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Gwalior : पर्यावरण संरक्षण और जल संकट जैसी वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए ग्वालियर के प्रतिष्ठित शासकीय कमला राजा कन्या स्नातकोत्तर (KRG) स्वशासी महाविद्यालय ने एक अनुकरणीय कदम उठाया है। कॉलेज की राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) इकाई और जल संचयन क्षेत्र की विशेषज्ञ संस्था श्री साईं एंटरप्राइजेज ‘दीप नीर’ के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। यह साझेदारी शैक्षणिक जगत और उद्योग के बीच समन्वय का एक उत्कृष्ट उदाहरण पेश करती है।

Gwalior अकादमिक और औद्योगिक विशेषज्ञता का संगम

इस समझौते का मुख्य उद्देश्य किताबी ज्ञान को धरातल पर उतारना है। अगले 36 महीनों (3 वर्ष) के लिए किए गए इस अनुबंध के तहत के.आर.जी. कॉलेज और ‘दीप नीर’ संयुक्त रूप से जल प्रबंधन की दिशा में कार्य करेंगे।

  • साझा विज़न: दोनों संस्थाओं का मानना है कि जल संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि एक सामुदायिक आंदोलन होना चाहिए।
  • तकनीकी सहयोग: ‘दीप नीर’ अपनी तकनीकी विशेषज्ञता साझा करेगा, जबकि कॉलेज के संकाय सदस्य और NSS स्वयंसेवक सामाजिक चेतना और श्रमदान के माध्यम से इस अभियान को गति देंगे।

Gwalior ऐतिहासिक ‘बावड़ी’ का पुनरुद्धार और भूजल संवर्धन

इस प्रोजेक्ट का सबसे महत्वपूर्ण और भावनात्मक पहलू कॉलेज परिसर में स्थित प्राचीन बावड़ी (Stepwell) का जीर्णोद्धार है। ऐतिहासिक जल संरचनाओं को सहेजना न केवल विरासत का संरक्षण है, बल्कि स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए भी अनिवार्य है।

प्रमुख कार्य योजना:

  • सफाई और जीर्णोद्धार: वर्षों से उपेक्षित बावड़ी की सफाई कर उसे पुनर्जीवित किया जाएगा, जिससे परिसर के भूजल स्तर (Groundwater level) में सुधार होगा।
  • रेन वॉटर हार्वेस्टिंग: परिसर की छतों से गिरने वाले वर्षा जल को सहेजने के लिए आधुनिक ‘रेन वॉटर हार्वेस्टिंग’ मॉडल स्थापित किए जाएंगे।
  • शून्य बर्बादी का लक्ष्य: दैनिक गतिविधियों में उपयोग होने वाले पानी के अपव्यय को रोकने के लिए ‘मिनिमम वेस्टेज’ तकनीक अपनाई जाएगी।

Gwalior छात्राओं का कौशल विकास और ‘जल रक्षक’ अभियान

यह MoU केवल बुनियादी ढांचे के निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका एक बड़ा हिस्सा छात्राओं के सशक्तिकरण और शिक्षा से जुड़ा है।

  • व्यावहारिक प्रशिक्षण: कार्यशालाओं और विशेष ट्रेनिंग प्रोग्राम के माध्यम से छात्राओं को जल संचयन की बारीकियां सिखाई जाएंगी। इससे उनमें पर्यावरण प्रबंधन के प्रति पेशेवर कौशल विकसित होगा।
  • सामाजिक सरोकार: NSS स्वयंसेवकों को समाज सेवा के बदले व्यावहारिक अनुभव प्राप्त होगा, जो उनके करियर और व्यक्तित्व निर्माण में सहायक होगा।
  • सतत निगरानी: समझौते की सफलता सुनिश्चित करने के लिए कॉलेज प्राचार्य और ‘दीप नीर’ के प्रमुख समय-समय पर प्रगति की समीक्षा करेंगे, ताकि निर्धारित लक्ष्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जा सके।

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