By: Ravindra Sikarwar
जबलपुर तहसील के ग्राम घंसौर में पिछले कई महीनों से एक ऐसी कहानी आकार ले रही थी, जिसमें ग्रामीण डर, दबाव और अनदेखी का शिकार हो रहे थे। लेकिन इस कहानी का अंत ठीक वैसे ही हुआ जैसा किसी न्यायपूर्ण कथा में होना चाहिए—साहस, एकजुटता और प्रशासनिक सख़्ती की जीत के साथ। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि गांव की वही आम जनता, जिसे एक निजी कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा धमकाया और दबाया जा रहा था, आखिरकार अपनी आवाज़ उठाने में सफल हुई। इसी आवाज़ ने 8600 वर्गफीट सरकारी भूमि को उसकी असली पहचान वापस दिलाई।
ग्राम घंसौर में एक निजी कंपनी ने ग्रामीणों की आंखों के सामने ही शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा जमा लिया था। वह न सिर्फ उस जमीन पर पहुंचकर मिट्टी का अवैध उत्खनन कर रही थी, बल्कि ग्रामीणों को डराकर इस कब्जे को स्थायी बनाने का प्रयास भी कर रही थी। स्थानीय लोगों के लिए यह दृश्य बेहद कष्टदायक था, क्योंकि यह जमीन गांव के विकास और सामुदायिक उपयोग के लिए चिन्हित थी। लेकिन कंपनी की मशीनें दिन-रात वहां काम कर रही थीं। मिट्टी के ढेर उठते, ट्रैक्टर और डंपर गुजरते, और ग्रामीण देखते रहते—मगर भीतर ही भीतर उनका आक्रोश बढ़ता जा रहा था।
आखिरकार गांव के कुछ बुजुर्गों और युवाओं ने निर्णय लिया कि वे इस अन्याय को और नहीं सहेंगे। उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालते हुए राजस्व विभाग तक शिकायत पहुंचाई। शिकायत में साफ लिखा था कि निजी कंपनी न केवल सरकारी भूमि पर कब्जा कर रही है, बल्कि पंचायत और ग्रामीणों को धमकाकर अपनी मनमानी भी चला रही है। इस शिकायत को राजस्व विभाग ने गंभीरता से लिया, और तुरंत जांच के आदेश दिए गए।
कुछ ही दिनों में तहसीलदार और राजस्व अमला गांव पहुंचा। उन्होंने मौके पर जाकर न सिर्फ कंपनी की मशीनरी देखी, बल्कि यह भी पाया कि 8600 वर्गफीट क्षेत्र पर अवैध कब्जा कर उसका उपयोग किया जा रहा था। राजस्व विभाग ने तुरंत कार्रवाई करते हुए यह कब्जा हटवाया। कंपनी की भारी-भरकम मशीनों को हटाया गया, और जो मिट्टी अवैध रूप से निकाली गई थी, उसकी जांच भी शुरू की गई। यह दृश्य गांववालों के लिए राहत की सांस लेकर आया—उन्हें लगा कि उनकी आवाज़ वाकई मायने रखती है।
कार्रवाई के दौरान ग्रामीणों की एक भीड़ वहां मौजूद थी। उनके चेहरे पर संतोष और गर्व साफ दिखाई दे रहा था। विशेषकर वे बुजुर्ग ग्रामीण, जिन्होंने शिकायत दर्ज कराने में अग्रणी भूमिका निभाई थी, आज खुद को विजेता महसूस कर रहे थे। गांव की महिलाएं और युवाओं ने भी अधिकारियों के निर्णय की सराहना की, क्योंकि यह जमीन गांव के हित के लिए जरूरी थी।
कार्रवाई के बाद राजस्व विभाग ने स्पष्ट किया कि सरकारी भूमि पर किसी भी तरह का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। क्षेत्र की अन्य विवादित जमीनों की भी जांच शुरू की जा रही है। अधिकारियों ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि उन्हें कोई डरने की जरूरत नहीं है, कानून उनके साथ है।
घंसौर की यह घटना इस बात का बेहतरीन उदाहरण है कि जब जनता और प्रशासन मिलकर खड़े होते हैं, तो सबसे बड़े अतिक्रमणकारी भी टिक नहीं पाते। यह सिर्फ जमीन की वापसी नहीं, बल्कि ग्रामीणों के आत्मविश्वास, एकजुटता और अधिकारों की भी जीत है।
