Report by: Yogendra Singh
Gariaband : छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के फिंगेश्वर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में स्वास्थ्य व्यवस्थाएं वेंटिलेटर पर नजर आ रही हैं। 30 बिस्तरों वाले इस सरकारी अस्पताल में डॉक्टरों की गैरमौजूदगी और सुविधाओं के अभाव ने ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा की पोल खोल दी है। दूर-दराज के गांवों से इलाज की उम्मीद लेकर आने वाले मरीजों को यहाँ केवल मायूसी और आक्रोश मिल रहा है।
Gariaband सोनोग्राफी के नाम पर धोखा: कमरे में बंद मशीन, मरीजों को निजी केंद्रों का सहारा
अस्पताल की सबसे गंभीर समस्या सोनोग्राफी सेवाओं को लेकर है। जानकारी के अनुसार, अस्पताल में लाखों रुपये की सोनोग्राफी मशीन उपलब्ध है, लेकिन वह पिछले कई महीनों से एक कमरे में ताले के अंदर बंद पड़ी है। नियमानुसार निर्धारित दिन और समय पर भी डॉक्टर के न पहुँचने से सोनोग्राफी कराने आई गर्भवती महिलाओं और अन्य मरीजों को घंटों कतार में खड़े रहने के बाद खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। मजबूरी में गरीबों को निजी क्लीनिकों में जाकर भारी भरकम फीस चुकानी पड़ रही है, जिससे शासन की ‘निःशुल्क जांच’ योजना का मखौल उड़ रहा है।
Gariaband विशेषज्ञों का अकाल: 30 बिस्तरों का ढांचा, पर डॉक्टर गायब
फिंगेश्वर का यह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र 30 बिस्तरों की क्षमता रखता है और आसपास के दर्जनों गांवों के लिए लाइफलाइन है। हालांकि, भवन की चकाचौंध के पीछे विशेषज्ञों की भारी कमी छिपी है। मरीजों का आरोप है कि यहाँ डॉक्टर अपनी ड्यूटी पर समय से नहीं पहुँचते। ओपीडी (OPD) के समय में भी कुर्सियां खाली रहती हैं, जिसके कारण गंभीर मरीजों को या तो जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है या वे बिना इलाज के ही लौट जाते हैं।
Gariaband ग्रामीण महिलाओं का आक्रोश: घंटों इंतजार के बाद फूटा गुस्सा
अस्पताल परिसर में उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई जब सुबह 7 बजे से भूखी-प्यासी बैठी ग्रामीण महिलाओं का सब्र टूट गया। सोनोग्राफी के लिए आईं महिलाओं का कहना था कि उन्हें बार-बार तारीख दी जाती है, लेकिन जब वे पहुँचती हैं तो डॉक्टर उपलब्ध नहीं होते। “अस्पताल में न पानी की व्यवस्था है और न बैठने की सही जगह, ऊपर से घंटों इंतजार के बाद पता चलता है कि डॉक्टर साहब नहीं आएंगे,” एक आक्रोशित महिला मरीज ने बताया।
Gariaband प्रशासन की चुप्पी और स्थानीय मांग
लचर स्वास्थ्य सेवाओं और विशेषज्ञों की कमी ने पूरे क्षेत्र में प्रशासन के खिलाफ नाराजगी पैदा कर दी है। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सोनोग्राफी मशीन चालू नहीं की गई और डॉक्टरों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन को बाध्य होंगे। लोगों की मांग है कि स्वास्थ्य विभाग इस बदहाली का संज्ञान ले और लापरवाह कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई करे ताकि गरीबों को उनका संवैधानिक स्वास्थ्य अधिकार मिल सके।
Also Read This: Bhopal : मध्यप्रदेश में भी दस्तक देगा ‘समान नागरिक संहिता’, उत्तराखंड और गुजरात की राह पर कदम बढ़ाएगी सरकार

