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by-Ravindra Sikarwar

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को दीपावली की शुभकामनाओं वाली फोन कॉल के लिए आभार व्यक्त किया है। इस मौके पर पीएम मोदी ने दोनों देशों की लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं को वैश्विक उम्मीद का प्रतीक बताते हुए आतंकवाद के खिलाफ एकजुट रहने पर जोर दिया। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब दोनों देशों के बीच व्यापार और अन्य मुद्दों पर कुछ मतभेद उभरे हैं, लेकिन नेताओं ने सकारात्मक संबंधों पर बल दिया।

फोन कॉल का विवरण: 21 अक्टूबर 2025 को व्हाइट हाउस में एक विशेष दीपावली समारोह के दौरान ट्रंप ने पीएम मोदी से बातचीत का जिक्र किया। ट्रंप ने इसे एक सुखद वार्ता बताया और मुख्य रूप से व्यापार पर चर्चा होने का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका व्यापार तथा क्षेत्रीय शांति पर कुछ महत्वपूर्ण समझौतों की दिशा में काम कर रहे हैं। इस कार्यक्रम में अमेरिका में भारतीय राजदूत विनय क्वात्रा, एफबीआई प्रमुख काश पटेल, खुफिया प्रमुख तुलसी गबार्ड, भारत में नए अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर और भारतीय अमेरिकी कारोबारी नेता शामिल थे। ट्रंप ने मोदी को अपना ‘महान मित्र’ बताया।

ट्रंप के दावे: ट्रंप ने दावा किया कि मोदी ने उन्हें रूसी तेल आयात कम करने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा, “हमारी अच्छी दोस्ती है और वे रूस से ज्यादा तेल नहीं खरीदेंगे। वे रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त होते देखना चाहते हैं। जैसा कि आप जानते हैं, वे तेल खरीद को बहुत कम कर रहे हैं और आगे भी कम करेंगे।” ट्रंप ने इसे अपनी वैश्विक युद्ध रोकने की मुहिम से जोड़ा, मानते हुए कि अगर भारत मॉस्को से तेल खरीद बंद कर दे तो यह रूस की यूक्रेन नीति पर असर डालेगा। इसके अलावा, ट्रंप ने मई में भारत-पाकिस्तान संघर्ष रोकने का श्रेय खुद को दिया, कहते हुए, “हमने हाल ही में पाकिस्तान के साथ कोई युद्ध न होने पर बात की। व्यापार का मुद्दा शामिल था और मैंने इस पर चर्चा की। अब पाकिस्तान और भारत के बीच कोई युद्ध नहीं है, जो बहुत अच्छी बात है।” हालांकि, भारत ने इस दावे को खारिज कर दिया, बताते हुए कि संघर्षविराम पाकिस्तानी कमांडरों की भारतीय पक्ष से रुकने की गुहार के बाद हुआ।

मोदी की प्रतिक्रिया: 22 अक्टूबर 2025 को पीएम मोदी ने एक्स पर पोस्ट कर ट्रंप को धन्यवाद दिया: “धन्यवाद, राष्ट्रपति ट्रंप, आपकी फोन कॉल और गर्मजोशी भरी दीपावली शुभकामनाओं के लिए। इस प्रकाश पर्व पर, हमारी दो महान लोकतांत्रिक व्यवस्थाएं दुनिया को उम्मीद से रोशन करती रहें और आतंकवाद के सभी रूपों के खिलाफ एकजुट रहें।” यह टिप्पणी अमेरिका की पाकिस्तान से बढ़ती निकटता के संदर्भ में महत्वपूर्ण है, जहां पाकिस्तान को आतंकवाद निर्यातक और आतंकियों का सुरक्षित ठिकाना माना जाता है। मोदी की पोस्ट में व्यापार या तेल पर कोई जिक्र नहीं था, बल्कि लोकतंत्र और आतंकवाद विरोध पर फोकस था। भारत सरकार ने ऊर्जा आयात पर अलग बयान जारी कर अस्थिर ऊर्जा परिदृश्य में भारतीय उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा पर जोर दिया, लेकिन ट्रंप या उनके तेल दावे का उल्लेख नहीं किया।

दोनों पक्षों के बयानों में अंतर: अमेरिकी पक्ष ने वार्ता को व्यापार-केंद्रित बताया, जबकि भारतीय पक्ष ने इसे सांस्कृतिक और आतंकवाद विरोधी एकजुटता पर केंद्रित रखा। हिंदू अखबार ने इन मतभेदों को उजागर किया, जहां ट्रंप ने रूसी तेल और पाकिस्तान पर चर्चा का दावा किया, लेकिन मोदी की पोस्ट में इनका कोई संकेत नहीं था। यह फोन कॉल दोनों देशों के बीच शुल्क और व्यापार पर उभरे तनाव के बीच हुई।

राजनीतिक संदर्भ: यह दूसरी कॉल थी दो महीनों में। भारत-पाकिस्तान संबंधों में अमेरिका की भूमिका पर चिंता जताई जा रही है, जहां ट्रंप प्रशासन ने भारत-पाक को जोड़ने की नीति अपनाई है। पाकिस्तान ने ट्रंप को खुश करने के लिए क्रिप्टोकरेंसी सौदे, भारत के साथ शत्रुता समाप्त करने का श्रेय और नोबेल शांति पुरस्कार नामांकन जैसे कदम उठाए हैं। ट्रंप ने जून में पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर को व्हाइट हाउस में आमंत्रित किया था, जो असामान्य था। पाकिस्तान के महत्वपूर्ण खनिज भंडार तक पहुंच ट्रंप की रुचि का कारण है, जबकि पाकिस्तान अमेरिका से करीब आने की कोशिश कर रहा है। मोदी का संदेश भारत की आतंकवाद विरोधी दृढ़ता और पाकिस्तान से उकसावे पर जवाब देने की इच्छा का संकेत देता है।

यह घटना दोनों देशों के मजबूत संबंधों को दर्शाती है, लेकिन मतभेदों पर स्पष्ट संवाद की जरूरत भी दिखाती है। वैश्विक शांति और लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में यह एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।

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