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by-Ravindra Sikarwar

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला है। उन्होंने संसद में लाए गए नए विधेयकों और हाल ही में सामने आए कुछ घटनाक्रमों को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। खड़गे ने केंद्र सरकार पर “वोट चोरी” के बाद अब “सत्ता चोरी” करने का कटाक्ष किया।

नए विधेयकों पर खड़गे का रुख:
खड़गे ने नए विधेयकों, खासकर 2024 में लागू हुए नए आपराधिक कानूनों पर अपनी चिंताएं व्यक्त की हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन विधेयकों का उद्देश्य राज्यों और विपक्षी दलों को कमजोर करना है। उनका कहना है कि सरकार इन कानूनों का दुरुपयोग कर विपक्षी नेताओं को निशाना बना सकती है।

राज्यसभा में एक बहस के दौरान खड़गे ने कहा कि बिना चर्चा के विधेयक पारित करना लोकतंत्र के साथ धोखा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार संसद में विपक्ष की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है। उनका मानना है कि सरकार को विधेयकों पर व्यापक चर्चा करने का मौका देना चाहिए, क्योंकि ये देश के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण हैं।

“वोट चोरी, सत्ता चोरी” का कटाक्ष:
खड़गे ने केंद्र सरकार पर “वोट चोरी” और “सत्ता चोरी” का तीखा हमला बोला। उन्होंने कर्नाटक के महादेवपुरा सीट का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां एक साजिश के तहत वोट चुराए गए थे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने छह महीने के शोध के बाद इस “वोट चोरी” का पता लगाया।

खड़गे ने आरोप लगाया कि “वोट चोरी” के बाद अब सरकार “सत्ता चोरी” में लगी है। उनका यह भी कहना है कि नए विधेयक नागरिकों से उनकी चुनी हुई सरकार बनाने या हटाने का अधिकार छीन लेते हैं और यह अधिकार ईडी-सीबीआई जैसी संस्थाओं को दे देते हैं। उन्होंने इसे “लोकतंत्र पर बुलडोजर चलाने जैसा” बताया।

लोकतंत्र को बचाने की अपील:
खड़गे ने अपने पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं से बूथ और मंडल समितियों के गठन में विशेष सावधानी बरतने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि समितियां बनाते समय ऐसे लोगों को शामिल किया जाए जो पार्टी के प्रति वफादार और मेहनती हों। उन्होंने कहा कि अगर कोई उन्हें लालच भी दे, तो उनकी निष्ठा कांग्रेस के प्रति बनी रहनी चाहिए। खड़गे ने कहा कि “मनुष्य बल” और “एकता” ही लोकतंत्र में सम्मान दिला सकती है।

कुल मिलाकर, खड़गे का बयान सरकार पर लोकतंत्र को कमजोर करने, विपक्षी आवाजों को दबाने और अपनी एजेंसियों का दुरुपयोग करने का आरोप लगाता है। उन्होंने इन मुद्दों को जनता और कार्यकर्ताओं के बीच उजागर कर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं।