By: Ravindra Sikarwar
देश के ग्रामीण रोजगार ढांचे में बड़ा बदलाव करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी वीबी-जी राम जी विधेयक 2025 को मंजूरी दे दी है। राष्ट्रपति की स्वीकृति के साथ ही यह विधेयक अब आधिकारिक रूप से कानून बन गया है। संसद के दोनों सदनों से पारित होने के बाद यह बिल राष्ट्रपति के पास भेजा गया था, जिस पर रविवार को मुहर लगाई गई। सरकार इसे ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक अहम कदम बता रही है।
मनरेगा की जगह लागू होगा नया कानून
वीबी-जी राम जी कानून का उद्देश्य मौजूदा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को प्रतिस्थापित करना है। सरकार का कहना है कि बदलती आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में सुधार की जरूरत थी। इसी को ध्यान में रखते हुए इस नए कानून को तैयार किया गया है, जो रोजगार के साथ-साथ आजीविका के स्थायी साधनों को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।
रोजगार गारंटी बढ़ाकर 125 दिन
नए कानून की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके तहत ग्रामीण परिवारों को मिलने वाली वैधानिक रोजगार गारंटी को बढ़ा दिया गया है। जहां पहले मनरेगा के तहत एक वित्तीय वर्ष में 100 दिन का रोजगार सुनिश्चित किया जाता था, वहीं अब वीबी-जी राम जी कानून के अंतर्गत कम से कम 125 दिन का रोजगार देना अनिवार्य होगा। सरकार का दावा है कि इससे ग्रामीण परिवारों की आय में बढ़ोतरी होगी और उन्हें आर्थिक सुरक्षा मिलेगी।
सरकार का दावा—ग्रामीण जीवन को मिलेगा मजबूत आधार
सरकार ने इस कानून को ग्रामीण विकास की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया है। अधिकारियों के अनुसार, यह योजना न केवल मजदूरी आधारित रोजगार उपलब्ध कराएगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में टिकाऊ आजीविका के अवसर भी पैदा करेगी। इसके तहत स्थानीय स्तर पर बुनियादी ढांचे, कृषि से जुड़े कार्यों, जल संरक्षण और अन्य विकास परियोजनाओं को बढ़ावा दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे गांवों में पलायन की समस्या भी कम होगी।
संसद में हुआ तीखा राजनीतिक विवाद
जब यह विधेयक संसद में पेश किया गया था, तब इसे लेकर लंबी और तीखी बहस देखने को मिली थी। विपक्षी दलों ने सरकार पर कई आरोप लगाए और देर रात तक चर्चा चली। विपक्ष का कहना था कि सरकार मनरेगा का नाम बदलकर उसमें से महात्मा गांधी का नाम हटाना चाहती है। उनका आरोप था कि यह कदम राजनीतिक सोच से प्रेरित है और एक लोकप्रिय योजना की पहचान को खत्म करने की कोशिश की जा रही है।
विपक्ष के आरोपों पर सरकार की सफाई
विपक्ष के आरोपों पर सरकार ने स्पष्ट किया कि इस बदलाव का उद्देश्य किसी नाम को हटाना नहीं, बल्कि योजना को अधिक प्रभावी बनाना है। सरकार का कहना है कि मनरेगा की तुलना में यह नया कानून अधिक व्यापक है और इसमें रोजगार के दिनों की संख्या भी बढ़ाई गई है। साथ ही, इसे विकसित भारत-2047 के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप तैयार किया गया है, ताकि आने वाले वर्षों में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार मिल सके।
विकसित भारत-2047 से जुड़ा लक्ष्य
सरकार के अनुसार, वीबी-जी राम जी कानून विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखकर बनाया गया है। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, कौशल विकास और आजीविका के नए अवसर पैदा करना है। इससे ग्रामीण समाज को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और देश की समग्र विकास यात्रा में गांवों की भूमिका को और मजबूत करने की उम्मीद जताई जा रही है।
राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद वीबी-जी राम जी विधेयक का कानून बनना ग्रामीण रोजगार नीति में एक बड़े बदलाव का संकेत है। जहां सरकार इसे ग्रामीण भारत के लिए दूरगामी और सकारात्मक कदम मान रही है, वहीं विपक्ष इसे लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कर चुका है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि यह नया कानून जमीनी स्तर पर कितना प्रभावी साबित होता है और ग्रामीण परिवारों को इससे कितना लाभ मिल पाता है।
