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Report by: Ganesh Singh

Delhi : बिहार की राजनीति में आज का दिन एक बड़े अध्याय के अंत और नई शुरुआत का गवाह बनने जा रहा है। पिछले दो दशकों से बिहार की सत्ता के केंद्र रहे नीतीश कुमार आज दिल्ली में राज्यसभा सदस्य के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ लेंगे। दोपहर 12:15 बजे होने वाले इस शपथ ग्रहण समारोह के लिए संसद भवन में सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री पद से हटकर दिल्ली की राजनीति में कदम रखना बिहार के लिए एक बड़े राजनीतिक बदलाव का संकेत है, जिससे राज्य में नए नेतृत्व के उदय का रास्ता साफ हो गया है।

Delhi ‘अब दिल्ली में भी काम करूँगा’: नीतीश के बयान ने दी अटकलों को हवा

शपथ ग्रहण से ठीक पहले नीतीश कुमार के एक बयान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा, “मैंने बहुत लंबे समय तक बिहार की सेवा की है और वहां के विकास के लिए काफी काम किया है। अब समय आ गया है कि मैं दिल्ली में भी नई भूमिका निभाऊं और देश के लिए काम करूं।” उनके इस बयान को इस बात की पुष्टि माना जा रहा है कि वे अब बिहार की बागडोर किसी नए उत्तराधिकारी को सौंपने के लिए पूरी तरह मानसिक रूप से तैयार हैं। उनके केंद्र में जाने से जदयू (JDU) और एनडीए के बीच नई शक्ति संरचना बनने की उम्मीद है।

Delhi प्रधानमंत्री से मुलाकात और दिल्ली में अहम बैठकों का दौर

राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने के बाद नीतीश कुमार की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की प्रबल संभावना है। इस हाई-प्रोफाइल बैठक में बिहार के भविष्य और केंद्र में नीतीश कुमार की नई जिम्मेदारी पर अंतिम मुहर लग सकती है। इस दौरान उनके साथ पार्टी के वरिष्ठ नेता ललन सिंह और संजय झा भी मौजूद रहेंगे। वहीं दूसरी ओर, दिल्ली में ही बिहार बीजेपी कोर ग्रुप की एक महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। माना जा रहा है कि इस बैठक में बिहार के अगले मुख्यमंत्री के नाम का चयन कर लिया जाएगा ताकि राज्य में सत्ता का हस्तांतरण सुचारू रूप से हो सके।

Delhi 20 साल का सफर और 15 अप्रैल की डेडलाइन

नीतीश कुमार साल 2005 से (जीतन राम मांझी के कुछ महीनों के कार्यकाल को छोड़कर) लगातार बिहार के मुख्यमंत्री रहे हैं। लगभग 20 साल बाद बिहार की राजनीति में यह सबसे बड़ा नेतृत्व परिवर्तन होने जा रहा है। हाल ही में नीतीश कुमार ने बिहार विधान परिषद (MLC) की सदस्यता से इस्तीफा देकर अपने इरादे स्पष्ट कर दिए थे। राजनीतिक सूत्रों और एनडीए की हलचल को देखें तो 15 अप्रैल तक बिहार को नया मुख्यमंत्री मिल सकता है। कयास लगाए जा रहे हैं कि भाजपा और जदयू मिलकर एक ऐसे चेहरे पर दांव लगाएंगे जो आगामी चुनावों में सामाजिक समीकरणों को साध सके।

Delhi एनडीए की एकजुटता और शासन के ‘नीतीश मॉडल’ का भविष्य

बिहार सरकार के वरिष्ठ मंत्री विजय चौधरी ने इन बदलावों के बीच गठबंधन की मजबूती का दावा किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नीतीश कुमार का केंद्र की राजनीति में जाना गठबंधन की किसी अस्थिरता का संकेत नहीं है, बल्कि यह एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। एनडीए के सभी सहयोगी दल एकजुट हैं और नया नेतृत्व भी नीतीश कुमार के ‘विकास और सुशासन’ के मॉडल को ही आगे बढ़ाएगा। हालांकि, विपक्ष इस बदलाव को नीतीश कुमार की विदाई के रूप में देख रहा है, लेकिन सत्ता पक्ष इसे “डबल इंजन” सरकार को और अधिक सशक्त करने की दिशा में उठाया गया कदम बता रहा है।

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