by-Ravindra Sikarwar
नई दिल्ली: भारत ने अपने महत्वाकांक्षी पाँचवीं पीढ़ी के उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान (AMCA) के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। भारत ने फ्रांसीसी कंपनी सैफ्रान (Safran) के साथ मिलकर इस विमान के इंजन को संयुक्त रूप से डिजाइन और विकसित करने के लिए एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस सौदे को भारत के रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
सौदे का विवरण और महत्व:
यह समझौता भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और फ्रांस की प्रमुख एयरोस्पेस कंपनी सैफ्रान के बीच हुआ है। इस सौदे का मुख्य उद्देश्य एएमसीए के लिए एक अत्याधुनिक, शक्तिशाली और तकनीकी रूप से उन्नत जेट इंजन का निर्माण करना है। सैफ्रान को लड़ाकू विमानों के इंजन बनाने में दशकों का अनुभव है, और यह वही कंपनी है जो राफेल विमानों के ‘स्नेक्मा एम88’ इंजन का निर्माण करती है।
इस संयुक्त उद्यम के तहत, दोनों देशों के इंजीनियर मिलकर काम करेंगे। यह समझौता न केवल इंजन के विकास तक सीमित है, बल्कि इसमें प्रौद्योगिकी का हस्तांतरण (transfer of technology) भी शामिल है, जो भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इससे भारत को भविष्य में अपने लड़ाकू विमानों के लिए स्वदेशी इंजन विकसित करने की क्षमता मिलेगी।
एएमसीए परियोजना की स्थिति:
उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान (AMCA) परियोजना भारत की एक प्रमुख रक्षा पहल है, जिसका लक्ष्य पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ (रडार से बच निकलने वाला) लड़ाकू विमान बनाना है। यह विमान भारतीय वायुसेना की भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए बनाया जा रहा है। इसका पहला प्रोटोटाइप 2028 तक तैयार होने की उम्मीद है। इस परियोजना में डीआरडीओ के वैमानिकी विकास एजेंसी (Aeronautical Development Agency – ADA) की अहम भूमिका है।
इस समझौते से एएमसीए परियोजना में तेजी आने की उम्मीद है, क्योंकि इंजन का विकास किसी भी लड़ाकू विमान की रीढ़ होता है। भारत लंबे समय से एक शक्तिशाली स्वदेशी इंजन की तलाश में था, और सैफ्रान के साथ यह साझेदारी इस लक्ष्य को पूरा करने में निर्णायक साबित होगी। यह सौदा भारत और फ्रांस के बीच बढ़ते रणनीतिक संबंधों को भी दर्शाता है।
