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मुंबई: भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव का असर आज भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को बाजार में गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, इससे पहले अमेरिकी बाजार में जबरदस्त तेजी देखी गई थी और एशियाई बाजारों में भी सकारात्मक रुझान था। इसके विपरीत, भारत में रुपये की कीमत भी डॉलर के मुकाबले कमजोर हुई है।

गौरतलब है कि बीते दिन पाकिस्तान के शेयर बाजार कराची स्टॉक एक्सचेंज को भारी गिरावट के बाद लोअर सर्किट लगाना पड़ा था।

आज सुबह भारतीय बाजारों की शुरुआत सकारात्मक रही थी। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स लगभग 342.52 अंकों यानी 0.43 फीसदी की तेजी के साथ 80,844.51 के स्तर पर खुला था, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी लगभग 93.15 अंकों यानी 0.38 फीसदी की बढ़त के साथ 24,439.85 के स्तर पर खुला था।

हालांकि, शुरुआती तेजी बरकरार नहीं रह सकी और सुबह 10 बजे तक बाजार लाल निशान में कारोबार करने लगा। खबर लिखे जाने तक (सुबह 10 बजे):

  • सेंसेक्स (BSE Sensex): 802.05 अंकों यानी 1.00 फीसदी की गिरावट के साथ 79,532.76 के स्तर पर कारोबार कर रहा था।
  • निफ्टी (NSE Nifty): 267.00 अंकों यानी 1.10 फीसदी की गिरावट के साथ 24,006.80 के आसपास कारोबार कर रहा था।

सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 25 में गिरावट दर्ज की गई, जबकि केवल 5 शेयरों में तेजी देखी गई। वहीं, निफ्टी के सभी 50 शेयरों में से 10 में बढ़त और 40 में गिरावट का रुख रहा। निवेशकों की निगाहें मुख्य रूप से डिफेंस (रक्षा) और कंजम्पशन (उपभोग) से जुड़े शेयरों पर टिकी हुई हैं। शुरुआती कारोबार में टाइटन और टाटा मोटर्स के शेयरों में कुछ बढ़त दिखाई दी थी, लेकिन व्यापक बाजार की गिरावट में यह तेजी टिक नहीं पाई।

इससे पहले, गुरुवार को भी भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ था। सेंसेक्स 412 अंक गिरकर 80,335 के स्तर पर और निफ्टी 141 अंक फिसलकर 24,274 के स्तर पर बंद हुआ था।

पाकिस्तान के शेयर बाजार की स्थिति और भी खराब है। पिछले दो दिनों में पाकिस्तान के शेयर बाजार में 10 फीसदी से ज्यादा की भारी गिरावट दर्ज की गई है, जो देश की आर्थिक अस्थिरता को दर्शाता है।

भारत और पाकिस्तान के बीच जारी तनाव का असर भारतीय मुद्रा पर भी पड़ा है। शुक्रवार को रुपया डॉलर के मुकाबले 10 पैसे कमजोर होकर खुला। शुरुआती कारोबार में एक डॉलर की कीमत 85.71 रुपये थी, जो बढ़कर 85.81 रुपये हो गई। रुपये में यह कमजोरी विदेशी मुद्रा बाजार में जोखिम aversion (जोखिम से बचाव) की भावना को दर्शाती है, क्योंकि निवेशक भू-राजनीतिक तनाव के समय सुरक्षित मानी जाने वाली मुद्राओं की ओर रुख करते हैं।

बाजार विश्लेषकों का मानना है कि भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ने से निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई है, जिसके चलते बाजार में यह गिरावट देखने को मिल रही है। हालांकि, वैश्विक बाजारों से सकारात्मक संकेत मिलने के बावजूद, घरेलू भू-राजनीतिक जोखिमों ने बाजार की तेजी को रोक दिया है। आने वाले दिनों में बाजार की दिशा मुख्य रूप से दोनों देशों के बीच तनाव की स्थिति और उससे जुड़े घटनाक्रमों पर निर्भर करेगी।