Report by: Ravindra Singh
Kanker : छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में नक्सलवाद के खिलाफ जारी अभियान के तहत पुलिस और सुरक्षाबलों को एक महत्वपूर्ण सफलता हाथ लगी है। क्षेत्र में सक्रिय दो ‘हार्डकोर’ नक्सलियों ने हिंसा का मार्ग त्याग कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया है। कोयलीबेड़ा इलाके के इन नक्सलियों ने पुलिस अधिकारियों के समक्ष औपचारिक रूप से हथियार डाले, जो राज्य में शांति बहाली की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
आधुनिक हथियारों के साथ ‘शंकर’ और ‘हिडमा’ का सरेंडर
Kanker आत्मसमर्पण करने वाले इन हार्डकोर नक्सलियों की पहचान शंकर और हिडमा के रूप में हुई है। इस सरेंडर की सबसे खास बात यह रही कि इनमें से एक नक्सली ने एके-47 (AK-47) जैसे अत्याधुनिक और घातक हथियार के साथ आत्मसमर्पण किया है।
नक्सली संगठन में एके-47 का होना यह दर्शाता है कि आत्मसमर्पण करने वाले कैडर ऊंचे पद या जिम्मेदारी पर थे। सुरक्षा बलों के लिए यह न केवल सामरिक दृष्टि से बड़ी उपलब्धि है, बल्कि नक्सलियों के गिरते मनोबल का भी परिचायक है। पुलिस प्रशासन इसे क्षेत्र में सक्रिय अन्य कैडरों के लिए एक कड़ा संदेश मान रहा है।
सरकार की पुनर्वास नीति का बढ़ता प्रभाव
Kanker एसपी के अनुसार, नक्सलियों के इस हृदय परिवर्तन के पीछे सरकार की कल्याणकारी नीतियां और पुलिस का बढ़ता दबाव प्रमुख कारण हैं।
- पुनर्वास योजना: राज्य सरकार की आकर्षक पुनर्वास नीति के चलते भटके हुए युवा अब हिंसा का रास्ता छोड़ रहे हैं। उन्हें आर्थिक सहायता और रोजगार के अवसर प्रदान किए जा रहे हैं।
- विकास कार्यों का असर: अंदरूनी इलाकों में सड़कों, स्कूलों और अस्पतालों के निर्माण से स्थानीय ग्रामीणों और नक्सलियों के बीच पैठ कम हुई है।
- पुलिस का मानवीय चेहरा: पुलिस द्वारा चलाए जा रहे ‘लोन वर्राटू’ (घर वापस आइये) जैसे अभियानों ने नक्सलियों के मन में सुरक्षा और गरिमापूर्ण जीवन की उम्मीद जगाई है।
नक्सलवाद के खात्मे की ओर बढ़ते कदम
Kanker पुलिस अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि यह तो केवल शुरुआत है। खुफिया जानकारी और स्थानीय सूत्रों के हवाले से खबर है कि कोयलीबेड़ा और आसपास के जंगलों में सक्रिय लगभग 15 अन्य नक्सली भी पुलिस के संपर्क में हैं और जल्द ही मुख्यधारा में शामिल हो सकते हैं।
वर्तमान में पूरे बस्तर संभाग में सुरक्षा बलों द्वारा सघन तलाशी अभियान चलाया जा रहा है, जिससे नक्सलियों की रसद और नेटवर्क पूरी तरह ध्वस्त हो गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जो नक्सली हथियार छोड़कर आएंगे, उनका स्वागत किया जाएगा, लेकिन हिंसा करने वालों के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” की नीति जारी रहेगी।
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