिरोह का भंडाफोड़ किया था, उसमें राज्यमंत्री के बहनोई भी शामिल थे। अब अनिल बागरी की गिरफ्तारी से साफ हो गया है कि यह पूरा नेटवर्क मध्य प्रदेश से लेकर उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र तक फैला हुआ है। पुलिस को शक है कि गांजे की यह खेप नेपाल बॉर्डर के रास्ते भारत लाई गई थी और फिर इसे पश्चिमी भारत तक पहुँचाया जाना था।
पुलिस अब इस पूरे मामले की गहराई तक जांच कर रही है। बांदा जेल में पहले से बंद आरोपी शैलेंद्र सिंह को भी इस केस में नामजद किया गया है। पुलिस की टीमें आरोपियों के मोबाइल कॉल डिटेल्स, बैंक खातों की जांच और पुराने रिकॉर्ड खंगाल रही हैं। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आखिर इतने बड़े स्तर पर गांजे की तस्करी में कितने लोग शामिल हैं और इसका मास्टरमाइंड कौन है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों से इलाके में नशे की खेपें आने-जाने की अफवाहें चल रही थीं, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि इतने प्रभावशाली लोगों के रिश्तेदार भी इसमें लिप्त हो सकते हैं। सतना जिले में नशे की लत युवाओं को बुरी तरह जकड़ रही है और पुलिस की इस कार्रवाई से लोगों ने राहत की सांस ली है।
पुलिस अधीक्षक सतना ने मीडिया से बातचीत में कहा कि नशे के खिलाफ जंग में कोई समझौता नहीं किया जाएगा, चाहे आरोपी कितना भी रसूख वाला क्यों न हो। आने वाले दिनों में और भी बड़ी गिरफ्तारियां होने की संभावना है।
यह मामला न सिर्फ कानून-व्यवस्था के लिए बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मचा रहा है। विपक्षी दल इसे सरकार पर हमलावर होने का मौका मान रहे हैं और जल्द ही सदन से लेकर सड़क तक हंगामा होने की आशंका है।
