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by-Ravindra Sikarwar

चोरों ने अपोलो गैलरी से फ्रेंच क्राउन ज्वेल्स के हिस्से चुराए, घटना सुबह 9:30 बजे हुई; संग्रहालय को खाली कराया गया और जांच शुरू

फ्रांस की राजधानी पेरिस में स्थित विश्व प्रसिद्ध लुव्र संग्रहालय को रविवार को अचानक बंद कर दिया गया, जब चोरों के एक गिरोह ने वहां से अमूल्य ज्वेलरी की चोरी कर ली। यह घटना 19 अक्टूबर, 2025 को सुबह करीब 9:30 बजे हुई, जब संग्रहालय अभी-अभी खुला था। चोरों ने मात्र चार से सात मिनट में यह साहसिक चोरी को अंजाम दिया, जिसके बाद संग्रहालय को तुरंत खाली कराया गया और इसे ‘विशेष कारणों’ से बंद रखा गया। अधिकारियों ने बताया कि चोरी गए सामान में फ्रेंच क्राउन ज्वेल्स के महत्वपूर्ण हिस्से शामिल हैं, जिनकी कीमत ‘अनुमान से परे’ है और जिनका ऐतिहासिक तथा सांस्कृतिक महत्व अत्यधिक है।

लुव्र संग्रहालय, जो दुनिया का सबसे अधिक देखा जाने वाला संग्रहालय है, में हर साल लाखों पर्यटक आते हैं। यह घटना अपोलो गैलरी (गैलरी द’अपोलो) में हुई, जो फ्रेंच राजपरिवार के रत्नों और आभूषणों का घर है। चोरों ने एक ट्रक पर लगी सीढ़ी का इस्तेमाल करके या फिर एंगल ग्राइंडर से खिड़की तोड़कर अंदर प्रवेश किया। उन्होंने आठ से नौ टुकड़ों की ज्वेलरी चुराई, जिसमें रानी मैरी-अमेली और रानी अमेली की डायडेम (मुकुट), साथ ही अन्य रत्न जड़ित आभूषण शामिल हैं। इनमें से कई वस्तुएं रोमन और नेपोलियन काल की हैं, जो फ्रांस की समृद्ध विरासत का हिस्सा हैं। आंतरिक मंत्री ने कहा कि इनकी ‘भावनात्मक मूल्य और अमूल्यता’ के कारण नुकसान की भरपाई नहीं की जा सकती।

घटना की सूचना मिलते ही पेरिस पुलिस और संग्रहालय के सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत कार्रवाई की। संग्रहालय को पूरी तरह खाली करा लिया गया, जिसमें हजारों पर्यटक और कर्मचारी शामिल थे। फ्रेंच अधिकारियों ने बताया कि चोरों ने सुरक्षा प्रणालियों को चकमा देने के लिए परिष्कृत तरीके अपनाए, लेकिन सीसीटीवी फुटेज और अन्य सबूतों से जांच आगे बढ़ रही है। लुव्र के निदेशक ने एक बयान में कहा, “यह फ्रांस की सांस्कृतिक धरोहर पर हमला है। हम सभी आवश्यक कदम उठा रहे हैं ताकि ऐसी घटनाएं भविष्य में न हों।” संग्रहालय को सोमवार तक बंद रखने का फैसला लिया गया है, ताकि जांच पूरी हो सके और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जा सके।

यह चोरी फ्रांस में हाल के वर्षों में हुई प्रमुख संग्रहालय चोरियों की श्रृंखला में शामिल हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि चोरों का गिरोह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय हो सकता है, क्योंकि ऐसी अमूल्य वस्तुओं को काले बाजार में बेचना आसान नहीं होता। फ्रेंच सरकार ने जांच के लिए विशेष टीम गठित की है, जिसमें इंटरपोल की मदद भी ली जा रही है। आंतरिक मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, “हम चोरों को जल्द पकड़ लेंगे और वस्तुओं को वापस लाएंगे।” पर्यटकों में इस घटना से निराशा है, क्योंकि कई लोग मोना लिसा और अन्य कला कृतियों को देखने आए थे, लेकिन उन्हें वापस लौटना पड़ा।

लुव्र संग्रहालय की स्थापना 1793 में हुई थी और इसमें 380,000 से अधिक वस्तुएं हैं, जिनमें मिस्र की प्राचीन कलाकृतियां, ग्रीक मूर्तियां और यूरोपीय चित्रकला शामिल हैं। अपोलो गैलरी विशेष रूप से फ्रेंच राजपरिवार के आभूषणों के लिए जानी जाती है, जो 17वीं शताब्दी से संरक्षित हैं। इस घटना ने संग्रहालयों की सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं, खासकर जब दुनिया भर से पर्यटक यहां आते हैं। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि जांच के बाद संग्रहालय जल्द खुल जाएगा, लेकिन अतिरिक्त सुरक्षा उपाय अपनाए जाएंगे।

(विभिन्न अंतरराष्ट्रीय स्रोतों से संकलित)

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