by-Ravindra Sikarwar
पेरिस: वैश्विक वित्तीय अपराध निगरानी संस्था फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) ने पाकिस्तान को स्पष्ट संदेश दिया है कि 2022 में ग्रे लिस्ट से हटना इसका यह मतलब नहीं कि यह आतंकवादी फंडिंग या मनी लॉन्ड्रिंग की वैश्विक जांच से मुक्त हो गया है। एफएटीएफ की अध्यक्ष एलिसा डी एंडा मद्राजो ने फ्रांस में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जोर देकर कहा कि कोई भी देश, चाहे वह ग्रे लिस्ट पर हो या इससे बाहर, अपराधियों की गतिविधियों के प्रति पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। उन्होंने पाकिस्तान समेत सभी देशों से अपील की कि वे अवैध वित्तीय गतिविधियों को रोकने के लिए निरंतर प्रयास जारी रखें।
मद्राजो ने कहा, “ग्रे लिस्ट से हटना प्रक्रिया का अंत नहीं है। हम सभी देशों से अपेक्षा करते हैं कि वे अपनी प्रणालियों को मजबूत करें और अपराधियों के लिए छिपने की गुंजाइश को समाप्त करें।” यह बयान तब आया जब हालिया रिपोर्ट्स में पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों, विशेष रूप से जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) द्वारा डिजिटल वॉलेट और क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से प्रशिक्षण शिविरों को फंडिंग करने के मामले सामने आए हैं। एफएटीएफ की ताजा रिपोर्ट ‘टेररिस्ट फाइनेंसिंग रिस्क्स पर व्यापक अपडेट’ में इन उभरते खतरों को चिह्नित किया गया है, जहां अपराधी वित्तीय प्रवाह को छिपाने के नए तरीके अपना रहे हैं।
पाकिस्तान को अक्टूबर 2022 में ग्रे लिस्ट से हटाया गया था, जब उसने एफएटीएफ के 34 मानदंडों में से अधिकांश पर अनुपालन दिखाया। ग्रे लिस्ट, जिसे आधिकारिक रूप से ‘बढ़ी हुई निगरानी वाली देशों की सूची’ कहा जाता है, उन राष्ट्रों को चिह्नित करती है जहां आतंक फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग रोकने में रणनीतिक कमियां हैं। हालांकि, पाकिस्तान एफएटीएफ का सदस्य न होने के कारण एशिया पैसिफिक ग्रुप (एपीजी) द्वारा फॉलो-अप जांच के दायरे में है, जो सुनिश्चित करता है कि निर्धारित उपायों का कार्यान्वयन हो रहा है। एपीजी की रिपोर्ट में पाकिस्तान को क्षेत्र में विस्तारवादी फाइनेंसिंग के लिए उच्च जोखिम वाला देश बताया गया है।
भारत की 2022 नेशनल रिस्क असेसमेंट रिपोर्ट में भी पाकिस्तान को आतंक फंडिंग का प्रमुख स्रोत माना गया है, जहां औपचारिक अनुपालन के बावजूद खतरे बने हुए हैं। एफएटीएफ का उद्देश्य स्पष्ट है: वैश्विक मानकों को मजबूत करना और मूल्यांकन व निगरानी के माध्यम से कार्यान्वयन सुनिश्चित करना, ताकि आतंकवादी और अपराधी अपने फंड्स से वंचित रहें। मद्राजो ने कहा, “हमारा लक्ष्य सरल है—आतंकियों और अपराधियों को उनकी जरूरी पूंजी से दूर रखना।”
यह चेतावनी पाकिस्तान के लिए एक कूटनीतिक झटका है, जो ग्रे लिस्ट से बाहर आने के बाद अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सहायता और प्रतिष्ठा में सुधार की उम्मीद कर रहा था। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल माध्यमों से फंडिंग के बढ़ते मामलों ने एफएटीएफ को सतर्क कर दिया है, और पाकिस्तान को अब और कड़े कदम उठाने पड़ेंगे। वैश्विक सहयोग के बिना, ऐसे देशों पर नजर बनी रहेगी।
