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Report by: Manoj Kumar

Katihar : बिहार के कटिहार जिले से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ सेवा के नाम पर ‘सफेदपोश’ तस्करी का खेल चल रहा था। आजमनगर थाना पुलिस ने एक बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश करते हुए मोहम्मद महबूब आलम को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि महबूब एक गौशाला की आड़ में जब्त किए गए गोवंश को सुरक्षित रखने के बजाय उन्हें अवैध तरीके से बांग्लादेश तस्करी कर देता था।

गौशाला बनी तस्करी का सेफ हाउस: 155 मवेशी गायब

Katihar पुलिस की जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। गिरफ्तार आरोपी मोहम्मद महबूब आलम, जो बेरिया चांदपुर गांव का मुखिया भी है, उसने ‘SPCA’ (Society for Prevention of Cruelty to Animals) के नाम पर एक सोसाइटी बना रखी थी। इस सोसाइटी का काम विभिन्न थानों द्वारा जब्त किए गए मवेशियों को अदालती आदेश के बाद अपनी देखरेख (जिम्मेनामा) में रखना था।

13 मार्च को गुप्त सूचना मिलने के बाद जब पुलिस टीम ने आजमनगर थानाध्यक्ष नीरज मिश्रा के नेतृत्व में बैरिया चांदपुर स्थित गौशाला पर छापेमारी की, तो आंकड़ों में भारी अंतर मिला। सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, गौशाला में 270 मवेशी होने चाहिए थे, लेकिन भौतिक सत्यापन के दौरान वहां से 155 मवेशी गायब पाए गए। जांच में पुष्टि हुई कि इन मवेशियों को बिना किसी वैध कागजात के ऊंचे दामों पर तस्करी के लिए बेच दिया गया था।

एसपी का बयान: गिरोह के नेटवर्क पर पुलिस की पैनी नजर

Katihar पुलिस अधीक्षक (SP) शिखर चौधरी ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि आरोपी महबूब आलम काफी समय से इस अवैध धंधे में संलिप्त था। वह पुलिस द्वारा पकड़े गए पशुओं को ‘संरक्षण’ देने के नाम पर अपने कब्जे में लेता था और फिर रात के अंधेरे में अपने सहयोगियों की मदद से उन्हें बांग्लादेश की सीमा पार करवा देता था।

एसपी ने बताया, “मुखिया अपने पद और सोसाइटी के रसूख का इस्तेमाल कर मवेशियों की खरीद-बिक्री का अवैध केंद्र चला रहा था।” इस मामले में आजमनगर थाना में कांड संख्या-112/26 दर्ज कर ली गई है। पुलिस अब उन कड़ियों को जोड़ रही है जिनके जरिए ये मवेशी अंतरराष्ट्रीय सीमा तक पहुँचते थे।

सेवा की आड़ में सुरक्षा से खिलवाड़

Katihar इस खुलासे के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। गौशाला जैसी पवित्र संस्था का उपयोग तस्करी जैसे गंभीर अपराध के लिए करना न केवल धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ है, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था के लिए भी बड़ी चुनौती है। पुलिस अब आरोपी के बैंक खातों और पिछले कुछ वर्षों में उसे सौंपे गए मवेशियों के रिकॉर्ड खंगाल रही है ताकि इस रैकेट की पूरी गहराई का पता लगाया जा सके।

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