Report by: Ishu Kumar
Korba : छत्तीसगढ़ के ऊर्जा धानी कोरबा जिले से एक दुखद खबर सामने आई है। यहाँ एसईसीएल (SECL) की दीपका खदान क्षेत्र में कार्यरत एक श्रमिक की रहस्यमयी परिस्थितियों में मौत हो गई है। इस घटना के बाद खदान क्षेत्र में तनाव व्याप्त है। मृतक के परिजनों और साथी ड्राइवरों ने सुरक्षा मानकों और प्रबंधन की लापरवाही का आरोप लगाते हुए कलिंगा कंपनी के मुख्य द्वार पर चक्काजाम कर दिया है, जिससे खदान का परिचालन पूरी तरह ठप हो गया है।
नाइट शिफ्ट के दौरान अचानक बिगड़ी जुरखन की तबीयत
Korba प्राप्त जानकारी के अनुसार, 32 वर्षीय जुरखन जांगड़े कलिंगा कंपनी में ड्राइवर के पद पर तैनात थे। मंगलवार-बुधवार की दरमियानी रात जब वे अपनी ड्यूटी पर थे, तभी अचानक उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। चश्मदीदों के मुताबिक, जुरखन ने अपनी चलती हुई गाड़ी को सुरक्षित किनारे खड़ा किया और नीचे उतरे, लेकिन जमीन पर कदम रखते ही वे बेहोश होकर गिर पड़े।
वहाँ मौजूद अन्य सहकर्मियों ने तुरंत उन्हें उठाने का प्रयास किया। उस वक्त उनकी सांसें चल रही थीं, लेकिन स्थिति अत्यंत नाजुक थी। आनन-फानन में उन्हें नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ चिकित्सकों ने परीक्षण के उपरांत उन्हें मृत घोषित कर दिया।
मुआवजे और न्याय की मांग: कंपनी गेट पर लगा लंबा जाम
Korba श्रमिक की मौत की खबर फैलते ही सुबह से ही खदान क्षेत्र में आक्रोश भड़क उठा। मृतक के परिजन और बड़ी संख्या में साथी ड्राइवर कलिंगा कंपनी के गेट पर एकत्र हो गए और प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि:
- खदान के अंदर आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं का अभाव है।
- अत्यधिक काम के दबाव के कारण श्रमिकों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है।
- पीड़ित परिवार को तत्काल उचित मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को नौकरी दी जाए।
इस विरोध प्रदर्शन के कारण कोयला परिवहन और खदान के भीतर मशीनों का काम पूरी तरह बंद है, जिससे कंपनी को लाखों रुपये के नुकसान का अनुमान है।
पुलिस जांच और प्रशासनिक हस्तक्षेप
Korba घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस बल मौके पर पहुँचा और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मर्ग कायम कर लिया है। अधिकारियों का कहना है कि मौत के सटीक कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चल पाएगा।
फिलहाल, प्रशासन और कंपनी प्रबंधन प्रदर्शनकारियों से चर्चा कर बीच का रास्ता निकालने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर अड़े हुए हैं और उनका कहना है कि जब तक ठोस लिखित आश्वासन नहीं मिलता, वे गेट से नहीं हटेंगे।
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