Jabalpur: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की शाखाओं और कार्य की ऐतिहासिक यात्रा 1930 के दशक से शुरू हुई, जिसमें प्रमुख संघ प्रचारक और वरिष्ठ नेतृत्व ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। इस दौरान कई शाखाओं का निर्माण और संघ कार्य का विस्तार हुआ।
Jabalpur: केशव कुटी: संघ का स्थायी कार्यालय
वर्तमान संघ कार्यालय केशव कुटी का निर्माण तत्कालीन संघ प्रचारक रामाराव नायडू की देखरेख में हुआ। इसके बाद रायपुर और जबलपुर में संघ कार्यालयों का निर्माण भी श्री नायडू के मार्गदर्शन में हुआ। उन्होंने भारतीय मजदूर संघ और विश्व हिंदू परिषद में भी सक्रिय योगदान दिया और हटा, दमोह एवं सिवनी में संघ और सामाजिक केंद्रों की स्थापना की।
Jabalpur: जबलपुर की पहली शाखा
श्रीनाथ की तलैया में 6 जुलाई 1935 को जबलपुर की पहली शाखा शुरू हुई। इसका आरंभ मोरुभाऊ केतकर, बाबासाहब आपटे और दादाराव परमार्थ के प्रयासों से हुआ। पहली शाखा में लगभग 10 स्वयंसेवक शामिल थे, जिनमें रामचंद्र ठोसर, भार्गव बंधु और परोलकर प्रमुख थे।
गोल बाजार शाखा और गुरुजी का आगमन
दूसरी शाखा गोल बाजार (वर्तमान शहीद स्मारक) में 24 मार्च 1939 को संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार और द्वितीय सरसंघचालक माधव सदाशिवराव गोलवलकर (श्री गुरुजी) उपस्थित हुए। इस कार्यक्रम में लगभग 400 स्वयंसेवक शामिल थे। पंडित कुंजीलाल दुबे, श्रीराम नन्होरिया और मोती शंकर झा प्रमुख रूप से उपस्थित थे।
प्रारंभिक स्वयंसेवक और योगदान
गोल बाजार शाखा के प्रारंभिक स्वयंसेवकों में रामचंद्र ठोसर, गिरजा शंकर, द्वारिका तिवारी, सुभाष बनर्जी, अनंत राव ठोसर, माधव परांजपे और सीताराम विश्वकर्मा शामिल थे। इन स्वयंसेवकों ने जबलपुर में संघ कार्य को मजबूत आधार प्रदान किया।
केशव कुटी का शुभारंभ और स्थायी संचालन
जबलपुर में पहला संघ कार्यालय सिमरिया वाली रानी की कोठी में था। इसके बाद कार्यालय कृष्ण कुंज में स्थानांतरित हुआ और अंततः राइट टाउन स्थित केशव कुटी में स्थानांतरित किया गया। 1972 में गुरुजी ने इस कार्यालय का औपचारिक शुभारंभ किया। वरिष्ठ स्वयंसेवक अखिलेश सप्रे ने बताया कि उनके परिवार के योगदान से संघ कार्य का यह विस्तार संभव हुआ।
डॉ. हेडगेवार ने इस संबंध में कहा:
“संसार में शांति और सुव्यवस्था के लिए समस्थिति और संतुलन आवश्यक है। समान बल वालों में ही शांति और प्रेम संभव है।”
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