Report by: Ravindra Singh
Iran cyberwar : मध्य-पूर्व में बढ़ता तनाव अब केवल मिसाइलों और तेल की आपूर्ति तक सीमित नहीं रह गया है। दुनिया भर के तकनीकी विशेषज्ञों और रणनीतिकारों के बीच एक नया डर पैदा हो गया है— ‘डिजिटल ब्लैकआउट’। जिस तरह ईरान ने तेल की वैश्विक सप्लाई चेन और ‘स्ट्रैट ऑफ होर्मुज’ को प्रभावित करने की क्षमता दिखाई है, उसी तरह अब अंदेशा जताया जा रहा है कि अगला निशाना समुद्र के नीचे बिछा ‘सबमरीन केबल नेटवर्क’ हो सकता है, जो पूरी दुनिया को इंटरनेट से जोड़ता है।
सबमरीन केबल्स: वैश्विक कनेक्टिविटी की जीवनरेखा खतरे में
Iran cyberwar दुनिया का $97\%$ से अधिक इंटरनेट डेटा उपग्रहों के माध्यम से नहीं, बल्कि समुद्र के नीचे बिछी फाइबर ऑप्टिक केबल्स के जरिए प्रवाहित होता है। लाल सागर (Red Sea) और फारस की खाड़ी के पास का क्षेत्र इन केबल्स के लिए सबसे महत्वपूर्ण ‘चोक पॉइंट’ है।
ईरान की भौगोलिक स्थिति उसे इन केबल्स के करीब लाती है। यदि ईरान या उसके समर्थित समूह इन समुद्री केबल्स को भौतिक रूप से नुकसान पहुँचाते हैं, तो एशिया, यूरोप और अफ्रीका के बीच डिजिटल संचार पूरी तरह ठप हो सकता है। जानकारों का मानना है कि साइबर हमलों के बजाय फिजिकल केबल कटिंग (Physical Cable Cutting) एक ऐसा हथियार है, जिससे निपटना किसी भी देश के लिए तत्काल संभव नहीं होगा।
भारत पर प्रभाव: वर्क-फ्रॉम-होम से लेकर बैंकिंग तक सब होगा प्रभावित
Iran cyberwar भारत के लिए यह चिंता और भी गहरी है। भारत अपनी इंटरनेट बैंडविड्थ के लिए बड़े पैमाने पर उन केबल्स पर निर्भर है जो मिडिल-ईस्ट से होकर गुजरती हैं।
- आईटी सेक्टर: भारत का आईटी और बीपीओ उद्योग पूरी तरह से निर्बाध इंटरनेट पर टिका है। एक छोटा सा व्यवधान भी अरबों डॉलर के राजस्व का नुकसान करा सकता है।
- वित्तीय सेवाएं: बैंकिंग लेनदेन, शेयर बाजार और यूपीआई (UPI) जैसे डिजिटल भुगतान सिस्टम सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय डेटा गेटवे से जुड़े हैं।
- आम जनजीवन: आज शिक्षा, स्वास्थ्य (Telemedicine) और मनोरंजन के लिए इंटरनेट अनिवार्य है। इंटरनेट पर किसी भी तरह का प्रहार भारत की डिजिटल इकोनॉमी की रफ्तार को रोक सकता है।
साइबर वारफेयर: केवल केबल ही नहीं, क्लाउड भी निशाने पर
Iran cyberwar ईरान की क्षमता केवल भौतिक क्षति तक सीमित नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में ईरान ने अपने ‘साइबर आर्मी’ को काफी मजबूत किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे जैसे पावर ग्रिड, सरकारी सर्वर और संचार उपग्रहों पर बड़े पैमाने पर साइबर हमले कर सकता है।
यह अब केवल दो देशों के बीच की ‘भू-राजनीति’ (Geo-politics) नहीं रह गई है। यह एक ऐसा तकनीकी युद्ध है जिसमें जीत और हार का फैसला युद्ध के मैदान में नहीं, बल्कि डेटा सेंटरों और समुद्र की गहराइयों में होगा। यदि इंटरनेट की इस वैश्विक कड़ी में एक भी सेंध लगती है, तो वैश्विक व्यापार और आम आदमी की जिंदगी पटरी से उतर जाएगी।
Also Read This: Chuck Norris: कौन थे चक नोरिस? मार्शल आर्ट के दिग्गज, जिनसे प्रेरित हुए अक्षय कुमार

