By: Ravindra Sikarwar
Himachal Pradesh news: धर्मशाला स्थित एक सरकारी कॉलेज में पढ़ने वाली 19 वर्षीय छात्रा की मौत ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। छात्रा की मौत कथित तौर पर रैगिंग और यौन उत्पीड़न के कारण हुई गंभीर मानसिक सदमे से जुड़ी बताई जा रही है। पुलिस ने छात्रा के पिता की शिकायत पर कॉलेज के एक प्रोफेसर और तीन सीनियर छात्राओं के खिलाफ मामला दर्ज किया है। यह घटना सितंबर 2025 की है, लेकिन छात्रा की मौत 26 दिसंबर 2025 को लुधियाना के एक अस्पताल में इलाज के दौरान हुई। मामले ने तब तूल पकड़ा जब मौत से पहले छात्रा द्वारा रिकॉर्ड किया गया एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
घटना का विवरण
सरकारी डिग्री कॉलेज, धर्मशाला में बीए सेकंड ईयर की छात्रा थीं। पिता की शिकायत के अनुसार, 18 सितंबर 2025 को तीन सीनियर छात्राओं – हर्षिता, आकृति और कोमोलिका – ने उनकी बेटी को बुरी तरह पीटा और धमकाया। यह रैगिंग का हिस्सा था, जिसमें शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना शामिल थी। इसके अलावा, कॉलेज के प्रोफेसर अशोक कुमार पर गंभीर आरोप लगे हैं कि उन्होंने छात्रा के साथ अश्लील हरकतें कीं, अनुचित तरीके से छुआ और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया।
छात्रा ने इन घटनाओं के बाद गहरा सदमा झेला, जिससे उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती गई। उन्हें कई अस्पतालों में भर्ती कराया गया और आखिरकार लुधियाना के दयानंद मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में 26 दिसंबर 2025 को उनकी मौत हो गई। परिवार का कहना है कि रैगिंग और यौन उत्पीड़न के कारण उत्पन्न तनाव ने उनकी सेहत को इतना खराब कर दिया कि वे उबर नहीं पाईं।
मौत से पहले का दिल दहला देने वाला वीडियो
मामले की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि छात्रा ने अपनी मौत से कुछ समय पहले मोबाइल फोन पर एक वीडियो रिकॉर्ड किया था, जिसमें उन्होंने अपनी आपबीती सुनाई। वीडियो में वे रोते हुए बताती हैं कि प्रोफेसर अशोक कुमार उन्हें अनुचित तरीके से छूते थे, अजीब-अजीब हरकतें करते थे और क्लासरूम में मानसिक रूप से तंग करते थे। जब उन्होंने विरोध किया तो धमकियां दी गईं। तीन सीनियर छात्राओं द्वारा की गई पिटाई और धमकियों का भी जिक्र किया। यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामले ने जोर पकड़ा और पुलिस पर कार्रवाई का दबाव बढ़ा।
वीडियो में छात्रा की आवाज कांपती हुई सुनाई देती है, जो इस बात की गवाही देती है कि वे कितने गहरे मानसिक आघात से गुजर रही थीं। इस वीडियो ने न केवल परिवार को बल्कि पूरे समाज को झकझोर दिया है।
पुलिस कार्रवाई और कानूनी धाराएं
कांगड़ा जिले के पुलिस अधीक्षक अशोक रतन ने बताया कि 1 जनवरी 2026 को पिता की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई। तीन छात्राओं पर रैगिंग और चोट पहुंचाने के आरोप में भारतीय न्याय संहिता की धारा 115(2) (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना), 3(5) (सामान्य इरादे से अपराध) और हिमाचल प्रदेश शैक्षणिक संस्थान (रैगिंग निषेध) अधिनियम 2009 की धारा 3 लगाई गई है। प्रोफेसर अशोक कुमार पर यौन उत्पीड़न की धारा 75 के तहत मामला दर्ज हुआ है।
पुलिस मेडिकल रिकॉर्ड्स, वीडियो सबूत और संबंधित लोगों के बयानों की जांच कर रही है। मौत का सटीक कारण जानने के लिए सभी पहलुओं को परखा जा रहा है। प्रोफेसर ने सभी आरोपों से इनकार किया है और कुछ शिक्षकों ने उनका समर्थन भी किया है। उनका कहना है कि छात्रा पिछली सत्र में उनके विषय की थी, लेकिन वर्तमान में नहीं।
जांच और सामाजिक प्रतिक्रिया
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और एक उच्चस्तरीय तथ्य-खोज समिति गठित की है। यूजीसी का कहना है कि छात्र सुरक्षा सर्वोपरि है और दोषियों को कड़ी सजा मिलेगी। पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
यह घटना एक बार फिर कॉलेजों में रैगिंग और यौन उत्पीड़न की समस्या को उजागर करती है। शिक्षा संस्थानों में छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सख्त नियमों और जागरूकता की जरूरत है। रैगिंग विरोधी हेल्पलाइन और शिकायत तंत्र को और मजबूत बनाने की मांग उठ रही है। समाज में ऐसे मामलों पर खुलकर चर्चा होनी चाहिए ताकि पीड़ित बिना डर के आगे आएं।
परिवार न्याय की गुहार लगा रहा है और उम्मीद है कि जांच से सच सामने आएगा। ऐसे जघन्य मामलों में दोषियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए ताकि दूसरों के लिए सबक बने और शिक्षा का माहौल सुरक्षित रहे।
