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by-Ravindra Sikarwar

संयुक्त राज्य अमेरिका के नए वीज़ा नियम, भारत पर टैरिफ़, और राजनीतिक बयानों के चलते भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव देखने को मिल रहा है।

अमेरिका का नया वीज़ा नियम और भारतीय आवेदकों पर इसका प्रभाव:
संयुक्त राज्य अमेरिका ने एक नया वीज़ा नियम लागू किया है, जिसके तहत लगभग सभी विदेशी नागरिकों को अब अमेरिकी दूतावास में व्यक्तिगत रूप से इंटरव्यू देना अनिवार्य होगा। इससे पहले, कुछ श्रेणी के आवेदक, जैसे कि 14 वर्ष से कम और 79 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को इंटरव्यू से छूट मिल सकती थी। इस बदलाव से भारतीय आवेदकों को अब लंबी और जटिल प्रक्रिया से गुज़रना होगा, जिससे उनकी परेशानी बढ़ सकती है।

पीटर नवारो के भारत-विरोधी बयान और उनका खंडन:
पूर्व ट्रंप सहयोगी, पीटर नवारो, ने भारत के ख़िलाफ़ लगातार बयानबाज़ी की है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत, रूस से सस्ता तेल ख़रीदकर मुनाफा कमा रहा है और यह सब “मोदी युद्ध” का हिस्सा है। हालाँकि, सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ‘X’ ने इन दावों को फैक्ट-चेक किया है। एक कम्युनिटी नोट में स्पष्ट किया गया कि भारत की तेल खरीद का उद्देश्य ऊर्जा सुरक्षा है और यह किसी भी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध का उल्लंघन नहीं करती। नोट में यह भी कहा गया कि अमेरिका खुद भी रूस से कुछ खनिज और यूरेनियम आयात करता है, जो एक पाखंडपूर्ण व्यवहार है।

भारत-अमेरिका संबंधों में व्यापार और बयानबाज़ी:
ट्रंप प्रशासन ने रूस से तेल खरीदने के कारण भारत के सामानों पर 50% का टैरिफ़ लगा दिया है। यह टैरिफ़ पहले 25% था, जिसे बाद में बढ़ाकर 50% कर दिया गया। हालाँकि, ट्रंप ने हाल ही में भारत और पीएम मोदी के प्रति सकारात्मक टिप्पणी की है, जिसमें उन्होंने भारत-अमेरिका संबंधों को ‘बहुत खास’ बताया है। इस पर पीएम मोदी ने भी ट्रंप की भावनाओं की सराहना की है, लेकिन व्यापार पर लगे टैरिफ़ अभी भी जारी हैं। कुछ पूर्व राजनयिकों का मानना है कि ट्रंप को यह एहसास हो गया है कि भारत टैरिफ़ के सामने नहीं झुकेगा और यह उनकी व्यापार रणनीति के लिए सफल नहीं रहा है।