by-Ravindra Sikarwar
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच ऐतिहासिक डूरंड लाइन पर रविवार रात को हुए भीषण संघर्ष ने दोनों देशों के संबंधों को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। तालिबान सेना ने पाकिस्तानी सेना के कई चौकियों पर हमला बोल दिया, जिसमें पाकिस्तान ने 23 सैनिकों की शहादत की पुष्टि की है, जबकि तालिबान ने 58 पाकिस्तानी सैनिकों की मौत का दावा किया है। जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तानी सेना ने अफगानिस्तान की ओर से 200 से अधिक तालिबानी लड़ाकों और सहयोगी आतंकवादियों को मार गिराया। यह हमला अफगानिस्तान में पाकिस्तानी हवाई हमलों के जवाब में किया गया, जो तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के ठिकानों को निशाना बनाने के लिए अंजाम दिए गए थे। संघर्ष के बाद पाकिस्तान ने प्रमुख सीमा पार करने वाले रास्तों को बंद कर दिया है, जिससे व्यापार और यात्रा पूरी तरह ठप हो गई है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद जल्द सुलझने वाला नहीं लगता।
संघर्ष की पृष्ठभूमि: पुरानी दुश्मनी और नई चुनौतियां
डूरंड लाइन, जो ब्रिटिश काल में 1893 में खींची गई 2,640 किलोमीटर लंबी इस सीमा को दोनों देश कभी स्वीकार नहीं कर पाए। अफगानिस्तान इसे अपनी संप्रभुता पर हमला मानता है, जबकि पाकिस्तान इसे अपनी सीमा के रूप में देखता है। तालिबान के 2021 में सत्ता में आने के बाद से संबंध और खराब हो गए। पाकिस्तान का आरोप है कि अफगानिस्तान में टीटीपी के हजारों लड़ाके छिपे हुए हैं, जो पाकिस्तानी सेना पर हमले करते हैं। काबुल इन आरोपों को खारिज करता है और कहता है कि पाकिस्तान ही आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है।
पिछले कुछ महीनों में टीटीपी के हमलों में तेजी आई है। इस्लामाबाद स्थित सेंटर फॉर रिसर्च एंड सिक्योरिटी स्टडीज (सीआरएसएस) के अनुसार, 2025 के पहले नौ महीनों में 2,414 लोग मारे गए, जो 2024 के पूरे साल के आंकड़ों (2,546 मौतें) से ज्यादा है। अप्रैल 2022 में इमरान खान की सरकार गिरने के बाद से टीटीपी की कार्रवाइयां बढ़ी हैं। पाकिस्तान ने अफगान शरणार्थियों को वापस भेजना शुरू कर दिया है—दशकों की जंग से 30 लाख अफगान पाकिस्तान में रहते हैं। हाल ही में तालिबान विदेश मंत्री अमीर खान मुत्तकी की भारत यात्रा ने भी पाकिस्तान को चिंतित किया, क्योंकि भारत ने काबुल में अपना दूतावास फिर खोलने की घोषणा की।
घटना का क्रम: हवाई हमलों से शुरू होकर सीमा पर गोलीबारी
संघर्ष की शुरुआत गुरुवार को हुई, जब पाकिस्तानी वायुसेना ने अफगानिस्तान के काबुल और दक्षिण-पूर्वी पक्तिका प्रांत में हवाई हमले किए। पाकिस्तानी सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, ये हमले टीटीपी प्रमुख नूर वली महसूद के वाहन को निशाना बनाने के लिए थे, जो एक हालिया हमले में 11 पाकिस्तानी अर्धसैनिक बलों की मौत के जिम्मेदार थे। तालिबान ने इन हमलों को संप्रभुता का उल्लंघन बताते हुए कड़ी निंदा की, लेकिन कोई हताहत नहीं होने की बात कही। पाकिस्तान ने हमलों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की, लेकिन तालिबान से टीटीपी पर कार्रवाई की मांग की।
शनिवार रात करीब 10 बजे (17:00 जीएमटी) अफगान सेना ने जवाबी कार्रवाई शुरू की। तालिबान ने पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के अंगूर अड्डा, बाजौर, कुर्रम, डिर, चित्राल और बलूचिस्तान के बह्राम चाह जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों में सैन्य चौकियों पर हमला बोला। अफगान रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता इनायतुल्लाह खावरजमी ने बताया कि यह “रक्षात्मक अभियान” था, जो आधी रात तक चला। तालिबान का दावा है कि उन्होंने 25 पाकिस्तानी चौकियां कब्जे में ले लीं और सीमा पर पूर्ण नियंत्रण हासिल कर लिया।
पाकिस्तान ने तुरंत जवाब दिया। इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) के अनुसार, पाकिस्तानी सेना ने तोपखाने और भारी हथियारों से हमला किया, जिसमें 21 अफगान चौकियां नष्ट कर दी गईं। पाकिस्तानी अधिकारियों ने वीडियो जारी किए, जिसमें अफगान चौकियों को निशाना बनाते दिखाया गया। रविवार सुबह तक मुख्य गोलीबारी रुक गई, लेकिन कुर्रम क्षेत्र में छिटपुट फायरिंग जारी रही। अफगानिस्तान के कुнар प्रांत में तालिबान ने टैंक और भारी हथियार तैनात कर दिए हैं।
इसके अलावा, टीटीपी ने कुर्रम जिले में एक सैन्य काफिले पर सड़क किनारे बम विस्फोट और गोलीबारी से हमला किया, जिसमें 11 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए। हेलमंद प्रांत में अफगान सेना ने 15 पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराने और तीन चौकियां कब्जाने का दावा किया।
हताहतों का आंकड़ा: दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग
दोनों देशों ने एक-दूसरे के खिलाफ ऊंचे दावे किए हैं, लेकिन स्वतंत्र सत्यापन नहीं हो सका।
- पाकिस्तान का दावा: 23 सैनिक शहीद, 29 घायल। जवाब में 200 से ज्यादा तालिबानी और सहयोगी आतंकवादी मारे गए।
- तालिबान/अफगानिस्तान का दावा: 58 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए, 30 घायल। अपने पक्ष में 9 लड़ाके शहीद, 16 घायल।
ये आंकड़े पिछले कुछ दिनों के हमलों का हिस्सा हैं, जिसमें ओरिकजई जिले में 11 पाकिस्तानी सैनिक और 19 टीटीपी लड़ाके मारे गए।
प्रमुख स्थान और प्रभाव:
संघर्ष मुख्य रूप से डूरंड लाइन के साथ हुआ, जिसमें खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान के सीमावर्ती इलाके शामिल हैं। पाकिस्तान ने टोरखाम, चमन, खारलाची, अंगूर अड्डा और गुलाम खान जैसे प्रमुख क्रॉसिंग पॉइंट्स बंद कर दिए, जिससे हजारों यात्री और व्यापारी फंस गए। चमन शहर में लोग अफगानिस्तान लौटने को मजबूर हुए। अफगानिस्तान ने भी हमले कतर और सऊदी अरब की अपील पर रोक दिए, लेकिन चेतावनी दी कि आगे उल्लंघन पर कड़ा जवाब दिया जाएगा।
अधिकारियों के बयान: आक्रोश और चेतावनी
- पाकिस्तानी पक्ष: प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा, “हमारी सेना ने शानदार जवाब दिया और कई चौकियां नष्ट कर दीं। आतंकवाद के खिलाफ कोई समझौता नहीं।” गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने हमलों को “अकारण गोलीबारी” बताते हुए कहा, “अफगानिस्तान आग और खून का खेल खेल रहा है।” आईएसपीआर ने इसे “कायराना कृत्य” कहा और तालिबान पर टीटीपी को पनाह देने का आरोप लगाया।
- तालिबान/अफगान पक्ष: प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा, “हमने 58 पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया और सीमा पर नियंत्रण हासिल कर लिया। अफगानिस्तान की जमीन पर कोई खतरा नहीं।” विदेश मंत्री अमीर खान मुत्तकी ने शांति की इच्छा जताई, लेकिन कहा, “कूटनीति विफल होने पर अन्य विकल्प हैं।” रक्षा मंत्री मौलवी मोहम्मद याकूब मुजाहिद ने चेतावनी दी, “भविष्य में उल्लंघन पर और सख्त कार्रवाई होगी।”
परिणाम और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया: संयम की अपील
संघर्ष ने दक्षिण एशिया की सुरक्षा को प्रभावित किया है। पाकिस्तान ने अफगानिस्तान पर आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए काबुल से कार्रवाई की मांग की। विशेषज्ञों का कहना है कि अफगानिस्तान की पारंपरिक सैन्य क्षमता कमजोर है, इसलिए बड़ा युद्ध संभव नहीं, लेकिन टीटीपी का मुद्दा बना रहेगा। पूर्व राजनयिक आसिफ दुर्रानी ने कहा, “कूटनीति ही समाधान है, क्योंकि चीन, रूस और मुस्लिम देश दोनों को संयम बरतने की सलाह दे रहे हैं।”
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कतर, सऊदी अरब और ईरान ने संयम की अपील की। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने मध्यस्थता की पेशकश की। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि वे इसे सुलझा सकते हैं। भारत ने अभी चुप्पी साधी है, लेकिन तालिबान के साथ उसके संबंध पाकिस्तान के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं।
यह घटना न केवल सीमा विवाद को उजागर करती है, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता पर सवाल भी खड़े करती है। दोनों देशों को बातचीत से समाधान निकालना होगा, वरना मानवीय और आर्थिक नुकसान बढ़ेगा। क्या यह तनाव नई ऊंचाइयों को छुएगा, या कूटनीति जीतेगी? आने वाले दिन बताएंगे।
