Report by: Prem Kumar
Jamshedpur : लौहनगरी के प्रतिष्ठित जेआरडी टाटा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में ‘हौसला 2026’ के तीसरे संस्करण का भव्य आयोजन किया गया। सीआईआई यंग इंडियंस (CII Yi) जमशेदपुर द्वारा आयोजित इस वार्षिक खेल उत्सव में लगभग 200 दिव्यांग बच्चों ने अपनी खेल प्रतिभा का प्रदर्शन किया। पूरा स्टेडियम उस वक्त तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा जब इन विशेष आवश्यकता वाले बच्चों ने अपनी शारीरिक सीमाओं को पीछे छोड़ते हुए मैदान पर साहस और उत्साह की नई इबारत लिखी।

मुख्य अतिथियों ने बढ़ाया बच्चों का मनोबल
Jamshedpur इस गरिमामयी कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सुरभि भटनागर और विशिष्ट अतिथि के रूप में लीना अडेसरा उपस्थित रहीं। उन्होंने दीप प्रज्वलित कर खेलों की शुरुआत की और बच्चों के अटूट संकल्प की सराहना की।
अतिथियों ने अपने संबोधन में कहा कि ‘हौसला’ जैसे आयोजन समाज में समावेशन (Inclusion) की भावना को मजबूत करते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यदि इन बच्चों को सही अवसर और पेशेवर मंच मिले, तो वे किसी भी क्षेत्र में अपनी चमक बिखेर सकते हैं।
एथलेटिक स्पर्धाओं में दिखा कड़ा मुकाबला
Jamshedpur ‘हौसला 2026’ का मुख्य उद्देश्य विशेष बच्चों को एक ऐसा मंच प्रदान करना था जहाँ वे अपनी क्षमताओं को दुनिया के सामने रख सकें। खेल दिवस के दौरान विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिनमें शामिल थे:
- दौड़ प्रतियोगिता: अलग-अलग श्रेणियों में बच्चों ने ट्रैक पर अपनी रफ़्तार का लोहा मनवाया।
- शॉट पुट (गोला फेंक): बच्चों ने अपनी शक्ति और तकनीक का प्रदर्शन किया।
- डिस्कस थ्रो (चक्का फेंक): इस तकनीकी स्पर्धा में भी बच्चों का उत्साह देखते ही बनता था।
मैदान पर उतरना और दर्शकों के प्रोत्साहन के बीच पदक जीतना इन बच्चों के लिए केवल एक खेल नहीं, बल्कि आत्म-सम्मान और गौरव का क्षण रहा।
बढ़ता प्रभाव और स्वयंसेवकों का समर्पण
Jamshedpur सीआईआई वाईआई (CII Yi) की एक्सेसिबिलिटी टीम और युवा वॉलंटियर्स के अथक प्रयासों ने इस आयोजन को सफल बनाया। हर बीतते साल के साथ ‘हौसला’ के प्रभाव और भागीदारी में निरंतर वृद्धि हो रही है। इस वर्ष 200 बच्चों की शिरकत यह दर्शाती है कि जमशेदपुर एक समावेशी समाज के निर्माण की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है।
कार्यक्रम के अंत में विजेताओं को पदक और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। यह आयोजन केवल एक खेल प्रतियोगिता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने यह सशक्त संदेश दिया कि “क्षमता” शरीर में नहीं, बल्कि मन के विश्वास में होती है।
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