Indore Elevated: नवलखा से एलआईजी चौराहे तक प्रस्तावित एलिवेटेड ब्रिज कॉरिडोर की योजना पर संशय के बादल छा गए हैं। शुक्रवार को रेसीडेंसी कोठी में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन और स्थानीय विधायकों के साथ तकनीकी विशेषज्ञों ने इस प्रोजेक्ट की उपयोगिता और तकनीकी व्यवहार्यता पर गंभीर सवाल उठाए।
Indore Elevated: तकनीकी खामियां और सर्वे रिपोर्ट पर विवाद
बैठक के दौरान एक्रोपोलिस कॉलेज द्वारा किए गए सर्वे और ब्रिज की प्रस्तावित 25 फीट ऊंचाई को लेकर विरोध हुआ। IIT विशेषज्ञ अंशुल अग्रवाल ने चेताया कि ब्रिज के बीच में ‘आर्म’ बनाने से ट्रैफिक धीमा हो सकता है और जाम की समस्या बढ़ सकती है। जनप्रतिनिधियों ने PWD के 2019 के पुराने सर्वे को वर्तमान ट्रैफिक आवश्यकताओं के हिसाब से अप्रासंगिक बताया। सुझाव दिया गया कि पूरे कॉरिडोर के बजाय प्रत्येक चौराहे पर अलग-अलग ब्रिज या उन्नत ट्रैफिक प्रबंधन मॉडल पर विचार किया जाए।
मेट्रो प्रोजेक्ट और बजट संबंधी चुनौतियां
इंदौर मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने चेताया कि यदि एबी रोड पर यह एलिवेटेड ब्रिज बनता है, तो भविष्य में मेट्रो लाइन बिछाना लगभग असंभव हो जाएगा। इसके अलावा, जमीन के नीचे मौजूद यूटिलिटी लाइनों को शिफ्ट करने में करीब 10 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च आएगा। बजट को लेकर भी मतभेद सामने आए। मंत्री विजयवर्गीय ने शुरुआती 300 करोड़ रुपये के बजट पर सवाल उठाए, जबकि PWD ने इसे 370 करोड़ रुपये में पूरा करने का दावा किया।
भविष्य की योजना और अंतिम निर्णय
सीनियर नेता सुमित्रा महाजन ने बैठक में कहा कि शहर की योजना अगले 25 से 40 वर्षों की जरूरतों के अनुसार ‘सिग्नल-लेस’ होनी चाहिए। इस गहन चर्चा के बाद विशेषज्ञों को आठ दिनों में विस्तृत रिपोर्ट कमिश्नर सुदाम खाड़े को सौंपने का निर्देश दिया गया। रिपोर्ट के आधार पर ही इस एलिवेटेड कॉरिडोर प्रोजेक्ट के भविष्य का अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
इस तरह, इंदौर की यह महत्त्वाकांक्षी योजना तकनीकी और बजटीय विवादों के कारण फिलहाल विशेषज्ञों के विचाराधीन है, और शहर की लंबी अवधि की ट्रैफिक योजना को ध्यान में रखकर ही अंतिम फैसला होगा।
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