Spread the love

By: Ravindra Sikarwar

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के परिवार में एक नई आध्यात्मिक शुरुआत हुई है। उनके छोटे बेटे डॉ. अभिमन्यु यादव और बहू डॉ. इशिता यादव ने हाल ही में नर्मदा नदी की परिक्रमा शुरू की। यह यात्रा परिवार के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर की जा रही है, जो सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं को जीवंत रखने का प्रतीक है। नवविवाहित दंपति की यह यात्रा विवाह के कुछ ही दिनों बाद शुरू होना उनके जीवन की नई पारी को पवित्रता और श्रद्धा से जोड़ता है।

यात्रा की शुरुआत और परिवार की भागीदारी
पवित्र नर्मदा परिक्रमा की शुरुआत ओंकारेश्वर से हुई, जो ज्योतिर्लिंगों में से एक है और नर्मदा तट का प्रमुख तीर्थ स्थल माना जाता है। अभिमन्यु और इशिता के साथ उनकी बड़ी बहन आकांक्षा यादव, जीजाजी, बड़े भाई वैभव यादव और भाभी भी इस यात्रा में शामिल हैं। पूरा परिवार एक साथ इस धार्मिक अनुष्ठान में भाग लेकर सामूहिक एकता और पारिवारिक बंधनों को मजबूत कर रहा है।

यह परिक्रमा पारंपरिक रूप से नर्मदा नदी के दोनों तटों का चक्कर लगाने की प्रक्रिया है, जो आस्था और तपस्या का प्रतीक है। परिवार की यह यात्रा लगभग 15 दिनों में पूरी होने की उम्मीद है, जिसमें कई महत्वपूर्ण पड़ाव शामिल होंगे।

परिक्रमा का प्रस्तावित मार्ग
यात्रा ओंकारेश्वर से शुरू होकर महेश्वर, बड़वानी, राजपीपला, गरुड़ेश्वर (जहां स्टैच्यू ऑफ यूनिटी क्षेत्र भी आता है), भरूच होते हुए नर्मदा सागर संगम तक पहुंचेगी। यह मार्ग न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि प्राकृतिक सौंदर्य और ऐतिहासिक स्थलों से भी भरपूर है। महेश्वर का किला, बड़वानी के घाट और गुजरात के तटीय क्षेत्र इस यात्रा को यादगार बनाते हैं।

नर्मदा परिक्रमा हिंदू धर्म में विशेष स्थान रखती है, क्योंकि यह एकमात्र ऐसी नदी है जिसकी परिक्रमा की परंपरा है। श्रद्धालु मानते हैं कि इस यात्रा से जीवन के पाप नष्ट होते हैं और आत्मिक शांति मिलती है। परिवार का यह कदम आम लोगों के लिए भी प्रेरणादायक है।

नवविवाहित दंपति का विवाह: सादगी की मिसाल
अभिमन्यु और इशिता का विवाह 30 नवंबर को उज्जैन में आयोजित सामूहिक विवाह सम्मेलन में हुआ था। इस समारोह में 22 जोड़ों ने एक साथ फेरे लिए, जो सादगी और सामाजिक समरसता का अनूठा उदाहरण था। वरमाला की रस्म योग गुरु बाबा रामदेव ने मंत्रों के साथ कराई, जबकि कथावाचक पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने आशीर्वाद दिया।

कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, राज्यपाल मंगुभाई पटेल, मंत्री तुलसी सिलावट और अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी जैसी प्रमुख हस्तियां शामिल हुईं। दोनों ही डॉक्टर होने के बावजूद दंपति ने वैभवपूर्ण विवाह के बजाय सामूहिक समारोह चुना, जो समाज को संदेश देता है कि विवाह एक पवित्र बंधन है, न कि दिखावे का माध्यम।

यात्रा का व्यापक महत्व
नर्मदा परिक्रमा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि प्रकृति से जुड़ने और आत्मचिंतन का अवसर है। मुख्यमंत्री परिवार का यह कदम राज्य की सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देता है। मध्य प्रदेश में नर्मदा नदी को जीवन रेखा माना जाता है, और ऐसी यात्राएं लोगों में आस्था जगाती हैं।

यह घटना दर्शाती है कि व्यस्त राजनीतिक जीवन के बीच भी पारिवारिक और धार्मिक मूल्यों को महत्व दिया जा सकता है। परिवार की यह यात्रा सफलतापूर्वक पूरी हो और सभी को नर्मदा मां का आशीर्वाद मिले, यही कामना है। आने वाले दिनों में इस यात्रा के अनुभव परिवार और श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणा स्रोत बनेंगे।