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by-Ravindra Sikarwar

भोपाल: महिलाओं एवं बाल विकास मंत्रालय के चिंताजनक आंकड़ों ने मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले को राष्ट्रीय स्तर पर बच्चों में स्टंटिंग (कुपोषण से होने वाली शारीरिक बाधित विकास) की दर में शीर्ष स्थान पर पहुंचा दिया है। यहां 58.20% बच्चों में स्टंटिंग पाई गई, जो राज्य में सबसे अधिक है। इस स्थिति ने पोषण ट्रैकर पहल के तहत पोषण अभियानों को तेज करने की मांग को जोरदार तरीके से उठाया है, ताकि बच्चों के स्वास्थ्य को बचाया जा सके और भविष्य की पीढ़ी को मजबूत बनाया जाए।

स्टंटिंग क्या है और इसके प्रभाव:
स्टंटिंग बच्चों के पुरानी कुपोषण की समस्या को दर्शाती है, जिसमें लंबाई आयु के अनुसार कम रह जाती है। यह न केवल शारीरिक विकास को प्रभावित करती है, बल्कि मस्तिष्क विकास, सीखने की क्षमता और प्रतिरक्षा प्रणाली को भी कमजोर बनाती है। मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, भारत में 35% से अधिक बच्चे स्टंटिंग का शिकार हैं, लेकिन शिवपुरी जैसे जिलों में यह दर राष्ट्रीय औसत से कहीं अधिक है। विशेषज्ञों का कहना है कि गरीबी, अस्वच्छ पानी, अपर्याप्त आहार और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी इस समस्या के प्रमुख कारण हैं।

मंत्रालय के आंकड़ों का विवरण:
महिलाओं एवं बाल विकास मंत्रालय ने हाल ही में जारी की गई रिपोर्ट में राष्ट्रीय पोषण सर्वेक्षण के आंकड़ों को साझा किया है। इसमें मध्य प्रदेश के 52 जिलों में से शिवपुरी को बच्चों (0-5 वर्ष) में स्टंटिंग दर 58.20% के साथ सबसे ऊपर रखा गया है। राज्य के अन्य जिलों, जैसे डिंडोरी (55.80%) और बालाघाट (54.30%), भी चिंताजनक स्तर पर हैं, लेकिन शिवपुरी की स्थिति सबसे गंभीर है। रिपोर्ट में कहा गया है कि स्टंटिंग दर ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक है, जहां 62% बच्चे प्रभावित हैं। यह आंकड़ा 2024 के सर्वेक्षण पर आधारित है, जो पोषण ट्रैकर ऐप के माध्यम से एकत्रित किए गए हैं।

शिवपुरी जिले की स्थिति:
शिवपुरी जिला, जो मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में स्थित है, आर्थिक रूप से पिछड़ा हुआ है। यहां कृषि पर निर्भरता अधिक है, लेकिन सूखा, बाढ़ और गरीबी ने पोषण स्तर को प्रभावित किया है। जिले में आंगनवाड़ी केंद्रों की संख्या पर्याप्त नहीं है, और आहार वितरण में देरी की शिकायतें आम हैं। स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि आदिवासी और दलित समुदायों के बच्चे सबसे अधिक प्रभावित हैं, जहां माताओं की शिक्षा और जागरूकता की कमी समस्या को बढ़ा रही है।

पोषण ट्रैकर पहल और मांगें:
पोषण ट्रैकर एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जो आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को बच्चों के वजन, ऊंचाई और आहार की निगरानी करने में मदद करता है। मंत्रालय ने इस पहल के तहत शिवपुरी में विशेष पोषण अभियान शुरू करने का निर्देश दिया है। सामाजिक संगठनों और विशेषज्ञों ने मांग की है कि:

  • आंगनवाड़ी केंद्रों पर पोषण पूरक (जैसे दूध, अंडा और फल) की आपूर्ति बढ़ाई जाए।
  • माताओं के लिए जागरूकता शिविर और स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित किए जाएं।
  • स्थानीय स्तर पर पोषण उद्यान विकसित किए जाएं, ताकि ताजा सब्जियां उपलब्ध हों।
  • बजट में वृद्धि कर पोषण कार्यक्रमों को मजबूत किया जाए।

मध्य प्रदेश सरकार ने तत्काल प्रभाव से शिवपुरी में एक विशेष टास्क फोर्स गठित करने की घोषणा की है, जो तीन महीनों में स्टंटिंग दर को 10% कम करने का लक्ष्य रखेगी।

स्थानीय लोगों और अधिकारियों की प्रतिक्रिया:
शिवपुरी के निवासियों ने आंकड़ों पर गहरी चिंता जताई है। एक स्थानीय मां, कमला बाई ने कहा, “हमारे बच्चे कमजोर हो रहे हैं, लेकिन सरकारी सहायता समय पर नहीं पहुंचती। हमें बेहतर भोजन और दवाओं की जरूरत है।” जिला कलेक्टर ने कहा, “यह आंकड़े हमें झकझोरने वाले हैं। हम पोषण ट्रैकर के माध्यम से हर बच्चे की निगरानी करेंगे और अभियान तेज करेंगे।” विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि तत्काल कदम नहीं उठाए गए, तो यह समस्या राष्ट्रीय स्वास्थ्य संकट बन सकती है।

भविष्य की योजनाएं:
मंत्रालय ने राष्ट्रीय स्तर पर ‘पोषण माह’ अभियान को मजबूत करने की योजना बनाई है, जिसमें शिवपुरी जैसे उच्च जोखिम वाले जिलों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके अलावा, एनजीओ के साथ साझेदारी कर मोबाइल पोषण वैन और स्कूल फीडिंग प्रोग्राम शुरू किए जाएंगे। सरकार का लक्ष्य 2030 तक स्टंटिंग दर को 25% से नीचे लाना है, जो सतत विकास लक्ष्यों (SDG) का हिस्सा है।

शिवपुरी में 58.20% स्टंटिंग दर मध्य प्रदेश और पूरे देश के लिए एक चेतावनी है। महिलाओं एवं बाल विकास मंत्रालय के आंकड़ों ने न केवल समस्या की गंभीरता उजागर की है, बल्कि पोषण ट्रैकर जैसी पहलों को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी बल दिया है। यदि अब तीव्र अभियान चलाए गए, तो हम बच्चों के भविष्य को बचा सकते हैं। यह समय कार्रवाई का है, ताकि हर बच्चा स्वस्थ और मजबूत भारत का निर्माण कर सके।