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Report by: Prabhat Kumar

Godda : झारखंड के गोड्डा जिले अंतर्गत ठाकुर गंगटी प्रखंड के रूंजी गांव में इन दिनों आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हो रहा है। स्थानीय चैती दुर्गा मंदिर परिसर में आयोजित श्री श्री 108 श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ ने क्षेत्र के हजारों श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित किया है। वृंदावन की पावन धरा से पधारे सुप्रसिद्ध कथावाचक आचार्य बाल व्यास चंदन शरद जी महाराज की अमृतवाणी ने श्रोताओं को भक्ति के रस में सराबोर कर दिया है।

ध्रुव चरित्र और संस्कारों की सीख: नई पीढ़ी को जोड़ने का आह्वान

Godda कथा के चतुर्थ एवं पंचम दिवस की बेला में महाराज जी ने भक्त ध्रुव और भगवान राम-कृष्ण के प्राकट्य प्रसंगों का अत्यंत मार्मिक वर्णन किया। ध्रुव चरित्र की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि मात्र पांच वर्ष की अल्पायु में दृढ़ संकल्प के बल पर बालक ध्रुव ने घनघोर तपस्या कर परमात्मा को प्राप्त किया। आज भी आकाश में ‘ध्रुव तारा’ उनके अटल विश्वास और भक्ति का प्रमाण है।

महाराज जी ने समाज को एक महत्वपूर्ण संदेश देते हुए कहा:

“अभिभावकों को चाहिए कि वे स्वयं के साथ-साथ अपने बच्चों को भी सत्संग में अवश्य लाएं। यदि बचपन से ही उनमें ध्रुव और प्रहलाद जैसे महापुरुषों के संस्कार पड़ेंगे, तभी वे भविष्य में माता-पिता की सेवा और राष्ट्र के प्रति समर्पित नागरिक बन पाएंगे।”

उन्होंने जोर देकर कहा कि कथा केवल सुनने की वस्तु नहीं, बल्कि मन को श्रद्धा के साथ परमात्मा के चरणों में समर्पित करने का माध्यम है।

नंदोत्सव में झूम उठा रूंजी: ‘साक्षात कृष्ण’ के अवतरण का हुआ अनुभव

Godda कथा के दौरान जब भगवान श्री राम और श्री कृष्ण के जन्म का प्रसंग आया, तो पूरा पंडाल ‘नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ के जयकारों से गूँज उठा। महाराज जी ने प्रसंग सुनाया कि कैसे भगवान भोलेनाथ, नन्हे कान्हा के दर्शन के लिए रूप बदलकर गोकुल आए थे। कृष्ण जन्मोत्सव के अवसर पर आयोजन समिति द्वारा लड्डू, पेड़े, खिलौने और मिठाइयां बांटी गईं।

भजन संध्या के समय जब “लेकर जाना रे हरि का नाम थोड़ा-थोड़ा” का गायन शुरू हुआ, तो श्रद्धालु अपनी सुध-बुध खोकर नृत्य करने लगे। माहौल ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो साक्षात भगवान कृष्ण ने रूंजी की इस पावन धरती पर अवतार ले लिया हो। भक्ति और आनंद के इस अनूठे संगम ने हर किसी को भाव-विभोर कर दिया।

व्यापक जनसहभागिता और भव्य आयोजन की व्यवस्था

Godda इस ज्ञान यज्ञ की सफलता में रूंजी दुर्गा पूजा समिति और स्थानीय ग्रामीणों का अतुलनीय योगदान रहा है। आयोजन को सुव्यवस्थित करने में समिति के अध्यक्ष प्रमोद कुमार सुमन, सचिव बनारसी मंडल, कोषाध्यक्ष जितेंद्र पाठक और उपाध्यक्ष जयप्रकाश मंडल सहित पूरी टीम दिन-रात जुटी हुई है।

क्षेत्रीय प्रभाव: इस कथा का प्रभाव केवल रूंजी गाँव तक सीमित नहीं है, बल्कि आसपास की पंचायतों और जिलों तक फैल गया है:

  • निकटवर्ती पंचायतें: पंजराडीह, फुलबड़िया, मिश्र गंगटी, माल मंडरो, बुधवाचक और बनियादी।
  • पड़ोसी क्षेत्र: बोआरीजोर प्रखंड और साहिबगंज जिले के मंडरो प्रखंड से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रतिदिन कथा श्रवण करने पहुँच रहे हैं।

इंद्रजीत मंडल, देवानंद मंडल, पप्पू कुमार शाह और अशोक शाह जैसे सक्रिय सदस्यों के नेतृत्व में युवाओं की टोली आगंतुकों की सेवा और अनुशासन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। यह आयोजन क्षेत्र में सांप्रदायिक सौहार्द और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बन गया है।

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