by-Ravindra Sikarwar
नई दिल्ली: भारत सरकार ने उन ई-कॉमर्स प्लेटफार्मों की जांच शुरू कर दी है, जो कि उपयोगकर्ताओं से Cash-on-Delivery (COD) के विकल्प चुनने पर ऑर्डर मूल्य के अतिरिक्त शुल्क ले रहे हैं। उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रल्हाद जोशी ने इस तरह की प्रथाओं को “डार्क पैटर्न्स (dark patterns)” करार दिया है — यानी ऐसे डिज़ाइन या शुल्क-विन्यास जो उपभोक्ताओं को सूचना न दिए जाने या भ्रमित करने वाले तरीके से उन्हें अधिक भुगतान करने की स्थिति में ला देते हैं।
शिकायतें और उदाहरण:
- सोशल मीडिया पर एक उपयोगकर्ता ने बताया कि उसने Flipkart पर COD चुनने पर “ऑफर हैंडलिंग फी”, “पेमेंट हैंडलिंग फी” और “प्रोटेक्ट प्रॉमिस फी” नामक शुल्कों के रूप में ₹226 अतिरिक्त भरने पड़े, जबकि मूल ऑर्डर छूट के बाद का था।
- शिकायतें राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (National Consumer Helpline) पर भी दर्ज हो चुकी हैं।
सरकार की प्रतिक्रिया और कार्रवाई:
- उपभोक्ता मामलों की विभाग ने इस तरह की शिकायतों को देखा है, और एक विस्तृत जांच (detailed investigation) शुरू कर दी गयी है।
- मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा है कि यदि प्लेटफार्मों ने उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन किया है, तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- यह भी ध्यान दिया जा रहा है कि ये शुल्क खरीदार को ऑर्डर के किस चरण में दिखाए जाते हैं — अर्थात्, क्या शुल्क पहले से स्पष्ट होते हैं या चेक-आउट के बहुत आखिरी पड़ाव पर अचानक जुड़ जाते हैं।
“डार्क पैटर्न्स” क्या हैं?
यह वह शब्द है जिसका उपयोग उपभोक्ता धोखाधड़ी या विकृति (manipulation) की उन डिज़ाइन रणनीतियों के लिए किया जाता है जिनका उद्देश्य उपयोगकर्ता को कुछ ऐसा करने पर मजबूर करना या उनकी जागरूकता कम करना, जैसे:
- भुगतान के समय छिपे शुल्क दिखाना या उन्हें “उसे स्वीकार करना” मुश्किल बनाना
- “आपके पास मात्र कुछ आइटम बचे हैं” जैसा वक्त-सीमा बताकर त्वरित निर्णय लेने को प्रेरित करना
- कीमतों या ऑफर की जानकारी ऐसा देना कि उपभोक्ता सोचें कि वह बड़ा डिस्काउंट ले रहे हैं, जबकि अतिरिक्त शुल्क कुल कीमत को बढ़ा रहे हों।
प्रासंगिक आँकड़े:
- 53% तक अनुमान है कि 2025 में ई-कॉमर्स ऑर्डर्स में COD भुगतान विकल्प चुना जाएगा। यह दर समय-समय पर बदलती रही है; 2020 में यह लगभग 39% थी।
- अतिरिक्त शुल्क आमतौर पर ₹7-10 के बीच होते हैं, जो कि COD ऑर्डर पर लगाए जाते हैं।
संभावित प्रभाव और आगे की दिशा:
- यदि जांच में किसी प्लैटफार्म द्वारा उपभोक्ता अधिकारों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो उस कंपनी के लिए जुर्माना, सुधारात्मक आदेश, या डिजाइन/प्रदर्शन में बदलाव जैसे नियामक उपाय हो सकते हैं।
- इससे ई-कॉमर्स मंचों को ग्राहकों के प्रति अधिक पारदर्शी रहने का दबाव बढ़ेगा — जैसे कि शुल्कों की स्पष्ट सूचना देना, “hidden fees” बचना, और UI (उपयोगकर्ता इंटरफेस) डिज़ाइन में ऐसी प्रथाएँ न हो जो उपभोक्ता को भ्रमित करें।
- इससे उपभोक्ता विश्वास बढ़ सकता है और डिजिटल वाणिज्य (e-commerce) की विश्वसनीयता को मजबूती मिलेगी।
